ई हौ रजा बनारस- काशी की होली में झूमे विदेशी मेहमान, महादेव के जयकारों से गूंजा शहर

वाराणसी: रंगों और उल्लास के पर्व होली पर महादेव की नगरी काशी में पूरब और पश्चिम का अद्भुत समन्वय देखने को मिला. अनोखी संस्कृति और मस्ती भरे अंदाज में शहर की गलियों और घाटों पर जहां स्थानीय लोग रंग-गुलाल में सराबोर दिखे, वहीं विदेशी पर्यटक भी बनारस की होली के रंग में पूरी तरह रंगे नजर आए. गोदौलिया, दशाश्वमेध और आसपास के क्षेत्रों में होली के दौरान विदेशी मेहमानों ने भोजपुरी गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर जमकर नृत्य किया। “ई बनारस हौ रजा…” और “लगावेलू जब लिपिस्टिक…” जैसे लोकप्रिय भोजपुरी गीतों पर जब माहौल बना, तो विदेशी पर्यटक भी खुद को थिरकने से रोक नहीं सके.

बनारसी अंदाज में होली का उत्सव
स्थानीय युवाओं और पर्यटकों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं. “हर-हर महादेव” के जयकारों के बीच पूरा माहौल उत्साह और उमंग से भर गया. काशी की परंपरागत होली का रंग ऐसा था कि देश-विदेश से आए लोग भी इस उत्सव का हिस्सा बनते दिखे. वाराणसी की होली अपने अनूठे अंदाज और खुले दिल के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां पहुंचे विदेशी पर्यटक भी इस सांस्कृतिक उत्सव से बेहद प्रभावित नजर आए. कई पर्यटकों ने रंगों के साथ नृत्य करते हुए इस अनुभव को यादगार बताया और इसे अपनी यात्रा का सबसे खास पल बताया. शहर की यही खासियत है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह देश का हो या विदेश का, इस रंगोत्सव का हिस्सा बन जाता है और बनारसी अंदाज में झूम उठता है.

काशी विश्वनाथ धाम में बिखरी फूलों की खुशबू
काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों ने भक्ति और उल्लास के साथ फूलों की होली खेली. मंदिर परिसर में गुलाब, गेंदा और विभिन्न सुगंधित फूलों की वर्षा के बीच श्रद्धालु रंगों की जगह फूलों से होली खेलते नजर आए. हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूरा धाम भक्तिरस और उत्साह से सराबोर हो उठा. काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित इस विशेष आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. फूलों की होली के दौरान भक्तों ने एक-दूसरे पर फूलों की पंखुड़ियां उड़ाकर और बाबा विश्वनाथ के जयकारे लगाकर होली का उत्सव मनाया.
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वातावरण में भक्ति, संगीत और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला. फूलों की होली काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का हिस्सा मानी जाती है. इस आयोजन के माध्यम से भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त करते हैं. मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक इस पर्व का आनंद लिया.

