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आईजीआरएस पोर्टल पर झूठी रिपोर्ट लगाना पड़ा भारी, लेखपाल निलंबित, कई को नोटिस...

आईजीआरएस पोर्टल पर झूठी रिपोर्ट लगाना पड़ा भारी, लेखपाल निलंबित, कई को नोटिस...
Jul 10, 2026, 07:39 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाले एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) पोर्टल पर आने वाली जनशिकायतों के निस्तारण में फर्जीवाड़ा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ वाराणसी जिला प्रशासन बेहद सख्त हो गया है. जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के कड़े रुख के बाद एडीएम (प्रशासन) पंकज कुमार की जांच रिपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई की गई है. आईजीआरएस पोर्टल पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट लगाने के आरोप में सेवापुरी के एक लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अन्य विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.


प्रशासनित सूत्रों के अनुसार, सेवापुरी के मनोज कुमार ने संपूर्ण समाधान दिवस और आईजीआरएस पर लालपुर मौजा स्थित आराजी संख्या 326 पर अवैध कब्जे की शिकायत की थी. लेकिन क्षेत्रीय लेखपाल ने मौके पर जाए बिना ही आराजी संख्या 326 की जगह आराजी संख्या 347 की गलत रिपोर्ट लगा दी और जमीन को निजी बता दिया. एडीएम की जांच में यह फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए सेवापुरी के संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया है.


दूसरा मामले में चिरईगांव ब्लॉक के नवापुर (सथवां) निवासी अजय कुमार चौधरी ने पत्नी और बेटे के निवास प्रमाण पत्र को गलत तरीके से खारिज करने की शिकायत की थी. जांच में सामने आया कि लेखपाल ने बिना स्थलीय सत्यापन के ही आख्या लगा दी थी. एडीएम प्रशासन ने सथवां के इस लेखपाल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है. जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम प्रशासन ने कुल छह मामलों में गलत निस्तारण पकड़ा है, जिसके बाद अन्य विभागों पर भी गाज गिरी है. हरहुआ के आशुतोष कुमार सिंह ने गांव में लाइट की व्यवस्था न होने की शिकायत की थी. वीडीओ ने बिना जांच और संपर्क किए ही काम पूरा होने की झूठी रिपोर्ट लगा दी. इस पर वीडीओ को नोटिस जारी करते हुए उनका जुलाई महीने का वेतन रोक दिया गया है. फुलवरिया की मयूर विहार कॉलोनी में नई सीवर लाइन बिछाने की मांग पर जल निगम के जेई ने भ्रामक रिपोर्ट लगाई, जिस पर उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है.


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सारनाथ सीएचसी पर इलाज के नाम पर पैसा मांगने की शिकायत पर संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि दोषी सुरक्षा गार्ड को निलंबित करने का निर्देश सीएमओ को दिया गया है. मुड़ादेव के पंकज कुमार द्वारा निजी बस बुकिंग में सीट आवंटन न होने की शिकायत को बिना बात किए ही निस्तारित दिखाने पर रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक से जवाब तलब किया गया है. डीएम सत्येंद्र कुमार ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली हर शिकायत का निस्तारण पूरी गंभीरता और ईमानदारी से धरातल पर होना चाहिए. निस्तारण के बाद फरियादियों से सीधे फीडबैक भी लिया जाए. अगर किसी ने भी बिना मौके पर जाए टेबल रिपोर्टिंग (फर्जी आख्या) लगाने की कोशिश की, तो उसे सीधे निलंबन और विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।