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मंडलायुक्त व जिलाधिकारी ने गणतंत्र दिवस पर किया ध्वजारोहण, संविधान की दिलाई शपथ

मंडलायुक्त व जिलाधिकारी ने गणतंत्र दिवस पर किया ध्वजारोहण, संविधान की दिलाई शपथ
Jan 26, 2026, 06:17 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने कैंप कार्यालय व कमिश्नरी में तथा जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कलेक्ट्रेट स्थित राइफल क्लब व कैंप कार्यालय पर ध्वजारोहण किया. इस दौरान उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं. ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान गाया गया. कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे. मंडलायुक्त व जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया. अधिकारियों द्वारा सभी को संविधान में उल्लेखित प्रस्तावना की शपथ भी दिलायी गयी.


मंडलायुक्त व जिलाधिकारी ने गणतंत्र दिवस पर किया ध्वजारोहण, संविधान की दिलाई शपथ


मंडलायुक्त ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए लोकतंत्र को मजबूत करने में सभी नागरिकों की भूमिका पर जोर दिया. मंडलायुक्त ने अंग्रेजों के शासन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में सेनानियों की भूमिका, गांधी जी के नमक सत्याग्रह को रेखांकित करते हुए देश की आजादी तथा संविधान निर्माण व नागरिक कर्तव्यों को याद दिलाया. उन्होंने संविधान को अंगीकृत करने तथा आने वाली पीढ़ियों को भी संविधान के सार्थकता से अवगत कराए जाने हेतु प्रेरित किया. देश के निर्माण में 200 सालों में बहुत कुर्बानियां हुई हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए अनवेरिफाइड सूचना से सतर्क रहने को कहा. समाज में लगातार सोशल मीडिया के द्वारा गलत सूचनाएं फैलायी जा रहीं जिनसे सभी को सतर्क रहने तथा नयी पीढ़ी को उसके दुष्प्रभाव से बचने को कहा. अंत में एक बार पुनः उन्होंने सभी को गणतंत दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं.


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गणतंत्र दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट में झण्डारोहण के बाद जिलाधिकारी ने संविधान में उल्लिखित प्रस्तावना की सभी को शपथ दिलाई और बालिकाओं व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों को उपहार वितरित किया. तत्पश्चात जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में वृक्षारोपण भी किया.

गणतंत्र दिवस की परेड में दिखा भारत की झलक, परंपरा और विरासत ने मोह लिया मन
गणतंत्र दिवस की परेड में दिखा भारत की झलक, परंपरा और विरासत ने मोह लिया मन
देशभर में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. 26 जनवरी 1950 के दिन देश का संविधान लागू किया गया था. इसी के साथ भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ था. 1950 में संविधान के लागू होने से ही भारत में इस दिन को मनाने की एक प्रथा बनी. देश की राजधानी दिल्ली में हर साल राजपथ (अब कर्तव्यपथ) पर परेड निकाली जाएगी, भारत के गणराज्य बनने से अब तक यह प्रथा हर साल देश के लोगों को गौरवान्वित करती है.कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के जवानों की धमक, लड़ाकू विमानों की आसमान में गर्जना दुनिया को भारत की ताकत का संदेश देती है. परेड में शामिल राज्यों की झांकी देश की अनूठी कला, परंपरा और विरासत की झलक दिखाती हैं.गणतंत्र दिवस पर दिखी भारत की परंपरागणतंत्र दिवस के मौके पर किसी विशेष अतिथि को बुलाना भी भारत की परंपरा है. इस विशेष बात को एक परंपरा के तौर पर साल 1950 से ही निभाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर इस साल यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल हो रहे हैं. गणतंत्र दिवस पर बुलाए जाने वाले विशेष अतिथि की सीट राष्ट्रपति की सीट के ठीक बराबर में लगाई जाती है. 26 जनवरी पर इस परेड को देखने के लिए भारी संख्या में लोग कर्तव्य पथ पर पहुंचते हैं.कौन करता है मुख्य अतिथि का चुनावगणतंत्र दिवस 2026 के लिए मुख्य अतिथि का चुनाव की प्रक्रिया विदेश मंत्रालय से होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय में संभावित अतिथियों की एक लिस्ट तैयार की जाती है. लिस्ट में जिन अतिथियों के नाम शामिल किए जाते हैं, उनकी उपलब्धता के बारे में भी पता लगाना रक्षा मंत्रालय का काम होता है. रक्षा मंत्रालय के लिस्ट बनाने के बाद मुख्य अतिथि के चुनाव का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय में लिया जाता है. इसके लिए चुने गए देशों से संपर्क भी किया जाता है, इस प्रक्रिया को पूरा करने में काफी समय लगता है.जाने कैसे तय होता है मुख्य अतिथिभारत में हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख नेता आते हैं. इन राष्ट्राध्यक्षों का चुनाव भारत के वैश्विक संबंधों को ध्यान में रखकर किया जाता है. गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल यूरोपीय संघ का प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है. 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाली बैठक के बाद व्यापारिक संबंधों से जुड़े कई बड़े एलान किए जा सकते हैं.भारत में जब 1950 में इस परंपरा शुरुआत हुई थी, तब पहली बार इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए थे. भारत उस दौरान नए स्वतंत्र हुए देशों के साथ बेहकर रिश्ते बनाने पर जोर दे रहा था.
धोखे से मांस खिलाने का लेना था बदला, वाराणसी में बिहार के युवक को उतारा था मौत के घाट, गिरफ्तार
धोखे से मांस खिलाने का लेना था बदला, वाराणसी में बिहार के युवक को उतारा था मौत के घाट, गिरफ्तार
वाराणसी : सिंधौरा थाना क्षेत्र के महंगाव गांव में 20 दिन पूर्व हुई बिहार छपरा निवासी आफताब आलम (30) की हत्या के मामले का पुलिस ने राजफाश किया. पुलिस के अनुसार, धोखे से मांस खिलाने का बदला लेने के लिए चोलापुर थाना क्षेत्र के लश्करपुर निवासी वीरेंद्र यादव ने अपने साथी के साथ मिलकर आफताब की हत्या की थी. पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने और सविालांस की मदद से वीरेंद्र यादव को उसके फूफा के घर से गिरफ्तार किया. बंगलूरू में आफताब और वीरेंद्र यादव साथ काम करते थे. वीरेंद्र यादव का आरोप है कि आफताब ने उसे धोखे से मांस खिला दिया था. यह बात उसने अन्य दोस्तों को बताई और लाग मजाक उड़ाने लगे. इससे वह आहत था. खास बात यह रही कि शव की पहचान होना मुश्किल प्रतीत हो रहा था, लेकिन कडियां जुडती गई और आरोपी गिरफ्त में आ गया.पुलिस के अनुसार, सात जनवरी को बिहार के छपरा जनपद स्थित रामपुरा गांव निवासी आफताब आलम काम के सिलसिले में घर से निकला था. अगले दिन उसका शव महंगाव गांव के बाहर सुनसान स्थान पर मिला. पुलिस ने शव की पहचान कराने के बाद हत्या के कारणों की जांच शुरू की. थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए पुलिस ने सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड सीडीआर को खंगाला. जांच के दौरान मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने लश्करपुर निवासी वीरेंद्र यादव को शनिवार देर रात उसके फूफा रमाशंकर यादव के घर से गिरफ्तार किया गया. कड़ाई से पूछताछ में आरोपी ने जुर्म कबूल कर लिया.आरोपी वीरेंद्र यादव ने बताया कि वह और आफताब बंगलूरू में साथ काम करते थे. इसी दौरान अफताब ने धोखे से मांस खिला दिया. वह दोस्तों के बीच इस बात को लेकर उसे चिढ़ाता था. इससे आहत होकर उसने बदला लेने की ठान ली. जब अफताब वाराणसी आने वाला था, तो आरोपी ने उसे फोन कर गांव बुलाया और गांव के बाहर रस्सी से गला कसकर उसकी हत्या कर दी.ALSO READ : यूजीसी के नए विनियमों के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका, जातिगत भेदभाव पर सवालपुलिस ने आरोपी के कब्जे से मृतक का आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल फोन, कर्मचारी पहचान पत्र, आईडी कार्ड और हत्या में प्रयुक्त रस्सी बरामद की है. पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पहले से ही चोलापुर थाने में हत्या, आर्म्स एक्ट, मारपीट और बलवा समेत तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. गिरफ्तार कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है. पुलिस आरोपी की उस साथी की तलाश है जिसने वारदात को अंजाम देने में उसकी मदद की थी.
यूजीसी के नए विनियमों के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका, जातिगत भेदभाव पर सवाल
यूजीसी के नए विनियमों के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका, जातिगत भेदभाव पर सवाल
वाराणसी : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र नेता बलिया निवासी डा. मृत्युंजय तिवारी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित नए विनियमों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. यह याचिका उन्होंने अधिवक्ता नीरज सिंह के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दाखिल की है. इसमें जातिगत भेदभाव पर सवाल उठाए गए हैं.मृत्युंजय तिवारी बनाम भारत संघ शीर्षक से दाखिल इस याचिका में यूजीसी के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का संवर्धन विनियम, 2026 के विशेष रूप से विनियम 3(ग) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जिसे 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था. याचिका में कहा गया है कि विनियम 3(ग) “जाति-आधारित भेदभाव” को केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित करता है, जबकि सामान्य/गैर-अनुसूचित वर्ग के छात्रों और नागरिकों को यदि वे जाति-आधारित उत्पीड़न का सामना कर रहे हों तो उन्हें किसी भी कानूनी संरक्षण के दायरे से बाहर कर देता है.याची का कहना है कि यह प्रावधान पीड़ित का कृत्रिम और असंवैधानिक वर्गीकरण करता है, यह मान लेता है कि जाति-आधारित भेदभाव केवल एक ही दिशा में होता है, और इस प्रकार संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध) एवं 21 (गरिमा और जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करता है.याचिका में इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) सहित सुप्रीम कोर्ट के स्थापित निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया है कि जाति और वर्ग समान नहीं हैं. केवल कुछ वर्गों तक ही जाति-आधारित भेदभाव को सीमित करना मनमाना और असंवैधानिक है.याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय और अशोका विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों के विरुद्ध भी जाति-आधारित शत्रुता के उदाहरण सामने आए हैं, लेकिन यूजीसी के नए विनियम ऐसे मामलों में कोई शिकायत-निवारण तंत्र उपलब्ध नहीं कराते.इससे अकादमिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19 (1)(क)) और मानसिक स्वास्थ्य व गरिमा के अधिकार (अनुच्छेद 21) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. याची छात्र नेता मृत्युंजय तिवारी ने याचिका के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय से ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की परिभाषा को सीमित करने वाले यूजीसी विनियम 3(ग) को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त करने की मांग की है.ALSO READ : बीएचयू में गणतंत्र द‍िवस पर विकसित भारत के साथ कदमताल का प्रदर्शन, छात्रों में दिखी प्रतिभासाथ ही निवेदन किया है कि उक्त प्रावधान में संशोधन का निर्देश दिया जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध, उसकी जाति की परवाह किए बिना, जाति-आधारित भेदभाव को शामिल किया जा सके और वास्तविक समानता एवं समावेशन सुनिश्चित हो.