कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम का राजदार गिरफ्तार, हवाला से जुड़े हैं तार

वाराणसी: दो हजार करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में पुलिस कमिश्नरेट की एसआइटी (विशेष जांच टीम) ने हवाला के जरिए तस्करी की रकम इधर-उधर पहुंचाने वाले मुख्य आरोपित वैभव जायसवाल को सोमवार को गिरफ्तार किया. वह गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल का करीबी और भरोसेमंद राजदार बताया जा रहा है. वाराणसी के दारानगर निवासी वैभव का काम कफ सीरप तस्करी से अर्जित धन को हवाला के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना था.

पूछताछ में उसने बताया कि गिरोह रोजाना करीब 50 करोड़ रुपये का लेनदेन करता था. बडी रकम को इधर - उधर 10 रुपये की नोट के जरिए भुगतान कराता था. वैभव की गिरफ्तारी से जल्द इस नेटवर्क के बड़े राजफाश होने की उम्मीद है. उसने बताया कि गिरोह 10 रुपये के नोट के जरिए करोड़ों का भुगतान कराता था. जिस व्यक्ति को पैसा लेना होता, उसे एक खास नंबर का 10 रुपये का नोट दिया जाता.
उसी नोट की फोटो हवाला गिरोह वॉट्सएप के जरिए भुगतान करने वाले तक पहुंचाता था. नोट का मिलान होते ही करोड़ों रुपये का लेनदेन पूरा माना जाता था. एसआइटी अभी तक इस मामले में प्रशांत पाठक, मनोज यादव और उसके बेटे लक्ष्य यादव समेत कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरोह से जुड़े कई बदमाशों को नेपाल सीमा से गिरफ्तार कर वाराणसी लाया गया है.

एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया कि एसआईटी की जांच और विवेचना के क्रम में आरोपियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है. शुभम के करीबियों में शामिल वैभव जायसवाल को गिरफ्तार किया गया. जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो सीधे हवाला से जुड़े हैं. पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों और बैंकों के विवरण खंगालने के क्रम में वैभव का नाम सामने आया.

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कफ सिरप प्रकरण शुरू होने और शुभम के भागने के समय से वैभव भी लापता था. एसआईटी की जांच में सामने आया कि मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और वैभव का सीधा जुड़ाव है. शुभम की फरारी के दौरान भी वैभव से फेसटाइम पर बातचीत होती रही. तस्करी से अर्जित रकम शुभम के बताए ठिकानों और लोगों तक वैभव के माध्यम से पहुंचाई गई. पश्चिम बंगाल से हवाला कारोबार अधिक पैमाने पर हुआ.



