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चकबंदी अधिकारी पर 4 लाख घूस लेने का आरोप, DM को प्रार्थना पत्र देकर की ये मांग

चकबंदी अधिकारी पर 4 लाख घूस लेने का आरोप, DM को प्रार्थना पत्र देकर की ये मांग
May 07, 2026, 08:53 AM
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Posted By Preeti Kumari

Consolidation officer accused of taking bribe of 4 lakh rupees, this demand made by submitting a petition to DM


वाराणसी: जिले के चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है. रोहनिया क्षेत्र के मिसिरपुर गांव निवासी एक युवक ने बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (SOC) पर चार लाख रुपये रिश्वत लेने और इसके बावजूद विपक्षी पक्ष के समर्थन में फैसला सुनाने का आरोप लगाया है. पीड़ित ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच कराने के साथ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मची हुई है.


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जमीन से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज


मिसिरपुर निवासी अभिषेक गिरी के अनुसार, उनकी पुश्तैनी जमीन से जुड़ा विवाद बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की अदालत में विचाराधीन था. यह मामला अपील संख्या 852/2024 के रूप में चल रहा था. प्रार्थी का कहना है कि उनके पास जमीन से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज और कानूनी साक्ष्य मौजूद थे, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि फैसला उनके पक्ष में आएगा, लेकिन सुनवाई के दौरान कथित तौर पर उनसे रिश्वत की मांग की जाने लगी. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पवन कुमार सिंधु ने सुनवाई के दौरान अभिषेक गिरी को अपने चैम्बर में बुलाया. वहां अधिकारी ने कथित रूप से कहा कि यदि चार लाख रुपये की व्यवस्था नहीं की गई तो उनकी अपील निरस्त कर दी जाएगी. इतना ही नहीं, उन्हें यह भी चेतावनी दी गई कि यदि फैसला उनके खिलाफ गया तो उनकी पुश्तैनी जमीन भी हाथ से निकल सकती है.


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अधिकारी को सौंपे चार लाख रुपये नकदी


पीड़ित के मुताबिक अधिकारी की धमकी और दबाव के कारण परिवार के लोगों ने किसी तरह रकम की व्यवस्था की. शिकायतकर्ता का दावा है कि रुपये देने के लिए उन्हें चांदपुर स्थित अधिकारी के निजी आवास पर बुलाया गया. आरोप है कि शाम करीब सात बजे वे वहां पहुंचे और चार लाख रुपये नकद अधिकारी को सौंप दिए. शिकायतकर्ता के अनुसार रकम लेने के बाद अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि अब फैसला उनके पक्ष में कर दिया जाएगा.

लेकिन कुछ दिनों बाद पूरा मामला पलट गया. अभिषेक गिरी का आरोप है कि 27 अप्रैल 2026 को अधिकारी ने उन्हें दोबारा बुलाया और कहा कि विपक्षी पक्ष उनसे अधिक रकम देने को तैयार है. शिकायत में उल्लेख किया गया है कि अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि दूसरी पार्टी दस लाख रुपये देने को तैयार है, इसलिए अब फैसला उसी के पक्ष में किया जाएगा.


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शिकायतकर्ता का आरोप


पीड़ित का कहना है कि यह सुनकर उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ विरोध जताया और निष्पक्ष सुनवाई की मांग की. उनका दावा है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य और दस्तावेज पूरी तरह उनके पक्ष में थे, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी ने विपक्षी पक्ष के समर्थन में आदेश पारित कर दिया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए केवल पैसों के आधार पर निर्णय लिया गया. मामले को लेकर अभिषेक गिरी ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ सकता है. शिकायत में विशेष रूप से अधिकारी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन की जांच कराने की मांग की गई है. प्रार्थी का कहना है कि जिस दिन कथित रूप से रिश्वत दी गई, उस दौरान मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं.


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इसके अलावा शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से खत्म हो जाएगा. इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. भूमि विवाद और चकबंदी मामलों में रिश्वतखोरी के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इस प्रकरण में रिश्वत लेने और फिर फैसला पलटने के आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.


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सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही जांच के आदेश दिए जा सकते हैं. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी और विभागीय दोनों स्तर पर कार्रवाई संभव है.अब सबकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है. पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा.


गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।