एलिवेटेड रोड के निर्माण से बिना वजह लोग न हो प्रभावित, स्थानीय लोगों के हितों का रखें ध्यान

वाराणसी : शहर की यातायात व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रस्तावित करीब 25 हजार करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में व्याप्त भ्रम को दूर किया गया.
स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि एनएचएआई के अधिकारी इस बात का विशेष ध्यान रखे कि निर्माण कार्य से बिनावजह लोग प्रभावित न हो और परियोजना की डिजाइन और रैंप निर्माण के दौरान स्थानीय नागरिकों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए.
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने सर्किट हाउस सभागार में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, एनएचएआई के अधिकारियों और क्षेत्रीय पार्षदों के साथ बैठक कर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना की विस्तृत जानकारी ली.
बैठक में एनएचएआई के अधिकारियों ने डिजिटल प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना के प्रस्तावित रूट और निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी. बताया गया कि एलिवेटेड रोड काजीसराय से शुरू होकर हरहुआ फ्लाईओवर और रिंग रोड को क्रॉस करते हुए कैंट क्षेत्र के ऊपर से फुलवरिया सहित विभिन्न स्थानों से होकर आगे नमो घाट की ओर जाएगी.

परियोजना के विभिन्न हिस्सों में रैंप बनाए जाने का प्रस्ताव है. बैठक के दौरान हुकुलगंज में प्रस्तावित रैंप को लेकर चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि यदि हुकुलगंज में रैंप उतारने से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग प्रभावित होते हैं तो इसके विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हुकुलगंज में रैंप न उतारकर इसे आयुर्वेद कॉलेज के पास उतारने के विकल्प पर विशेष ध्यान दिया जाए.
मंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं का उद्देश्य जनसुविधाओं को बढ़ाना है, इसलिए एलिवेटेड रोड की डिजाइन इस तरह तैयार की जानी चाहिए, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर होने के साथ ही स्थानीय नागरिकों पर परियोजना का न्यूनतम प्रभाव पड़े.
एनएचएआई के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि परियोजना में सबसे अधिक समस्याएं रैंप वाले स्थानों को लेकर सामने आ रही हैं.
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इसी को देखते हुए रैंप के स्थानों और डिजाइन को लेकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. एलिवेटेड रोड परियोजना को वाराणसी की यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. इसके पूरा होने के बाद शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच आवागमन को सुगम बनाने और यातायात दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.



