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गंगा में क्रूज का मल मूत्र गिरने का वीडियो वायरल, नगर निगम ने गठित की जांच कमेटी

गंगा में क्रूज का मल मूत्र गिरने का वीडियो वायरल, नगर निगम ने गठित की जांच कमेटी
Jan 13, 2026, 07:41 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी : गंगा में प्रदूषण को लेकर वाराणसी से एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है. गंगा में संचालितअलकनंदा क्रूज से कथित रूप से मल-मूत्र और गंदा पानी छोड़ने का आरोप लगा है. नाविकों द्वारा बनाए गए एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है. इस मुद्दे को लेकर यूपी कांग्रेस ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है.


वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि क्रूज से सीधे गंगा में गंदगी प्रवाहित की जा रही है. स्थानीय नाविकों का आरोप है कि क्रूज में लगे शौचालयों का अपशिष्ट बिना किसी शोधन प्रक्रिया के नदी में छोड़ा गया, जो गंगा की स्वच्छता और करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है.


जांच समिति देगी रिपोर्ट


प्रकरण सामने आने के बाद नगर निगम वाराणसी ने तत्काल संज्ञान लिया है; नगर निगम ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है. यह समिति क्रूज के अपशिष्ट निस्तारण सिस्टम, पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन और वायरल वीडियो की सत्यता की जांच करेगी. समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. घटना को लेकर स्थानीय नाविकों में भारी आक्रोश है. वीडियो बनाने वाले नाविकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों को लेकर आशंकित थे. उनका आरोप है कि बड़े और आधुनिक क्रूजों के संचालन में नियमों की अनदेखी की जा रही है, जबकि छोटे नाविकों पर प्रशासन की सख्त निगरानी रहती है. नाविकों ने मामले में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है. बता दें कि इससे पहले भी जलयान से गंगा में पेशाब करने का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें केस भी दर्ज हुआ था.


जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान


जिलाधिकारी ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं. डीएम ने स्पष्ट कहा है कि गंगा की पवित्रता और स्वच्छता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो क्रूज संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.


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अलकनंदा क्रूज के संचालक ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि गंगा में जो पानी छोड़ा गया, वह केवल सामान्य उपयोग का पानी था, न कि मल-मूत्र. संचालक के मुताबिक क्रूज में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम लगा हुआ है और सभी पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन किया जाता है.

आखिर UGC पर क्यों छिड़ा विवाद, धरने पर बैठे PCS अफसर
आखिर UGC पर क्यों छिड़ा विवाद, धरने पर बैठे PCS अफसर
यूजीसी यानि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने एक नया नियम बनाया हैं. जिसका नाम है Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026. ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. इस नियम के मुताबिक, हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी.इस कमेटी में शामिल एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी. कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना बेहद जरूरी है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाने के साथ ही पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना होगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लाए गए यूजीसी नियमों पर सुनवाई कर कोर्ट ने कहा कि, 2012 के पुराने नियमों को अपडेट करें और भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाएं.यूजीसी के इस नए बिल को लेकर बवाल मच गया है. क्योंकि इस बिल के तहत जातिगत भेदभाव को रोकने का हवाला दिया गया है. हालांकि, यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियमों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए है और खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है. यूनिवर्सिटी के खिलाफ कॉलेज से लेकर सड़कों तक लोग हल्ला बोल रहे हैं. ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिरी यूजीसी को यह बिल क्‍यों लाना पड़ा और इसके पीछे जिस रिपोर्ट को आधार बनाया गया है उसमें क्‍या कहा गया है.जाने क्यों लाने पड़े ये नियमये नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आए हैं.सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान UGC को 8 हफ्तों में नए सख्त नियम बनाने को कहा था. हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रोहित वेमुला और मुंबई मेडिकल कॉलेज की पायल तड़वी ने कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद सुसाइड कर लिया था. इन मामलों में उनकी माताओं ने PIL दाखिल की थी. कोर्ट ने UGC से कहा था कि 2012 के पुराने नियमों को अपडेट करें और भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाएं.नए नियमों में बड़ा भेदभाव यूजीसी के इस नए नियमों में जातिगत भेदभाव को स्‍पष्‍ट रूप से परिभाषित किया गया है. ये SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या अपमानजनक व्यवहार भेदभाव माना जाएगा. अगर कोई छात्र की गरिमा या शिक्षा में समानता को कम करता है, तो वो भेदभाव माना जाएगा. इस मामले की शिकायत कमेटी को की जा सकती है और दोषी पर सख्त कार्रवाई होगी.रिपोर्ट ने खोली UGC का राज UGC ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें जातिगत भेदभाव के आंकड़े दिए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतें 2017-18 में 173 थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं यानी 5 साल में इसमें 118.4% की बढ़ोतरी हुई. ये आंकड़े UGC के अपने डेटा से हैं, जो पार्लियामेंट कमिटी और सुप्रीम कोर्ट को दिए गए. शिकायतों में 90% से ज्यादा का निपटारा हुआ, लेकिन पेंडिंग केस भी बढ़े.2019-20 में 18 से 2023-24 में 108 केस सामने आए.यूजीसी पर क्यों छिड़ा विरोधयूजीसी नए नियमों के खिलाफ सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के छात्र प्रदर्शन करने पर उतर आए हैं. उनका आरोप है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ हैं. नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात कही गई है. पर सच्चाई तो यह है कि जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है, जिसको लेकर विरोध हो रहा है.ऐसे में सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि इन नियमों का फायदा उठाकर कोई भी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हो चुकी है. याचिका में कहा गया है कि ये UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ है. विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे भेदभाव कम नहीं, बल्कि ज्यादा हो सकता है.
UGC के चक्कर में PCS अफसर ने दिया इस्तीफा, किया धरना प्रदर्शन
UGC के चक्कर में PCS अफसर ने दिया इस्तीफा, किया धरना प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में विवाद छिड़ गया है. जहां सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की परेशानियां बढ़ गई हैं. जी हां, वो बरेली डीएम ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन पर बैठ गये. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि, उन्हें डीएम अविनाश सिंह द्वारा बंधक बनाया गया और उन्हें सुनियोजित साजिशन के तहत सस्पेंड कर दिया गया है.इन्हीं आरोपों का खंडन करते हुए एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने बताया कि, वहां बंधक बनाने जैसी कोई बात नहीं थी. वहीं अग्निहोत्री ने यह मांग की है कि, डीएम स्वंय आकर उन्हें ये बताने की कोशिश करें कि कल शाम किसका फोन आया था और पंडितों के लिए अपशब्द जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी कर रहा था. अगर बरेली डीएम आने में असमर्थ हो तो पीएम या गृहमंत्री ही आने का कष्ट करें.UGC के विरोध में सवर्ण वर्ग दरअसल, UGC की नई गाइडलाइन को लेकर सवर्णों ने विरोध शुरू कर दिया है. इन बढ़ते विवादों के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा देना चर्चाओं का विषय बन बैठा है. यूपी पीसीएस 2019 बैच के अधिकारी और बरेली के पीसीएस अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया और कहा, उनका इस्तीफ़ा पद और प्रतिष्ठा से ऊपर स्वधर्म और स्वाभिमान से कम नहीं है. यूजीसी की नई गाइडलाइन का विरोध करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि, ये नया नियम सभी वर्ग के छात्रों का शोषण करने वाला है. जो सभी जातियों के बच्चों के प्रति विषमताओं और षड्यंत्र करने का मौक़ा मिलेगा.मेरा इस्तीफा देने का निर्णय व्यक्तिगत लाभ या हानि नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जवाबदेही और अंतरात्मा की आवाज है. उन्होंने कहा कि इस इस्तीफे वजह UGC के साथ-साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी पकड़कर पिटाई ब्राह्मणों का अपमान है. क्योंकि प्रयागराज माघ मेले में जिन पूजनीय संतों का अपमान और ब्राह्मणों का उत्पीड़न किया गया. हैरानी की बात यह है कि अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के बटुक शिष्यों की पिटाई प्रशासन द्वारा की गई. जिस समाज में संतों की शिखा को छुआ तक नहीं जाता, वहां उन्हें घसीट कर मारा जा रहा है. जब सुरक्षा करने वाला प्रशासन ही मर्यादाओं का उल्लंघन करने लगे तो आम जनता की बात ही निराली है. ऐसे दुर्वव्यवहार ने मानवता को शर्मसार करने में जरा भी कसर नहीं छोड़ी है.अग्निहोत्री के इस्तीफे ने मचाया बवाल वहीं गौर करने वाली बात यह है कि मजिस्ट्रेट अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि, अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण करने का. इससे ये आशंका जताई जा रही है कि, इस्तीफे के बहाने वो राजनीति में एंट्री मारने के मूड में हैं.जाने क्या है UGC नियमबात करें यूजीसी यानि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने एक नया नियम बनाया हैं जिसका नाम है Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026. ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. इस नियम के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी. इस कमेटी में शामिल एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी.कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना बेहद जरूरी है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाने के साथ ही पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना होगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लाए गए यूजीसी नियमों पर सुनवाई कर कोर्ट ने कहा कि, 2012 के पुराने नियमों को अपडेट करें और भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाएं.
पूर्वांचल समेत वाराणसी में मौसम का यलो अलर्ट, अगले 24 घंटे बादलों के सक्रिय होने की संभावना
पूर्वांचल समेत वाराणसी में मौसम का यलो अलर्ट, अगले 24 घंटे बादलों के सक्रिय होने की संभावना
वाराणसी - पूर्वांचल सह‍ित वाराणसी में मौसम पलटी मारने वाला है. मौसम व‍िभाग ने अगले चौबीस घंटों के ल‍िए यलो अलर्ट जारी क‍िया है. माना जा रहा है क‍ि आने वाले कुछ घंटों में पूर्वांचल में बादलों की सक्र‍ियता हो सकती है. मौसम व‍िभाग के अनुमानों के अनुसार 28 जनवरी को वातावरण में कोहरे और बादलों की सक्र‍ियता देखी जा रही है. इसके साथ ही पश्‍च‍िम से आने वाली गलन भरी हवाओं की भी आवाजाही का दौर शुरू हो सकता है. वहीं दिल्‍ली और पश्चिम उत्‍तरप्रदेश में बारिश और ओले पडने के बाद यहां भी मौसम तल्‍ख हो सकता है.मंगलवार की सुबह वातावरण में नमी का असर भी रहा और ठंडक भरी हवाओं का रुख भी बना रहा. हालांक‍ि सुबह सात बजे के बाद वातावरण में धूप का असर हुआ और सूरज के ताप से गुनगुना अहसास वातावरण में होने लगा. द‍िन चढ़ने के साथ हवाओं का रुख सुस्‍त हुआ और धूप ने लोगों को राहत देना शुरू क‍िया. मौसम व‍िभाग के अनुमानों के अनुसार ही हवाओं का रुख बादलों को लाने की ओर हो चला. यानी पछुआ का जोर बादलों की आवाजाही शुरू करा चुका है.ALSO READ : वाराणसी में बटुकों ने कंठी माला और धोती कुर्ता पहनकर खेला क्रिकेट, संस्‍कृत में कमेंट्रीमौसम व‍िभाग ने अगले 24-48 घंटों में बादलों और कोहरे के साथ ही इसके पीछे चलने वाली गलन भरी हवाओं का भी अनुमान जाहिर क‍ि‍या है. मौसम व‍िभाग के अनुसार बुधवार को मौसम का रुख बदला हुआ होगा. इसके पीछे से पछुआ हवाओं का असर ठंडक भी लेकर आएंगी. इसकी वजह से हवाओं का रुख ठंडक की ओर होने के बाद फरवरी माह की शुरुआत के साथ ही मौसम गर्म होना भी शुरू होगा और वातावरण में फगुआ का जोर शुरू हो जाएगा.बीते चौबीस घंंटों में अध‍िकतम तापमान 23.8°C दर्ज क‍िया गया जो सामान्‍य से 0.5 ड‍िग्री कम रहा. न्‍यूनतम तापमान 11.4°C दर्ज क‍िया गया जो सामान्‍य से 1.6 ड‍िग्री अध‍िक रहा. आर्द्रता न्‍यूनतम 66% और अध‍िकतम 93% दर्ज की गई. वातावरण में नमी का असर आगे बढ़ा तो बादलों की सक्र‍ियता का रुख हो सकता है. इसकी वजह से पछुआ हवाओं का असर भी होगा. हालांक‍ि पहाड़ों पर बर्फबारी और पश्‍च‍िमी व‍िक्षोभ का असर होने से पूर्वांचल का क्षेत्र भी प्रभाव‍ित हो सकता है.