जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी पर मचा बवाल, छपने से पहले गरमाई सियासत

'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' नाम की ये किताब भले ही अभी रिलीज नहीं हुई है, लेकिन इसे लेकर सरकार, विपक्ष, हर किसी में तनातनी देखने को मिल रही है. इस किताब में लिखी गई बातों को लेकर लोकसभा में विवाद जारी है. विवाद की जड़ सिर्फ इतनी सी है कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की ऑटोबायोग्राफी के हवाले से कही गई सभी बातों को राहुल गांधी सभी के सामने रखना चाहते है, पर अफसोस की उन्हें लोकसभा में बोलने की इजाजत नहीं दी जा रही हैं. क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार की दलील है कि इस किताब के हवाले से कुछ भी नहीं कहा जाना चाहिए, जिसके चलते विपक्ष को किताबी भाषा में ही पलटवार करने के लिए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे एक नहीं कई किताबों के साथ लोकसभा जा पहुंचे.

फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी बनी विवादित
फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी नाम की किताब कोई आम नहीं बल्कि, आर्मी से गुजरती स्थिती है, जिसकी सच्चाई राहुल गांधी बताना चाहते है. लेकिन इसमें लिखी सच्चाई को बताने से भाजपा सरकार रोकना चाहती है, क्योंकि उसका काला चिट्ठा विपक्ष और जनता के सामने आ जाएगा. यहीं कारण है कि बीते सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में साफ तौर पर ये कहा था कि, अप्रकाशित किताब के हवाले से कोई भी दावा कैसे किया जा सकता है, मुद्दे की बात तो यह है कि, ये किताब क्यों नहीं छपी और इसमें ऐसा क्या छिपा है जो इन सभी को लेकर सरकार आखिरकार चुप क्यों है.

दिसंबर 2023 में ही पेंगुइन ने जनरल नरवणे की 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का ऐलान किया था. तब इसका प्री-ऑर्डर भी लिया जा रहा था, किताब जनवरी 2024 में ही आनी थी, लेकिन इसकी रिलीजिंग ये कहते हुए बीच में ही रोक दिया गया कि अभी तक इसके लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे में सवाल है कि 432 पन्ने की यह किताब महज राजनीतिक विवाद बन कर रह जाएगी या फिर लोगों के हाथ भी आएगी.

नरवणे की किताब क्या है और इसमें क्या लिखा है?
जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी ‘Four Stars of Destiny’ किताब जिसे लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच खूब विवाद मचा हुआ है. क्योंकि नरवणे ने इसमे साफ लिखा है कि, सैन्य जीवन के अनुभवों के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव, पूर्वी लद्दाख में हुए मिलिट्री एक्शंस, सरकार और सेना के बीच डिसीजन मेकिंग प्रोसेस और रणनीतिक सोच का जिक्र है. दिसंबर 2023 में इसके कुछ अंश मीडिया में प्रकाशित हुए थे, जिनमें यह संकेत मिला कि चीन के साथ टकराव के दौरान हालात उतने नियंत्रण में' नहीं थे, जितना आधिकारिक तौर पर बताया गया. यही अंश इस किताब को संवेदनशील बना देते हैं, क्योंकि वे सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों से जुड़े माने गए. जो विवादों का मुद्दा बना हुआ है.



