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राजघाट खोदाई में मिले मानव कंकाल पर बीएचयू में आनुवंशिक अध्‍ययन, खुलेंगे रहस्य

राजघाट खोदाई  में मिले मानव कंकाल पर बीएचयू में आनुवंशिक अध्‍ययन, खुलेंगे  रहस्य
Aug 04, 2026, 09:58 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी :काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आज एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल की शुरुआत हुई। मध्य गंगा घाटी के प्रमुख पुरातात्विक स्थल राजघाट से प्राप्त एक मानव कंकाल के अवशेष पर गहन आनुवंशिक एवं जैव-पुरातात्विक अध्ययन आरंभ किया गया है।


यह अध्ययन काशी और गंगा घाटी में रहने वाले प्राचीन लोगो कीआनुवंशिक पहचान, उनकी जीवनशैली तथा सिंधु घाटी सभ्यता (राखीगढ़ी) के लोगों से उनकी कितनी समानता या भिन्नता थी, इन प्रश्नों के उत्तर खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


राजघाट वाराणसी के उत्तर-पूर्वी छोर पर गंगा और वरुणा के संगम के निकट स्थित है। इसकी खोज 1940 में काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार के दौरान हुई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा किए गए उत्खननों, विशेष रूप से 1957 से 1969 के बीच प्रो. ए.के. नारायण और टी.एन. रॉय के नेतृत्व में हुए विस्तृत कार्यों से यहाँ कई सांस्कृतिक चरणों के अवशेष मिले। इनमें आवासीय संरचनाएँ, टेराकोटा कलाकृतियाँ, मुहरें और अन्य महत्वपूर्ण पुरावशेष शामिल हैं।


इन उत्खननों के दौरान एक संपूर्ण मानव कंकाल भी प्राप्त हुआ था, जिसे प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में सुरक्षित रखा गया है। अब तक इस कंकाल का कोई वैज्ञानिक जैविक विश्लेषण नहीं किया गया था। इसकी सटीक तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई है। विभाग के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार की पहल पर इस कंकाल पर आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन का प्रस्ताव रखा गया।


आज एनशिएन्ट डीएनए विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ज्वल प्रताप सिंह ने कंकाल से सावधानीपूर्वक नमूने एकत्र किए।

इस अध्ययन के प्रणेता प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार ने कहा की राजघाट काशी की प्राचीनता और निरंतरता का महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इस कंकाल को सुरक्षित रखना हमारे विभाग की जिम्मेदारी थी। अब आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि गंगा घाटी में रहने वाले प्राचीन लोग कौन थे, उनकी जीवनशैली कैसी थी और उनकी आनुवंशिक पहचान क्या थी। विभाग के 'शताब्दी वर्ष' में 'ज्ञान लैब' के साथ यह सहयोग पुरातत्व और विज्ञान के बीच की दूरी को कम करने का सार्थक कदम है।”

यह अध्ययन ज्ञान लैब जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।


प्रोफेसर चौबे ने कहा की यह अध्ययन गंगा घाटी की प्राचीन आबादी की आनुवंशिक विविधता को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। हम प्राचीन डीएनए के माध्यम से इसकी वंशावली का पता लगाएंगे और आइसोटोप विश्लेषण से आहार तथा जीवनशैली की जानकारी प्राप्त करेंगे। विशेष रूप से यह देखना बहुत ही महत्वपूर्ण होगा कि राजघाट का यह व्यक्ति राखीगढ़ी (हड़प्पा काल) के कंकालों से आनुवंशिक रूप से कितना मिलता-जुलता है या कितना भिन्न है। इससे सिंधु घाटी और गंगा घाटी की आबादियों के बीच डीएनए संबंधों का नया खुलासा हो सकता है।


इस परियोजना के अंतर्गत मुख्य रूप से तीन प्रमुख वैज्ञानिक विश्लेषण किए जाएंगे; प्राचीन डीएनए विश्लेषण द्वारा व्यक्ति की आनुवंशिक वंशावली, जनसंख्या संबंध और राखीगढ़ी सहित अन्य प्राचीन दक्षिण एशियाई नमूनों से तुलना के जाएगी; स्टेबल आइसोटोप विश्लेषण आहार की आदतें, भोजन स्रोत और संभावित भौगोलिक गतिशीलता की जानकारी देगा और जैव-पुरातात्विक एवं काल निर्धारण अध्ययन कंकाल की आयु, स्वास्थ्य स्थिति तथा रेडियोकार्बन डेटिंग के माध्यम से सटीक तिथि का निर्धारण देगा।



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नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
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वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।