दशाश्वमेध घाट पर फ्री वाई-फाई, लेकिन बिना प्रचार के सुविधा बेअसर

वाराणसी: दशाश्वमेध घाट पर नगर निगम द्वारा शुरू की गई फ्री वाई-फाई सेवा फिलहाल अधूरी तैयारियों के कारण अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रही है. डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के तहत दी जा रही इस सुविधा का उद्देश्य जहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आधुनिक कनेक्टिविटी देना है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है.घाट पर कहीं भी स्पष्ट सूचना बोर्ड, साइनेज या प्रचार-प्रसार की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटक इस सुविधा से अनजान बने हुए हैं.रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु और सैलानी यहां पहुंचते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम लोग ही फ्री वाई-फाई का उपयोग कर पा रहे हैं.
घाट पर पहुंचे पर्यटक विपीन मित्तल ने बताया कि उनके मोबाइल में वाई-फाई नेटवर्क दिखाई दिया और कनेक्शन भी आसानी से स्थापित हो गया, लेकिन आसपास कहीं भी ऐसा कोई बोर्ड या संकेत नहीं मिला, जिससे यह जानकारी मिल सके कि यहां मुफ्त वाई-फाई उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि यदि सही तरीके से सूचना दी जाए, तो सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है.अन्य पर्यटकों ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी. उनका कहना है कि इंटरनेट सेवा की गुणवत्ता अच्छी है और कनेक्टिविटी में कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं.
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कई लोगों ने सुझाव दिया कि घाट पर प्रमुख स्थानों पर सूचना बोर्ड, QR कोड निर्देशात्मक पोस्टर लगाए जाने चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सुविधा से जुड़ सकें.स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की पहल सराहनीय है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कमी साफ दिखाई दे रही है. यदि उचित प्रचार-प्रसार और व्यवस्था की जाती, तो यह सुविधा हजारों लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती थी.
गौरतलब है कि इससे पहले भी वाराणसी के घाटों पर वाई-फाई सेवा शुरू की गई थी, जो कुछ समय बाद बंद हो गई थी. ऐसे में एक बार फिर शुरू हुई यहसुविधाभीव्यवस्थागत खामियों के चलते सवालों के घेरे में आ गई है.विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सुविधाओं की सफलता केवल उनकी शुरुआत से नहीं, बल्किउनके प्रभावी संचालन और जनजागरूकता से तय होती है. यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो यह पहल भी सीमित उपयोग तक सिमटकर रह सकतीहै और अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी.



