दिव्यांग खेल जगत के गौरव मुरलीकांत पेटकर का काशी आगमन

वाराणसी: ‘चंदू चैंपियन’ के नाम से विश्वभर में विख्यात भारत के पहले पैरा दिव्यांग स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर गुरुवार को वाराणसी पहुंचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया. वर्ष 1972 में भारत के लिए पहला पैरा ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले पेटकर दूसरी बार काशी आए हैं.इससे पूर्व स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी उनका काशी में अभिनंदन हुआ था.
वाराणसी एयरपोर्ट पर आगमन के बाद राज्य सलाहकार बोर्ड, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सदस्य डॉ. उत्तम ओझा एवं प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ. तुलसी दास ने अंगवस्त्र एवं काशी विश्वनाथ मंदिर का स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया.तत्पश्चात बनारस किला में उनका सम्मान समारोह आयोजित किया गया.
पेटकर वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के खेलकूद महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने पहुंचे हैं.
अपने स्वागत से अभिभूत पेटकर ने कहा कि काशी के बारे में उन्होंने जितना सुना था, उससे कहीं अधिक दिव्य और अलौकिक यह नगरी है.
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यहाँ आकर उन्हें अद्भुत शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई है. उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन की उनकी बचपन की इच्छा आज पूर्ण होने जा रही है।
डॉ. उत्तम ओझा ने बताया कि शुक्रवार को वे बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे तथा खेलकूद महोत्सव में सम्मिलित होने के बाद 13 फरवरी को पुणे के लिए प्रस्थान करेंगे.



