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कूड़ा प्रबंधन में अब पार्षद निभाएंगे 'स्वच्छता दूत' की भूमिका, सोर्स सेग्रिगेशन पर दिया गया जोर...

कूड़ा प्रबंधन में अब पार्षद निभाएंगे 'स्वच्छता दूत' की भूमिका, सोर्स सेग्रिगेशन पर दिया गया जोर...
Jun 10, 2026, 03:00 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: शहर को कूड़ा मुक्त और स्वच्छ बनाने की दिशा में नगर निगम एवं प्रजा फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण पहल की है. सिगरा स्थित होटल कैस्टिलो में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषयक कार्यशाला में पार्षदों को 'स्वच्छता दूत' की भूमिका निभाने का आह्वान किया गया. कार्यशाला का मुख्य फोकस कूड़ा पृथकीकरण (सोर्स सेग्रिगेशन) और नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों पर रहा.


विशेषज्ञों ने कहा कि शहर की स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की भी साझा जिम्मेदारी है. ऐसे में वार्ड स्तर पर पार्षदों की सक्रिय भागीदारी के बिना प्रभावी कूड़ा प्रबंधन संभव नहीं है.

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कार्यशाला में सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद की प्रोफेसर प्रो. मर्सी ने पार्षदों को प्रशिक्षण देते हुए घर-घर कूड़ा पृथकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने बताया कि प्रत्येक घर में चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन का उपयोग किया जाना चाहिए. हरा डस्टबिन गीले कचरे, नीला सूखे कचरे, लाल सैनिटरी वेस्ट तथा काला डस्टबिन ई-वेस्ट और अन्य खतरनाक घरेलू कचरे के लिए निर्धारित है.


प्रो. मर्सी ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों की जवाबदेही तय की गई है.ऐसे संस्थान जिनका क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक है, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से ज्यादा पानी की खपत करते हैं या 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें अपने परिसर में ही गीले कचरे का प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा.

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नए नियमों के अनुसार स्थानीय निकायों को विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व (बल्क वेस्ट जेनरेटर की विस्तारित ज़िम्मेदारी) प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार होगा, जिसकी वैधता तीन वर्ष होगी. नियमों का पालन नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है.



कार्यशाला के दौरान पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में सोर्स सेग्रिगेशन को बढ़ावा देने और लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया. कार्यक्रम का संचालन प्रजा फाउंडेशन के अविरल दुबे ने किया. इस अवसर पर बृजेश चंद्र श्रीवास्तव, अशोक मौर्य, विवेक कुशवाहा, मंजू कन्नौजिया, सीमा वर्मा, कुसुम देवी, कौशल्या, रीना, बेबी कुभारी और रमाशंकर पटेल सहित नगर निगम के कई पार्षद उपस्थित रहे.

जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...
जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...
वाराणसीःडिलिवरी बॉय अब हर घर का हिस्सा बन चुके हैं. लगभग हर कोई अपनी बड़ी से लेकर छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी आनलाइन खरीदारी करने लगे हैं जिन्हें घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डिलिवरी बॉय की होती है. एक डिलिवरी के बदले इन्हें 10 से 60 रुपये मिलते हैं. इन रुपयों के लिए वह दिन रात मेहनत करते हैं. आधी रात हो या भोर, गर्मी का दिन हो या मूसलधार बरसात ये डिलिवरी बॉयआर्डर को जल्द से जल्द पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इसी कोशिश में उनके साथ हादसे भी होते हैं. ऐसे ही एक डिलिवरी पहुंचाने जा रहे साहिल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. देर रात उसका परिवार उसके लौटने का इंतजार कर रहा था. वह तो नहीं आया उसके मौत की खबर उसके घर तक पहुंची. इस खबर से पूरा परिवार सदमे में आ गया. साहिल ही तो था जो डिलिवरी बॉय का काम करते हुए कुछ रुपये जुटता था और घर की जरूरत को पूरा करता था. परिवार के सामने अब एक सवाल है साहिल तो नहीं रहा अब उन्हें कौन संभालेगा.साहिल के बड़े पिता अब्दुल मतीन बताते हैं कि परिवार में वह इकलौता कमाने वाला था. तीन साल पहले उसके पिता की मौत हो गई थी. परिवार में मां, तीन बहने और एक छोटा भाई है. सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहिल दिन रात मेहनत करता था. पड़ोसी रियाजुद्दीन बताते हैं कि जिदंगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपयों का इतंजाम करने के लिए साहिल ने घर पर रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की दुकान खोली थी. लेकिन दुकान नहीं चलने पर वह उसने डिलिवरी बॉय का काम करने की सोचा. इसके लिए छह महीना पहले कुछ लोगों से रुपये उधार लेकर एक बाइक फाइनेंस कराया था. इसके बाद ब्लिंकिट से जुड़ गया था और सामानों की डिलेवरी करके कुछ रुपये कमाता था. डिलेवरी पर कुछ अधिक रुपये मिल सकें इसलिए साहिल दिन के साथ रात में भी काम करता था. रात में जानकारी मिली की साहिल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. नगर निगम के वाहन ने उसे कुचल दिया.डिलिवरी बॉय को पता नहीं होता घर लौटेंगे भी या नहीं डिलिवरी बॉय का करने वाले शहाबुद्दीन का कहना है कि वह चंद रुपयों के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं. इस महंगाई में रोज के खर्च के मुताबिक रुपये मिल सकें इसलिए ज्यादा से ज्यादा डिलिवरी करने की कोशिश करते हैं. रात में रोड खाली होने से वक्त और बाइक के इंधन का खर्च कम लगता है और डिलिवरी पर अधिक कमीशन पर मिलता है इसलिए ज्यादातर रात को काम करते हैं. कई बार उनके साथ हादसे भी होते हैं. रविवार की रात वह डिलिवरी करने गए थे लेकिन एक युवती ने उन पर छेड़खानी का आरोप लगा दिया. इसकी वजह से परेशानी झेलनी पड़ी और डिलेवरी के रुपये भी नहीं मिले. डिलेवरी ब्वाय वसीम अंसारी बताते हैं कि हर डिलिवरी पर 12-15 रुपये मिलते हैं. रात में काम करना चाहते हैं लेकिन कई हादसे होते हैं. आए दिन तरह-तरह की समस्या को झेलना पड़ता है. डिलिवरी बॉय रसीद अहमद अंसारी पहले बुनकर थे. उन्हें काम मिलना कम हुआ तो डिलिवरी बॉय बन गए. बताते हैं कि अधिक रुपये के लालच में रातभर जगकर डिलिवरी करते हैं लेकिन डर भी लगता है. रात में कई बार छिनैती की घटना होती है. दुघर्टना भी डर अक्सर बना रहता है.बड़ी संख्या में युवक बन रहे डिलेवरी ब्वायALSO READ : 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...कंपनियां करती हैं चंद मिनटों में डिलिवरी का दावाकई 'क्विक-कामर्स' और इंस्टेंट डिलीवरी प्लेटफार्म हैं जिनके माध्यम से फल, सब्जियां, किराना (ग्रासरी), स्नैक्स और रोजमर्रा के अन्य उत्पाद लोग अपने घर पर कुछ ही मिनटों में मंगवा सकते हैं. डिलिवरी बॉय के तौर पर इनसे बड़ी संख्या में युवक जुड़ रहे हैं. यह प्लेटफार्म आर्डर को औसतन 10 से 20 मिनट के भीतर डिलीवर करने का दावा करते हैं. इसके लिए हर 2-3 किलोमीटर के दायरे में अपने छोटे वेयरहाउस (गोदाम) चलाती है, जिन्हें डार्क स्टोर कहते हैं. यहां से डिलीवरी पार्टनर सीधे आर्डर देने वाले के घर पर सामान पहुंचाते हैं. सामान पहुंचाने वाले डिलिवरी बॉय को एक आर्डर पहुंचाने पर 10 से 60 रुपये तक मिलते हैं. यह राशि फिक्स नहीं होती है, बल्कि दूरी, वजन और समय के हिसाब से बदलती रहती है. एक किलोमीटर के दायरे वाले आर्डर के लिए न्यूनतम लगभग 15 रुपये मिलते हैं. एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी होने पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से दस से 14 रुपये अतिरिक्त मिलते हैं. बारिश, कड़ाके की ठंड या रात के समय मांग ज्यादा होने पर प्रति आर्डर 15 से 30 रुपये तक अतिरिक्त (सर्ज़ बोनस) मिलता है. दिन भर में तय किए गए कुल आर्डर या घंटे पूरे करने पर कंपनी अलग से बोनस या इंसेंटिव भी देती है.
44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...
44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...
वाराणसी. सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 29 जुलाई को आयोजित होने वाले 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। समारोह को भव्य और गरिमामय बनाने के उद्देश्य से सोमवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन का व्यापक निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पंडाल, मंच, बैठक व्यवस्था, विद्युत, ध्वनि प्रणाली, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, मीडिया और अतिथि सत्कार सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन समारोह की प्रत्येक तैयारी पर लगातार नजर रखे हुए है और सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा।उन्होंने बताया कि 29 जुलाई को सुबह 9 बजे आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी कानपुर के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. आशुतोष शर्मा उपस्थित रहेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी।ALSO READ: वीडीए और आईआईटी बीएचयू ने मिलाए हाथ, 115 कॉलेजों में पढ़ाएंगे शहरी नियोजन का पाठ...समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जबकि विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं अन्य सम्मान प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दीक्षांत समारोह को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत की समृद्ध विरासत और उच्च शिक्षा की उत्कृष्ट परंपराओं के अनुरूप ऐतिहासिक एवं यादगार बनाया जाएगा।गौरतलब है कि दीक्षांत समारोह से पूर्व 'दीक्षोत्सव' के तहत विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा, अभियंता रामविजय सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
वीडीए और आईआईटी बीएचयू ने मिलाए हाथ, 115 कॉलेजों में पढ़ाएंगे शहरी नियोजन का पाठ...
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वाराणसी : विकास प्राधिकरण वाराणसी और आईआईटी-बीएचयू के बीच सोमवार को वीडीए सभागार में सहयोगात्मक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. इसके तहत शहर के 115 इंटरमीडिएट विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शहरी नियोजन, सतत विकास और विरासत संरक्षण जैसे विषयों पर व्‍याख्‍यान और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. एमओयू पर आईआईटी-बीएचयू के आर्किटेक्चर, प्लानिंग एंड डिजाइन विभागाध्यक्ष प्रो. रबी नारायण मोहंती और वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने हस्ताक्षर किए.इस पहल के तहत चयनित शिक्षण संस्थानों में संयुक्त रूप से व्याख्यान, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार, संवाद सत्र और अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाएंगे. इनके माध्यम से विद्यार्थियों को वाराणसी मास्टर प्लान, ले-आउट एवं भवन मानचित्र की अवधारणा, भवन मानचित्र स्वीकृति की आवश्यकता, ग्रीन बेल्ट से संबंधित प्रावधान, सिटी प्लान एवं अर्बन प्लानिंग के महत्व, पर्यावरण संरक्षण तथा विरासत संरक्षण जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी.वीडीए के अनुसार शहर के नियोजित विस्तार, विशेषकर अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए युवा पीढ़ी को नियोजित विकास के महत्व से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि भविष्य में शहरों के सामने आने वाली मूलभूत समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके. वाराणसी पूर्वांचल के आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है. ऐसे में नागरिकों को नियोजित और समावेशी विकास के प्रति जागरूक करना तथा उनकी सहभागिता सुनिश्चित करना वीडीए की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है.ALSO READ : वाराणसी में एकतरफा प्रेम में युवक ने खुद को लगाई आग, युवती बनाती रही वीडियोएमओयू के तहत आईआईटी-बीएचयू का आर्किटेक्चर, प्लानिंग एंड डिजाइन विभाग तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराएगा. वहीं, वीडीए कार्यक्रमों का समन्वय करेगा तथा वाराणसी मास्टर प्लान, नगर विकास परियोजनाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा.