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फरवरी में शुरू होगा बहुप्रतिक्षित सिग्‍नेचर ब्रिज का निर्माण, डिजाइन फाइनल, कंपनी का चयन

फरवरी में शुरू होगा बहुप्रतिक्षित सिग्‍नेचर ब्रिज का निर्माण, डिजाइन फाइनल, कंपनी का चयन
Jan 31, 2026, 06:50 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : गंगा नदी पर मालवीय पुल के पास बनने वाले सिग्नेचर ब्रिज का काम अगले महीने फरवरी से शुरू हो जाएगा। इसकी डिजाइन फाइनल होने के बाद रेल मंत्रालय की ओर से नए रेल-रोड ब्र‍िज की पर‍ियोजना के ल‍िए अंत‍िम तौर पर अब कंपन‍ियों का चयन कर ल‍िया गया है. इसके ल‍िए RVNL-GPT JV की साझा बोल‍ियों संग ही कंपनी चयन के साथ अब काम शुरू होने की तैयार‍ियां भी अब जोर पकड़ ली हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ब्रिज की आधारशिला रखेंगे. इसके अलावा पीएम नगर निगम के नए सदन की आधारशिला भी रख सकते हैं. सिग्नेचर ब्रिज को करीब तीन साल में बनकर तैयार होने का लक्ष्य रखा गया है.


राजघाट स्थित मालवीय पुल के 50 मीटर दूर उसके समानांतर, नमो घाट से पड़ाव के बीच इस रेल–रोड ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है. सभी कार्यों की निगरानी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ओर से नियुक्त टीम करेगी. इसी साल 8 नवंबर को काशी दौरे पर आए रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ मालवीय पुल के पास बनने वाले इस ब्रिज के लिए जगह का निरीक्षण किया था. उस समय उन्होंने सिग्नेचर ब्रिज को देश का सबसे बड़ा ब्रिज बताया था. अब ब्रिज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है.


2600 करोड़ की लागत, 1074 मीटर लंबाई


2600 करोड़ की लागत से 1074 मीटर लंबे इस सिग्नेचर ब्रिज में नीचे की ओर 4 लेन का रेलवे ट्रैक और ऊपरी हिस्से में 6 लेन की सड़क बनाई जाएगी. ब्रिज निर्माण के लिए नई तकनीक से गंगा के बीच 8 पिलर खड़े किए जाएंगे. इसके साथ ही वाराणसी रेलवे स्टेशन और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन को जोड़ने के लिए नया ट्रैक भी बनाया जाएगा.


चंदौली से वाराणसी पहुंचने के लिए मालवीय पुल ही अभी तक एकमात्र रास्ता है. इसके जर्जर होने के कारण डेढ़ दशक पूर्व बड़े वाहनों की आवाजाही बंद हो गई थी. छोटे वाहन 15 किमी की दूरी के लिए 50 रुपये वसूलते हैं, जबकि बसों का परिचालन शुरू होने पर यह शुल्क 20 रुपये में सिमट जाएगा. अनुमानित रूप से 50 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही होती है. वर्तमान में बसें केवल पड़ाव तक ही पहुंच पाती हैं.


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एडीआरएम, उत्तर रेलवे बीके यादव के मुताबिक सिग्नेचर ब्रिज बनाने की दिशा में जल्‍द काम शुरू होने की पूरी उम्मीद है. निर्माण से संबंधित सभी जरूरी औपचारिकताएं अंतिम दौर में चल रही हैं. कंपनी के चयन सहित अन्य सभी प्रक्रियाएं रेल मंत्रालय के नियमानुसार पूरी होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा.

होली मिलन के जरिए जनाधार जोड़ने की कवायद, घर घर पहुंचेंगे भाजपाई
होली मिलन के जरिए जनाधार जोड़ने की कवायद, घर घर पहुंचेंगे भाजपाई
वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी में जनाधार जोड़ने की कवायद चल रही है. होली को राजनीतिक संदेश के साथ गांठते हुए भाजपा ने बड़ा संगठनात्मक अभियान छेड़ने की तैयारी कर ली है. पार्टी के 14 प्रमुख विषयों को लेकर कार्यकर्ता होली पर घर-घर पहुंचेंगे. हाल ही में तीन राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच इन मुद्दों पर मंथन हुआ था, जिसके बाद अब इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की रणनीति बनाई गई है. होली मिलन कार्यक्रमों के जरिये भारतीय जनता पार्टी अपने संगठनात्मक एजेंडे को आमजन तक पहुंचाने की तैयारी में है.प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बैठक की थी. इसके बाद पार्टी नेताओं ने रणनीति तैयार कर ली है. स्पष्ट निर्देश दिए कि 14 प्रमुख विषयों को हर बूथ स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए. पिछले दिनों बनारस में तीन राज्यों के बड़े पदाधिकारियों के बीच हुई रणनीतिक चर्चा में 14 विषयों पर सहमति बनी थी. अब इन्हें संगठित अभियान के रूप में लागू किया जा रहा है. बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सीधे मतदाताओं से जोड़ने की योजना है.ये होंगे मुद्दे भाजपा का इतिहास और विकास, चुनाव प्रबंधन, वैचारिक अधिष्ठान, समन्वय की भूमिका, कार्यपद्वति, विचार परिवार, संगठन विस्तार, कार्यकर्ता विकास, बूथ प्रबंधन, कार्यालय संचालन, सरकार की उपलब्धियां, मोदी सरकार की योजनाएं, सोशल मीडिया और नमो एप, एआई आधारित सरल एप.आरएसएस ने भी कसी कमरराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कमर कसते हुए अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं. जमीनी स्तर पर कैडर को सक्रिय करने और सामाजिक संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है. सूत्रों के अनुसार, संघ की ओर से शाखाओं और आनुषांगिक संगठनों के जरिये बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना बनाई गई है. हर बूथ पर संपर्क प्रमुख तय करने और मतदाता सूची के सूक्ष्म अध्ययन पर जोर दिया जा रहा है.
विदेश मंत्रालय ने US के दावों की खोली पोल, कहा- ईरान पर मिसाइलें नहीं दाग रहा अमेरिका
विदेश मंत्रालय ने US के दावों की खोली पोल, कहा- ईरान पर मिसाइलें नहीं दाग रहा अमेरिका
Iran Israel War: भारत ने अमेरिका के अपने बंदरगाहों का इस्तेमाल करके ईरान पर हमला करने के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने इसे 'बेबुनियाद' और 'झूठा' बताया है. यह प्रतिक्रिया तब आई जब पूर्व अमेरिकी सेना कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क यानि (OAN) को दिए एक इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा कि,अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ जंग में भारतीय नौसैनिक अड्डों और बंदरगाहों पर निर्भर हो गई है. इसी के आगे मैकग्रेगर ने कहा कि, "हमारे सभी बेस तबाह हो चुके हैं. हमारे बंदरगाह सुविधाएं नष्ट हो गई हैं. हमें अब भारत और भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो आदर्श नहीं है." लेकिन भारत ने इन बातों को सिरे से नकार दिया है.विदेश मंत्रालय ने दावे को किया खारिजविदेश मंत्रालय के फैक्टचेक अकाउंट ने एक्स पर पोस्ट किया, "OAN पर किए जा रहे दावे फेक और फॉल्स हैं, हम आपको ऐसी बेबुनियाद और गढ़ी गई टिप्पणियों से सावधान करते हैं." भारत ने स्पष्ट किया कि उसके बंदरगाहों का अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरान के खिलाफ किसी भी ऑपरेशन में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, यह खबर ऐसे समय आई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. भारत ने क्षेत्रीय संघर्ष पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने, बढ़ोतरी रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है.ईरान पर अटैक के लिए भारतीय बंदरगाहों का उपयोगबता दें, भारत उन दावों को खारिज करता है जिनमें ये कहा जा रहा था कि अमेरिका, ईरान पर अटैक करने के लिए भारतीय बंदरगाहों का उपयोग कर रहा है, भारत ने इन आरोपों को 'बेबुनियाद और मनगढ़ंत' ठहराया है. भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई जब अमेरिका के पूर्व आर्मी कर्नल Douglas Macgregor, अमेरिकी न्यूज चैनल One America News Network (OANN) को दिए एक इंटरव्यू में बोले कि अमेरिकन नेवी, ईरान-अमेरिका संघर्ष में ईरान पर अटैक करने के लिए इंडियन नेवी के ठिकानों पर निर्भर है.अमेरिकी पूर्व आर्मी कर्नल ने बोला झूठइस इंटरव्यू में Douglas Macgregor का दावा था कि अमेरिका की नेवी का इन्फ्रास्ट्रक्चर भारी नुकसान झेल चुका है, इसकी वजह से उसे भारत के बंदरगाहों पर डिपेंड होना पड़ रहा है. उन्होंने कहा, 'हमारे करीब-करीब सभी बेस तबाह हो चुके हैं. हमारे पोर्ट्स की सुविधाएं भी नष्ट हो गई हैं, ऐसे में हमें भारत और इंडियन पोर्ट्स का सहारा लेना पड़ रहा है, जो आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन यही नेवी का कहना है.'हालांकि, इन दावों को खारिज करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय की ऑफिशियल फैक्ट चेक यूनिट ने OANN पर चल रही इन खबरों को 'फर्जी और झूठा' कहा, मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में लोगों को भारत के रोल को लेकर 'बेबुनियाद और मनगढ़ंत' बयान फैलाने से अलर्ट रहने की सलाह दी गई.
Earthquake: ईरान में भूकंप के तेज झटके महसूस, जिम्मेदार इजरायल-अमेरिका युद्ध
Earthquake: ईरान में भूकंप के तेज झटके महसूस, जिम्मेदार इजरायल-अमेरिका युद्ध
Earthquake in Iran: ईरान में आज मंगलवार को भूकंप के तेज झटके देखने को मिले है. इसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.3 रही है. भूकंप के ये तेज झटके ईरान के अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच आया है. जिसका कारण मिसाइल का अटैक माना जा रहा है. ईरान के गेराश प्रांत में यह भूकंप आया है, हालांकि इसमें जानमाल के नुकसान की खबरें अभी तक सामने नहीं आई हैं. ⁠USGS यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, ईरान के गेराश इलाके में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. यह 10 किलोमीटर की गहराई में था. हालांकि ऐसी किसी परमाणु परीक्षण की वजह से हुआ है, इसके कोई संकेत नहीं मिले हैं. अभी तक के संकेतों के अनुसार, ये टेक्टोनिक प्लेट के बीच टकराहट से होने वाली प्राकृतिक घटना लग रही है.विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परमाणु बम का परीक्षण किया जाता है तो अलग तरह की तरंगें और सिग्नल आते हैं.चार दिनों से चल रहा ईरान-इजरायल के बीच युद्धआपको बता दें कि, ईरान और इजरायल के बीच युद्ध करीब चार दिनों से चल रहा है. इजरायल और अमेरिकी वायुसेना लगातार ईरान पर मिसाइलें दाग रही हैं. ईरान के कई परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. तेहरान, इस्फहान, कौम जैसे शहरों में भी भयंकर बमबारी की गई है. वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स उन मध्य पूर्व देशों को निशाना बना रहा है, जहां अमेरिकी बेस हैं. इसमें इराक, कुवैत, बहरीन, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं. ईरान अपनी मिसाइलों और शाहेद ड्रोन से लगातार हमले कर रहा है.गेराश शहर में भूकंप यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे यानि (USGS) ने बताया कि इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के बीच आज मंगलवार को दक्षिणी ईरान के गेराश शहर में 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया. जिसे लेकर यूएसजीएस ने कहा कि भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर नीचे आया और झटकों से लोगों में घबराहट फैल गई. हालांकि, इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए कुछ लोगों ने अंदाजा लगाया कि क्या ईरान ने न्यूक्लियर टेस्ट किया है. हालांकि, ऐसे दावों का समर्थन करने वाली कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.ये भूकंप 3 मार्च, 2026 को लोकल टाइम के हिसाब से दोपहर 12:24 बजे ईरान के गेराश से 52 किमी. उत्तर-पश्चिम में आया, इसका सेंटर लैटीट्यूड 28.036°N और लॉन्गीट्यूड 53.789°E पर था और भूकंप धरती की सतह से 10 किमी. नीचे आया. सीस्मोलॉजिस्ट बताते हैं कि ईरान के एक्टिव फॉल्ट जोन में इतने बड़े झटके आम हैं और कुदरती भूकंपों से होने वाले सीस्मिक पैटर्न जमीन के नीचे न्यूक्लियर धमाकों से होने वाले पैटर्न से बहुत अलग होते हैं.