महायुद्ध के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप सत्ता बदल पाने में हुए फेल, मकसद पूरा ना होने पर कह दी ये बात

अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ छिड़ी जंग जरा भी थमने का नाम नहीं ले रही है. इस महायुद्ध को छिड़े 27 दिन होने के बाद भी नतीजा कुछ खास नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में माना ये जा रहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही ईरान पर जीत का ऐलान कर सकते हैं. जहां देखने वाली बात यह होगी कि इस फैसले पर ईरान आखिर किस तरह का कदम उठाता है.

क्योंकि, ईरान का मकसद अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब देकर उसे ये सबक सिखाना चाहता है कि अगर कोई चुप है तो उसकी कमजोरी समझकर उसका फायदा नहीं उठाना चाहिए, जो अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को बिना वजह के छेड़कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम किया है. यहीं कारण है कि ट्रंप द्वारा जीत का ऐलान करने से उनकी जीत नहीं हो सकती. इसलिए ईरान के अगले उस कदम पर हर किसी की नजरे टिकी हुई है, जो काफी चौकाने वाला हो सकता है.

"युद्ध किसी भी हाल में खत्म नहीं होगा"
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, अगर ईरान इस जंग को जारी रखते हुए जवाबी कार्रवाई करता है तो ये युद्ध किसी भी हाल में खत्म नहीं होगा. हालांकि, इस युद्ध में पहले ही ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया गया है. जिसके चलते उसकी कई मिसाइलें भी खत्म हो चुकी हैं और उसके कई टॉप लीडर्स भी मारे जा चुके हैं. वहीं डोनाल्ड ट्रंप का राजनीतिक मकसद अभी भी पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान में अभी भी पुराना शासन ही कायम है. इसी के साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल के समुद्री रास्ते को बाधित करके वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा कर रखी है.

अमेरिका की अर्थव्यवस्था हुई बर्बाद
एक्सपर्ट्स की माने तो ईरान को कमजोर समझने वाला अमेरिका जीत का ऐलान कर खुद ही घुटने टेकने को मजबूर हो चुका है. लेकिन ईरान इतनी आसानी से इस जंग में हार नहीं मानने वाला है. उसके पास अभी भी खेल पलटने की ताकत है. यहीं स्थिति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किल पैदा करती है, उनकी ही पार्टी के लोग अब उनसे खफा होते नजर आ रहे है, क्योंकि इस युद्ध का असर अमेरिका पर भी देखने को मिल रहा है, जी हां, इस जंग ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को काफी हद तक बर्बाद कर दिया है, इसी बिगड़ती अर्थव्यवस्था को दुबारा से सुधारने के लिए उनकी पार्टी मांग कर रही हैं. खास बात तो यह है कि इसी साल नवंबर माह में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं. जिस पर ध्यान देने की बात कहीं जा रही है.

ईरान की कट्टरपंथी ताकतें होंगी मजबूत
अमेरिका और इजराइल के हमले शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है. किसानों के लिए खाद महंगी हो गई है और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 13 पहुंच गया है. वहीं इस युद्ध पर कुछ एक्सपर्टस का मानना है कि इस महायुद्ध में जीत हासिल करना और किसी देश को खतरे को लंबे समय तक खत्म करना दो अलग-अलग बातें हैं.

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कुछ को इस बात का भी डर सताने लगा है कि, युद्ध के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ने का फैसला कर सकता है. ईरान के पास अब भी करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक बड़ा खतरा मानते हैं. यह यूरेनियम ईरान के लिए एक तरह की रणनीतिक ताकत भी है, जिससे वह अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच खुद को बचाने की कोशिश कर सकता है.



