सबसे खतरनाक साइबर ठगी डिजिटल अरेस्ट बनारस भी नहीं बच सका....

वाराणसीः डिजिटल अरेस्ट करके साइबर ठगी के मामले पूरे देश में बढ़ रहे हैं. इसे देखते हुए भारतीय मानवाधिकार आयोग ने डिजिटल अरेस्ट से होने वाली ठगी को साइबर धोखाधड़ी का सबसे खतरनाक रूप करार दिया है. आयोग ने डिजिटल अरेस्ट को एक अलग अपराध मानने का सुझाव सरकार को दिया है ताकि जांच और मुकदमा चलाने की प्रक्रिया बेहतर बने. बीते कुछ सालों में वाराणसी में भी डिजिटल अरेस्ट के कई मामले सामने आए. साइबर अपराधियों के शिकार हाई प्रोफाइल लोग बने.
पहले नरेश गोयल अब पहलगाम आतंकी हमले का दिखा रहे डर
डिटिजल अरेस्ट के ज्यादातर मामलों में साइबर ठगों ने नरेश गोयल मनी लांड्रिंग केस में शामिल होने की बात कहते हुए गिरफ्तारी का डर दिखाया और रुपयों की जांच के बहाने रुपये खुद के संचालित बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिया था. जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल को मनी लांड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अब साइबर ठग पहलगाम आतंकी हमले का नाम ले रहे हैं. जिसे शिकार बना रहे हैं उसे बता रहे हैं कि उनका नाम पहलगाम आतंकी हमले में शामिल आतंकियों के साथ आया है. उनके बैंक खाते का उपयोग आतंकियों को धन मुहैया कराने के लिए किया गया है.
इससे घबराए लोग उनके झांसे में आ जाते हैं और जांच के नाम पर अपने बैंक खाते के रुपये साइबर ठगों के संचालित बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं.
शिक्षिका के साथ हुई सबसे बड़ी ठगी
वाराणसी में अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी शिक्षिका शम्पा रक्षित के साथ हुई. मार्च 2024 में उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके ठगों ने उनके बैंक खातों में मौजूद तीन करोड़ 55 लाख रुपये हासिल कर लिए थे. पुलिस ने साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पूरी ताकत झोंक दी थी. ठगी के दस दिनों के भीतर ठगों तक पहुंच गई. अगले एक महीने में 18 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया. इनमें दो बैंककर्मी सगे भाई भी शामिल रहे. पुलिस ने 65 लाख रुपये साइबर ठगों के हाथों में जाने से बचा लिया. शिक्षिका शम्पा रक्षित सिगरा थाना क्षेत्र के रथयात्रा में रहती हैं. उन्होंने अपना पुश्तैनी मकान पांच करोड़ में बेचा था. दो करोड़ में मकान खरीदा था और अन्य रुपये उनके बैंक खातों में थे.
पुलिस व बैंक कर्मियों की सतर्कता से बच गए थे आईएएस व चिकित्सक के रुपये
साइबर ठगों के द्वारा डिजिटल अरेस्ट हुए रिटायर्ड आइएएस एचडीएफसी बैंक की महिला कर्मचारियों की सूझबूझ और तत्कालीन एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना की तत्परता से मुक्त हो पाए. उनकी मेहनत की कमाई के 39 लाख साइबर ठगों के हाथों में जाने से बच गए. वहीं बीएचयू से सेवानिवृत्त ह्रदय रोग विशेषज्ञ प्रो. पीआर गुप्ता को साइबर ठगों ने 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा था. भयभीत चिकित्सक साइबर ठगों को देने के लिए लंका के एचडीएफसी बैंक में अपना फिक्स डिपोजिट तोड़ने गए थे. संदेह होने पर बैंक कर्मियों ने उनसे पूछताछ की संतोषजन जवाब नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी और चिकित्सक के डेढ़ करोड़ रुपये साइबर ठगों के पास जाने से बचा लिया थे.
इनके साथ भी हुई डिजिटल अरेस्ट करके साइबर ठगी
• रोहनिया के लठिया निवासी महेंद्र प्रसाद 1.10 करोड़ रुपये की ठगी
• संजय अपार्टमेंट, काटन मिल की डा. अल्पना राय चौधुरी से दस लाख की ठगी
• चितईपुर थाना क्षेत्र के विवेकानंद पुरम कालोनी निवासी सेवानिवृत्त लाइब्रेरियन सुधीर नारायण से सात लाख रुपये
• पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त असिस्टेंट रजिस्ट्रार कृष्णा अपार्टमेंट महमूरगंज में रहने वाले सुभाष चंद्र से 49.4 लाख रुपये
• सारनाथ के माधव नगर कालोनी निवासी सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट अनुज यादव से 98 लाख रुपये
• 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट करके चंद्रा रेजिडेंसी हुकुलगंज में रहने वाली 67 वर्षीय नीना कौर से 32.40 लाख रुपये
• मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के मड़ौली निवासी अमिताभ श्रीमनी से 40 लाख रुपये
• भेलूपुर थाना क्षेत्र के सोनारपुरा निवासी निहार पुरोहित से 29 लाख
• शिवपुर के तरना निवासी सुभाष सिंह से 19 लाख रुपये
• चितईपुर थाना क्षेत्र के सुसुवाही निवासी राम नरेश सिंह से साढ़े दस लाख रुपये
• आइएमएस बीएचयू रेडियोथेरिपी विभाग की डा. शाश्वती साहू से पांच लाख रुपये
• अर्दली बाजार की भुवनेश्वर नगर कालोनी निवासी सेवानिवृत्त सहायक चंकबंदी अधिकारी सुधीर सिंह परमार से 38 लाख रुपये
• बड़ागांव के अहरक निवासी हंसराज सिंह से साढ़े आठ लाख रुपये
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पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
• डिटिजल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है.
• देश में कोई डिजिटल थाना नहीं है और पुलिस डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है.
• ऐसे फोन काल या मैसेज जिसमें बताया जाए कि आपके खिलाफ केस दर्ज है, आपका खाता बंद हो जाएगा पूरी तरह फर्जी है.
• इसकी सूचना तत्काल पुलिस को देनी चाहिए.
• साइबर ठग अक्सर भावनात्मक दबाव बनाते हैं उनकी बातों में कभी नहीं आना चाहिए बल्कि सत्यता की जांच की जानी चाहिए.
• निजी जानकारी, बैंक खाता विवरण, आदि किसी के साथ साझा न करें.
• साइबर अपराध का शिकार होने पर 24 घंटे के अंदर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देने के साथ निकटतम थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराएं.
• cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, यह पोर्टल हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है.



