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दुनिया भर में फैले सिंधी, लेकिन डीएनए एक: BHU के शोध में 5000 साल पुरानी सिंधु घाटी से जुड़ी विरासत का खुलासा...

दुनिया भर में फैले सिंधी, लेकिन डीएनए एक: BHU के शोध में 5000 साल पुरानी सिंधु घाटी से जुड़ी विरासत का खुलासा...
Jul 06, 2026, 12:47 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैज्ञानिकों के एक महत्वपूर्ण शोध में सामने आया है कि दुनिया भर में फैले सिंधी समुदाय की आनुवंशिक पहचान आज भी 5000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी हुई है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि भारत और पाकिस्तान में रहने वाले सिंधी न केवल सांस्कृतिक और भाषाई रूप से, बल्कि अपने डीएनए के स्तर पर भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं.


यह शोध BHU की ज्ञान लैब की वैज्ञानिक चंचल देवनानी, जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे तथा गुजरात विश्वविद्यालय के डॉ. खुशबू गौतम और प्रो. राकेश रावल ने संयुक्त रूप से किया है. शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ह्यूमन जेनेटिक्स में प्रकाशित हुआ है.


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शोधकर्ताओं ने 113 सिंधी व्यक्तियों के करीब 7.3 लाख डीएनए मार्कर्स का विश्लेषण किया और उनकी तुलना 2000 अन्य लोगों के आनुवंशिक आंकड़ों से की. अध्ययन में पता चला कि आधुनिक सिंधियों के डीएनए का 60 से 66 प्रतिशत हिस्सा प्राचीन सिंधु घाटी क्षेत्र की आबादी से जुड़ा है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह आनुवंशिक मिश्रण लगभग 2500 से 2900 वर्ष पहले हुआ था.


अध्ययन में यह भी सामने आया कि विभाजन के बाद सिंधी समुदाय भारत के गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना सहित कई राज्यों में बस गया, लेकिन उनकी मूल आनुवंशिक संरचना लगभग समान बनी रही.


शोध के दौरान भारत और पाकिस्तान के सिंधियों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आया. पाकिस्तानी सिंधियों में रिश्तेदारों के बीच विवाह की परंपरा अधिक होने के कारण इनब्रीडिंग का स्तर ज्यादा पाया गया, जबकि भारतीय सिंधियों में विभिन्न क्षेत्रों में बसने और अलग-अलग सिंधी समुदायों में विवाह होने से आनुवंशिक विविधता अपेक्षाकृत अधिक देखी गई.


शोध की प्रथम लेखिका चंचल देवनानी ने कहा कि यह अध्ययन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत और पाकिस्तान के सिंधी समुदाय आज भी अपने साझा जीनोम से जुड़े हुए हैं.


प्रमुख जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि सिंधी समुदाय भी यहूदियों की तरह एक वैश्विक डायस्पोरा है. विभाजन ने उन्हें अलग-अलग देशों में बांट दिया, लेकिन उनका डीएनए आज भी 5000 साल पुरानी सिंधु घाटी की साझा विरासत से जुड़ा हुआ है.


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शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन न केवल सिंधी समुदाय के इतिहास और प्रवासन को समझने में मदद करेगा, बल्कि यह भी साबित करता है कि विज्ञान अतीत की विरासत और वर्तमान की साझा मानवता के बीच मजबूत कड़ी का काम करता है.

एयर शो पास पर भाजपा विधायकों की तस्‍वीरों के मामले ने तूल पकड़ा, कोतवाली में तहरीर दी
एयर शो पास पर भाजपा विधायकों की तस्‍वीरों के मामले ने तूल पकड़ा, कोतवाली में तहरीर दी
वाराणसी : गंगा किनारे नमो घाट पर आयोजित भारतीय वायुसेना के एयर शो के लिए भाजपा विधायकों की तस्वीरों वाले पास जारी किए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है. इसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध जताया है. शनिवार शाम महानगर कांग्रेस अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने शहर कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि एयर शो जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के तहत पास जारी किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित थी. इसके बावजूद भाजपा के विधायकों और नेताओं ने अपनी तस्वीरों वाले पास जारी किए. इन पासों पर घाटों के नाम भी अंकित किए गए, जिससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. कांग्रेस ने इन पासों को अनधिकृत बताते हुए भारतीय वायुसेना के नाम के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया.पास जारी करने की प्रक्रिया की जांच की मांगमहानगर कांग्रेस अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि भारतीय वायुसेना के एयर शो जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था और नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए. ऐसे आयोजन में जनप्रतिनिधियों की तस्वीरों वाले पास जारी किए जाने का मामला गंभीर है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और स्पष्ट किया जाए कि पास किसने तैयार किए, किसके निर्देश पर उनका वितरण हुआ तथा क्या इन्हें सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी से अधिकृत कराया गया था.उन्होंने कहा कि यह मामला केवल पास पर तस्वीर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक आयोजन की गरिमा, सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन से भी जुड़ा है. यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या धोखाधड़ी की पुष्टि होती है तो संबंधित जनप्रतिनिधियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.जनप्रतिनिधियों के आचरण पर उठाए सवालराघवेंद्र चौबे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जनता की समस्याओं को उठाना, उनका समाधान कराना और क्षेत्र के विकास के लिए काम करना है. सार्वजनिक आयोजनों में अपनी तस्वीरों के माध्यम से राजनीतिक प्रचार करना उचित नहीं है. उन्होंने पुलिस प्रशासन से पासों के नमूनों, उनके वितरण और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की.ALSO READ : BHU में छात्रसंघ बहाली की मांग तेज, 29 अक्टूबर को निकलेगा छात्र मार्च; अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान.शहर कोतवाली में दी गई तहरीर के माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. हालांकि, मामले में पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने अथवा आरोपों की पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है. इस दौरान पूर्व आईएएस प्रवीण प्रकाश, डॉ. राजेश गुप्ता, सतनाम सिंह, रमजान अली, अरुण सोनी, वकील अंसारी, संतोष चौरसिया, अब्दुल हमीद डोडे, अनिल पटेल, मिथुन सरकार, बदरे आलम, किशन यादव, शमशाद, गोपाल चौबे, मोहम्मद उज्जैर और रामजी गुप्ता सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे.
BHU में छात्रसंघ बहाली की मांग तेज, 29 अक्टूबर को निकलेगा छात्र मार्च; अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान.
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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। शनिवार को विश्वविद्यालय के कला संकाय लॉन में आयोजित छात्र महापंचायत में छात्रसंघ बहाली और लोकतांत्रिक छात्र अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। महापंचायत में शामिल छात्र-छात्राओं ने सर्वसम्मति से 29 अक्टूबर को छात्र मार्च निकालने और इसके बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का निर्णय लिया।छात्र महापंचायत में तय किया गया कि 29 अक्टूबर को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से छात्रसंघ भवन तक मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर धरना शुरू किया जाएगा। छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी होने तक आंदोलन को संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।महापंचायत में छात्रों ने कहा कि छात्रसंघ विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने और उनके अधिकारों की आवाज उठाने के लिए एक मंच मिलता है। छात्रों के मुताबिक, लंबे समय से विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली की मांग उठाई जा रही है। अब इस मांग को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।छात्रों ने विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों से 29 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि छात्र एकजुट होकर छात्रसंघ की बहाली की मांग को प्रभावी तरीके से उठा सकते हैं।ALSO READ : वाराणसी में संदिग्ध हालात में सफाईकर्मी की मौत, घर में खून से लथपथ मिला शवछात्र महापंचायत के इस फैसले के बाद बीएचयू में छात्रसंघ बहाली का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब 29 अक्टूबर को प्रस्तावित छात्र मार्च और उसके बाद शुरू होने वाले धरने पर सबकी नजर रहेगी।
वाराणसी में संदिग्ध हालात में सफाईकर्मी की मौत, घर में खून से लथपथ मिला शव
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वाराणसी : आदमपुर थाना क्षेत्र के गोलाघाट में शनिवार को नगर निगम के सफाई कर्मी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में हड़कंप मच गया. उसके शरीर पर चोटों के निशान को देखते हुए हत्‍या की आशंका जताई जा रही है. सूचना के बाद पुलिस शव को कब्‍जे में लेने के साथ अग्रिम कार्रवाई में जुट गई है.वहीं क्षेत्र में मौत को लेकर तरह - तरह की चर्चा व्‍याप्‍त है. उसके चेहरे, सिर पर गंभीर जख्‍म के निशान मिले हैं.सफाईकर्मी के चचेरे भाई ने बताया कि बीती रात खाना खाकर वह अपने घर गोलाघाट चला गया था. इस बीच शनिवार की सुबह नमो घाट पर एयर शो के समय सफाई कर्मियों ने उसके न आने पर तलाश शुरू की. कुछ लोग उसके घर पहुंचे तो युवक का शव घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला. फर्श पर खून फैला था. मृतक के शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान होने की बात सामने आई है.ALSO READ : वाराणसी के इस गांव में एक महीने में चार मौतों से दहशत, तेज बुखार एवं जोड़ों में दर्द से परेशान लोगघटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं है. मामले में हत्या या दुर्घटना समेत किसी भी आशंका की पुष्टि नहीं हुई है. मृतक की पहचान विनोद कुमार के रूप में हुई है. घटना के कारणों का पता जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा.