चकबंदी अधिकारी पर 4 लाख घूस लेने का आरोप, DM को प्रार्थना पत्र देकर की ये मांग

Consolidation officer accused of taking bribe of 4 lakh rupees, this demand made by submitting a petition to DM
वाराणसी: जिले के चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है. रोहनिया क्षेत्र के मिसिरपुर गांव निवासी एक युवक ने बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (SOC) पर चार लाख रुपये रिश्वत लेने और इसके बावजूद विपक्षी पक्ष के समर्थन में फैसला सुनाने का आरोप लगाया है. पीड़ित ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच कराने के साथ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मची हुई है.

जमीन से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज
मिसिरपुर निवासी अभिषेक गिरी के अनुसार, उनकी पुश्तैनी जमीन से जुड़ा विवाद बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की अदालत में विचाराधीन था. यह मामला अपील संख्या 852/2024 के रूप में चल रहा था. प्रार्थी का कहना है कि उनके पास जमीन से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज और कानूनी साक्ष्य मौजूद थे, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि फैसला उनके पक्ष में आएगा, लेकिन सुनवाई के दौरान कथित तौर पर उनसे रिश्वत की मांग की जाने लगी. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पवन कुमार सिंधु ने सुनवाई के दौरान अभिषेक गिरी को अपने चैम्बर में बुलाया. वहां अधिकारी ने कथित रूप से कहा कि यदि चार लाख रुपये की व्यवस्था नहीं की गई तो उनकी अपील निरस्त कर दी जाएगी. इतना ही नहीं, उन्हें यह भी चेतावनी दी गई कि यदि फैसला उनके खिलाफ गया तो उनकी पुश्तैनी जमीन भी हाथ से निकल सकती है.

अधिकारी को सौंपे चार लाख रुपये नकदी
पीड़ित के मुताबिक अधिकारी की धमकी और दबाव के कारण परिवार के लोगों ने किसी तरह रकम की व्यवस्था की. शिकायतकर्ता का दावा है कि रुपये देने के लिए उन्हें चांदपुर स्थित अधिकारी के निजी आवास पर बुलाया गया. आरोप है कि शाम करीब सात बजे वे वहां पहुंचे और चार लाख रुपये नकद अधिकारी को सौंप दिए. शिकायतकर्ता के अनुसार रकम लेने के बाद अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि अब फैसला उनके पक्ष में कर दिया जाएगा.
लेकिन कुछ दिनों बाद पूरा मामला पलट गया. अभिषेक गिरी का आरोप है कि 27 अप्रैल 2026 को अधिकारी ने उन्हें दोबारा बुलाया और कहा कि विपक्षी पक्ष उनसे अधिक रकम देने को तैयार है. शिकायत में उल्लेख किया गया है कि अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि दूसरी पार्टी दस लाख रुपये देने को तैयार है, इसलिए अब फैसला उसी के पक्ष में किया जाएगा.

शिकायतकर्ता का आरोप
पीड़ित का कहना है कि यह सुनकर उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ विरोध जताया और निष्पक्ष सुनवाई की मांग की. उनका दावा है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य और दस्तावेज पूरी तरह उनके पक्ष में थे, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी ने विपक्षी पक्ष के समर्थन में आदेश पारित कर दिया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए केवल पैसों के आधार पर निर्णय लिया गया. मामले को लेकर अभिषेक गिरी ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ सकता है. शिकायत में विशेष रूप से अधिकारी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन की जांच कराने की मांग की गई है. प्रार्थी का कहना है कि जिस दिन कथित रूप से रिश्वत दी गई, उस दौरान मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं.

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से खत्म हो जाएगा. इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. भूमि विवाद और चकबंदी मामलों में रिश्वतखोरी के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इस प्रकरण में रिश्वत लेने और फिर फैसला पलटने के आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.
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सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही जांच के आदेश दिए जा सकते हैं. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी और विभागीय दोनों स्तर पर कार्रवाई संभव है.अब सबकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है. पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा.



