Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

कलेक्टर मैडम ने कहा- मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही

कलेक्टर मैडम ने कहा- मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही
Dec 20, 2025, 07:35 AM
|
Posted By Gaandiv

मशहूर IAS ऑफिसर और बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी एक बार फिर चर्चाओं में बनी हुई हैं. इसकी वजह यह है कि उन्हें रील स्टार कहना कुछ छात्रों को इतना महंगा पड़ गया कि उनके खिलाफ राजस्थान पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें अपनी हिरासत में लिया है. जहां छात्रों का आरोप है कि इस टिप्पणी का फायदा उठाते हुए पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की. लेकिन इन आरोपों को टीना डाबी और पुलिस प्रशासन ने सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल सोशल मीडिया पर पब्लिसिटी पाने का जरिया बताया है.


jk


जानिए रील स्टार कहने के पीछे का सच


दरअसल, यह मामला राजस्थान के बाड़मेर जिले का है. जहां महाराणा भूपल गर्ल्स कॉलेज में फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कुछ युवक आईएएस टीना डाबी से मिलने उनके दफ्तर जा पहुंचे थे. इसी दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी ने प्रदर्शनकारियों को ये कहते हुए उन्हें रोकना चाहा कि, टीना डाबी सभी के लिए एक रोल मॉडल है. ये सुन प्रदर्शनकारी छात्र इस कदर भड़क उठे, जहां उन्होंने ताने मारते हुए ये तक कह दिया कि सचमुच अगर हमारी कलेक्टर मैडम रोल मॉडल होती तो शायद हमारी समस्या को सुनती, न की रील बनाने में ज्यादा व्यस्त रहती. तभी कुछ छात्रों ने उन्हें 'रील स्टार' कहकर संबोधित कर दिया. छात्र संगठन का कहना है कि अपनी राय रखना कोई अपराध नहीं है और प्रशासन को छात्रों की आवाज दबानी नहीं चाहिए, जिसके चलते माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया.


हालांकि, इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए असहिष्णुता और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया. जहां टीना डाबी अब कई सवाले के कठघरे में खड़ी होती नजर आ रही है. हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मनोज कुमार ने इन छात्र प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर चुप्पी तोड़ते हुए बताया है कि किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया है. सच तो यह है कि बिगड़ती स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस टीम ने 4 छात्रों को थाने लेकर आई थी, जिनसे पूछताछ करके उन्हें वापस से छोड़ दिया गया है. वहीं, इस मामले पर IAS ऑफिसर टीना डाबी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि, पब्लिसिटी बटोरने के लिए इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर हवा दी जा रही है. यह मुद्दा सियासी गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है.


IAS टीना ने की दूसरी शादी


टीना डाबी का जन्म 9 नवंबर को मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में हुआ था. उनके पिता जसवंत डाबी बीएसएनएल (BSNL) में महाप्रबंधक के पद पर थे. उनकी मां हिमानी डाबी आईईएस (IES) यानी इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में ऑफिसर रही हैं. उनकी छोटी बहन रिया डाबी 15वीं रैंक हासिल कर आईएएस ऑफिसर के पद पर तैनात हैं. ग्रेजुएशन के बाद टीना डाबी साल 2015 की यूपीएससी परीक्षा में फर्स्ट रैंक हासिल कर वह उस बैच की यूपीएससी टॉपर बन बैठी. टीना डाबी इस वर्तमान में राजस्थान के जैसलमेर में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और मजिस्ट्रेट के तौर पर तैनात हैं.


op


आपको बता दें कि, प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा रील स्टार कहने के पीछे का कारण ये है कि ये है कि IAS ऑफिसर टीना डाबी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं. इंस्टाग्राम पर उनके 16 लाख से ज्यादा और ट्विटर पर 46 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. इसी के चलते उन्हें रील स्टार कहा जाता है. साल 2018 में उन्होंने अतहर आमिर खान से शादी की थी, पर अफसोस की साल 2020 में उनका तलाक हो गया. इसके बाद 2022 में उन्होंने आईएएस अधिकारी प्रदीप गवांडे से दूसरी शादी रचाई है. वहीं जल संचय जनभागीदारी अभियान में बाड़मेर को प्रथम स्थान प्राप्त होने पर टीना डाबी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया.

169 साल पहले 282 सैनिकों के साथ हुई बर्बरता को 12 साल पहले जान सकी दुनिया...
169 साल पहले 282 सैनिकों के साथ हुई बर्बरता को 12 साल पहले जान सकी दुनिया...
वाराणसी: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों की बर्बरता का शिकार बने 282 भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार अब काशी में किया जाएगा. उनकी अस्थियों को मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से उनके संभावित वंशज भी इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे. 169 वर्ष पहले हुई इस घटना की जानकारी दुनिया को करीब 12 वर्ष पहले मिली, जबकि वैज्ञानिक शोध और डीएनए परीक्षण के जरिए इन शहीदों की पहचान संभव हो सकी.पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला में वर्ष 2014 में एक कुएं से 282 मानव कंकाल मिले थे. शुरुआत में माना गया कि ये 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए लोगों के अवशेष हैं. लेकिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट, सीसीएमबी हैदराबाद समेत देश-विदेश के वैज्ञानिकों की टीम ने डीएनए और आइसोटोप अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि ये 1857 में शहीद हुए बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक थे, जिनकी जड़ें गंगा घाटी यानी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़ी थीं.एक किताब से खुला इतिहास का राज.पंजाब के इतिहासकार एवं शोधकर्ता सुरिंदर कोचर को अंग्रेज अधिकारी फ्रेडरिक हेनरी कूपर की पुस्तक "क्राइसिस इन पंजाब: फ्रॉम 10 मई अनटिल फॉल ऑफ दिल्ली" मिली. इसमें लिखा था कि मियां मीर में तैनात बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 26वीं रेजीमेंट के सैनिकों ने 1857 में विद्रोह कर दिया था. अंग्रेजों ने 218 सैनिकों को रावी नदी के किनारे गोली मार दी, जबकि 282 सैनिकों को अजनाला लाकर 237 को गोली मारने के बाद 45 सैनिकों को जिंदा कुएं में फेंक दिया और मिट्टी-चूने से कुएं को बंद कर दिया. बाद में उस स्थान पर गुरुद्वारा बना दिया गया. वर्ष 2014 में उसी कुएं की खुदाई के दौरान ये कंकाल मिले.डीएनए जांच से मिली पहचानपंजाब विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जे.एस. सहरावत के नेतृत्व में बीएचयू, बीरबल साहनी संस्थान और सीसीएमबी के वैज्ञानिकों ने डीएनए और आइसोटोप अध्ययन किया. दोनों अध्ययनों ने पुष्टि की कि ये सैनिक पंजाब के नहीं बल्कि गंगा घाटी क्षेत्र के निवासी थे. इस घटना को दुनिया की सबसे जघन्य ऐतिहासिक घटनाओं में भी गिना जाता है.दक्षिण भारत से आए संभावित वंशजडीएनए सैंपल देने वाराणसी पहुंचे कृतेश तिवारी, जो वर्तमान में दक्षिण भारत के संथूर कस्बे में रहते हैं, बताते हैं कि उनके पूर्वजों का मानना रहा है कि उनका परिवार अजनाला में शहीद हुए सैनिकों का वंशज है. इसी दावे की पुष्टि के लिए उन्होंने qअपना डीएनए सैंपल दिया है. उनका कहना है कि यदि वैज्ञानिक जांच में यह साबित होता है कि उनका परिवार उन्हीं सैनिकों का वंशज है, तो यह उनके लिए गर्व और भावनात्मक संतोष का विषय होगा.2022 से जारी है शोधडॉ. ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं कि वर्ष 2022 से उनकी टीम अजनाला के 282 शहीद सैनिकों पर शोध कर रही है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में कुएं से मिले कंकालों के अध्ययन से पता चला कि इनमें बड़ी संख्या में गंगा घाटी के लोग थे, जिनमें कई कान्यकुब्ज ब्राह्मण भी शामिल थे। समय के साथ इनके कई परिवार दक्षिण भारत के संथूर क्षेत्र में जाकर बस गए.ALSO READ: रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाईडॉ. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि जब इस शोध को प्रकाशित किया गया तो कनाडा से समीर पांडेय नामक व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में लगभग सात पीढ़ी पहले एक सदस्य लापता हो गए थे, जो 1857 में उसी बटालियन में कार्यरत थे और संभवतः अजनाला नरसंहार के शिकार हुए. इसके बाद संभावित वंशजों की तलाश शुरू की गई.उन्होंने कहा कि डीएनए परीक्षण के जरिए वंशजों की पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है. शोध पूरा होने के बाद अजनाला से मिले सभी शहीद सैनिकों की अस्थियों का काशी में पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा, ताकि 169 साल बाद उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई मिल सके.
रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई
रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई
वाराणसी: ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा मेले को नगर निगम ने प्लास्टिक (पॉलीथिन) मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। मेले में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने व्यापक तैयारियां की हैं। साथ ही प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग करने वाले दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर चालान और जुर्माने की कार्रवाई भी की जा रही है।नगर निगम के अनुसार पूरे मेला क्षेत्र में 24 घंटे तीन शिफ्टों में विशेष सफाई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। निगम की टीमें स्थायी और अस्थायी दुकानदारों से संपर्क कर उन्हें दुकान के सामने डस्टबिन रखना, प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग न करना और ग्राहकों को केवल कपड़े के थैले उपलब्ध कराने के निर्देश दे रही हैं।नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ मौके पर चालान कर जुर्माना वसूला जा रहा है। वहीं, जोनल स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में आईसी एक्टिविटी टीम लाउडस्पीकर के जरिए दुकानदारों और श्रद्धालुओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए जागरूक कर रही है।ALSO READ: वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरेइसके अलावा मेला क्षेत्र में "स्वच्छ काशी, सुंदर काशी" और "थैला अपना साथ लाएं, प्लास्टिक को दूर भगाएं" जैसे संदेशों वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं। नगर निगम ने सभी श्रद्धालुओं और व्यापारियों से प्लास्टिक मुक्त रथयात्रा मेला बनाने में सहयोग की अपील की है।
वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे
वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे
वाराणसी : भारत सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत संचालित 'सोलर दीदी' अभियान के तहत वाराणसी में 30 महिलाओं को रोजगार प्रदान किया गया. आर्क सूर्य शक्ति प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित चयन एवं नियुक्ति कार्यक्रम में चयनित महिलाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए. साथ ही उन्हें सौर ऊर्जा से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण, कार्य प्रणाली और जनजागरूकता अभियान से जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई.कार्यक्रम में आर्क सूर्य शक्ति प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अभिषेक सिंह 'चंचल' ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है. 'सोलर दीदी' अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका भी प्रदान कर रहा है. चयनित महिलाएं अब लोगों को योजना की जानकारी देंगी और सोलर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित करेंगी.अभिषेक सिंह ने बताया कि आर्क परिवार फाउंडेशन समाज सेवा के अपने संकल्प के तहत सौर ऊर्जा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का कार्य लगातार कर रहा है. संस्था ऐसे परिवारों तक पहुंच रही है, जो जानकारी के अभाव या आर्थिक कारणों से सोलर संयंत्र नहीं लगवा पा रहे हैं. फाउंडेशन उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, सरकारी सब्सिडी, बैंक ऋण और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराता है. जरूरतमंद परिवारों को संस्था अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग भी प्रदान करती है.ALSO READ: कैंट स्टेशन के बाहर महिलाओं से अश्लील हरकत, एंटी रोमियो टीम ने दो युवकों को किया गिरफ्तारउन्होंने कहा कि फाउंडेशन कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से उद्योग जगत को भी स्वच्छ ऊर्जा अभियान से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. उनका मानना है कि सरकार, उद्योग, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही भारत ऊर्जा आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राष्ट्र बन सकता है. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाना केवल बिजली बिल कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है.