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नववर्ष पर काशी में श्रद्धालुओं का फ्री उपचार, 1015 मरीजों को दवाएं वितरित

नववर्ष पर काशी में श्रद्धालुओं का फ्री उपचार, 1015 मरीजों को दवाएं वितरित
Jan 02, 2026, 06:48 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : नववर्ष के प्रथम दिन गुरुवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए गोदौलिया स्थित तांगा स्टैंड पर आयुष विभाग द्वारा निशुल्क आयुष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया. इस शिविर का उद्देश्य दर्शनार्थियों, पर्यटकों एवं स्थानीय नागरिकों को त्वरित व प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना रहा. शिविर का शुभारंभ आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया. इस अवसर पर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार सिंह, जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. रचना श्रीवास्तव तथा क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने आयुष मंत्री को बुके व स्मृति चिन्ह भेंट कर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं.


डॉ. दयाशंकर मिश्र


शिविर में आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी – तीनों चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दर्शनार्थियों, सैलानियों एवं काशीवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. कुल 1015 मरीजों को निःशुल्क दवाएं वितरित की गईं. शिविर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित रहा. इस दौरान उदर रोग, गठिया, मधुमेह, मौसमी एवं ऋतुजनित रोगों से पीड़ित बड़ी संख्या में लोगों ने परामर्श लिया और आयुष पद्धति का लाभ प्राप्त किया.


आयुष मंत्री ने शिविर में बैठकर स्वयं मरीजों से संवाद किया, उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उपलब्ध दवाओं एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. शिविर परिसर में लगाए गए सेल्फी प्वाइंट पर उन्होंने चिकित्सकों व आमजन के साथ तस्वीर भी खिंचवाई. शिविर को सफल बनाने में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही.


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बताते चलें कि आयुष विभाग द्वारा आयोजित यह शिविर नववर्ष पर श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य सेवा की दृष्टि से एक सराहनीय पहल साबित हुआ, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को निःशुल्क और सुरक्षित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी. शिविर में मंत्री के पीआरओ गौरव राठी, संतोष सैनी, अखिलेश यादव, सौरभ राय, जय विश्वकर्मा, राहुल पांडेय, प्रमोद राय, जितेंद्र, अंकुर उपाध्याय, दिनेश सिंह दीनू, अरुण पांडेय, आकाश आदि आदि ने शिविर की बागडोर संभाली. कार्यक्रम में डॉ. रिचा लवानिया, डॉ. अरुण सिंह, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. अजीत मुरलीधर, सुनील कुमार पांडे, आज़ाद, नितेश कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार, हर्षवर्धन, विनीत श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने सहयोग प्रदान किया.

बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।