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दीवाली से पहले आसमान पर चढ़े सोने के दाम...

दीवाली से पहले आसमान पर चढ़े सोने के दाम...
Oct 17, 2025, 08:03 AM
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Posted By Anurag Sachan

भारत में सोने के दाम में लगातार तेजी जारी है. इस बीच सवाल यह है कि क्या सोने के दाम में गिरावट हो सकती है. सोना अपनी उस ऊंचाई तक पहुंच गया है जहां से उसे नीचे आते देखा जा सकता है यह ऊंचाई कितनी है और सोना अब नीचे आएगा, इसकी भविष्वाणी कोई नहीं कर सकता है. वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि सोने के दाम में गिरावट हो सकती है.


सोना खरीदने वालों का कहना है कि, यह सोना है. कुछ न कुछ दे के ही जाएगा, क्योंकि भारत में शादी का सीजन है लोग दहेज़ के लिए सोना देंगे. दूसरी ओर इस सब के पीछे एक बात है कि भारत की धरती से सोना कभी ख़त्म नहीं हो सकता है. भारत की धरती में इतना सोना है कि पूरी जमीन चार बार ढक जा सकती है.


आर्थिक और भू-राजनीतिक से बढ़े सोना-चांदी के दाम


वहीं देखा जाए तो पिछले पांच वर्षों के दौरान सोने और चांदी के दामों में भारी वृद्धि देखी गई है, जिसका कारण आर्थिक और भू-राजनीतिक हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवधि में सोने की कीमतें 47% जबकि चांदी की कीमतों में करीब 60% की वृद्धि दर्ज की गई है.


अगर सोने की दाम की बात करें तो ..


31 मार्च, 2021 ₹44,013 ₹62,862

31 मार्च, 2022 ₹51,278 ₹66,990

31 मार्च, 2023 ₹59,512 ₹71,582

31 मार्च, 2024 ₹69,135 ₹77,800

31 मार्च, 2025 ₹91,190 ₹1,03,900


था. लेकिन अब कहा जा रहा है कि कि इसकी कीमत डेढ़ लाख तक जा सकती है.


अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं


सोना के दाम का बढ़ते जाना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है. यह बताता है कि लोगों का भरोसा हिल गया है और वे सुरक्षित निवेश की तलाश में सोना खरीद रहे हैं. ट्रंप भी एक फैक्टर हैं. टैरिफ के कारण रुपया कमज़ोर हुआ तो सोने का दाम बढ़ना ही था. टैरिफ के कारण डॉलर और ट्रेज़री बॉन्ड में निवेश कम होने लगा तो वो पैसा सोने में लगाया जा रहा है. इसलिए भी दाम बढ़ रहा है. सोना बढ़ने की ख़बरें अख़बारों में छाई हुई हैं, लेकिन अब इसके दाम में गिरावट की बातें होने लगी है.


चांदी भी दिखा रही तेवर


इन सब के बीच अगर चांदी की बात करें तो...इसके भी तेवर कम नहीं है. यह भी लगातार आसमान को छू रही है. हाल यह हो गया है कि चांदी कछुए की चाल की तरह आगे निकल गई है जबकि सोना पीछे छूट गया है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंट्रल बैंकों ने सोना खूब खरीदा है अगर इन बैंकों ने इसे बेचना शुरू कर दिया तो इसके दाम में गिरावट आ सकती है.


अगर साल 2008 के दौर में आर्थिक संकट के बात करें तो अमेरिका ने बैंकों की मदद के लिए रुपये छापना शुरू कर दिया था जिसके कारण सोने के बाद बढ़ने लगे. वहीं साल 2014 में जब फ़ेडरल बैंक ने इसको बैंड करने के आदेश दिए तो सोने के दाम गिर गए.


अगर 2007 और 2011 के बीच की बात करें तो सोने में 40 फीसद की गिरावट देखी गई थी. वहीं अब इसमें फिर से तेजी देखी जा रही है.

BHU के मधुबन पोखरे में गंदगी का अंबार, छात्रों ने चलाया स्‍वच्‍छता अभियान
BHU के मधुबन पोखरे में गंदगी का अंबार, छात्रों ने चलाया स्‍वच्‍छता अभियान
Piles of garbage in BHU's Madhuban pond, students launched a cleanliness driveवाराणसी: मिशन मधुबन और Sunday for BHU अभियान के अंतर्गत स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट (SFD), काशी हिंदू विश्वविद्यालय इकाई द्वारा मधुबन स्थित पोखरे में विशेष स्वच्छता एवं संरक्षण अभियान चलाया गया. अभियान के दौरान SFD के कार्यकर्ता स्वयं पोखरे में उतरकर उसकी चौतरफा सफाई करते दिखाई दिए. कार्यकर्ताओं ने पोखरे में जमा कचरा, प्लास्टिक एवं गंदगी को हटाकर जल स्रोत को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाने का प्रयास किया. अभियान के दौरान मधुबन परिसर के आसपास भी साफ-सफाई की गई तथा विद्यार्थियों के बीच जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छ परिसर के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य किया गया.मिशन मधुबन अभियान बता दें कि SFD के कार्यकर्ता पिछले महीने भर से मधुबन के संरक्षण हेतु स्वयं अपना सर्वस्व लगाकर लगातार कार्य कर रहे हैं, किंतु चिंता का विषय यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के कानों पर इस विषय को लेकर जू तक नहीं रेंग रही है. एसएफडी इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि “मिशन मधुबन अभियान का उद्देश्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि मधुबन को पुनः उसकी पुरानी गरिमा, स्वच्छता एवं सुंदरता प्रदान करना है. यह अभियान छात्रों के भीतर अपने विश्वविद्यालय एवं पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का भी प्रयास है. मधुबन की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इसे संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है.”कार्यकर्ताओं ने पोखरे में उतरकर की सफाई वहीं संयोजक मोहित राज गुप्ता ने कहा कि “आज कार्यकर्ताओं ने स्वयं पोखरे में उतरकर सफाई की, जिससे यह संदेश जाए कि समाज एवं परिसर की जिम्मेदारी हम सभी की है. मधुबन का संरक्षण जल, पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण से भी जुड़ा हुआ विषय है. ‘Sunday for BHU’ के माध्यम से हम विश्वविद्यालय परिसर में सकारात्मक परिवर्तन एवं जनभागीदारी का वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं व आने वाले समय में SFD द्वारा मधुबन में नियमित स्वच्छता अभियान, पौधारोपण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, ताकि यह स्थान विद्यार्थियों के लिए एक स्वच्छ, हरित एवं प्रेरणादायी वातावरण के रूप में विकसित हो सके.”Also Read: कुंजी टोला में आग लगने से तीन गाड़ियां और घरेलू सामान जलकर राख, सामने आई यह वजहअभियान के दौरान मधुबन क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक सुविधाओं एवं वॉशरूम की स्थिति को बेहतर बनाने तथा पूरे क्षेत्र को स्वच्छ, हरित एवं आकर्षक स्वरूप देने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई. विद्यार्थियों ने नियमित रूप से मिशन मधुबन अभियान से जुड़कर परिसर संरक्षण हेतु कार्य करने का संकल्प लिया.
कुंजी टोला में आग लगने से तीन गाड़ियां और घरेलू सामान जलकर राख, सामने आई यह वजह
कुंजी टोला में आग लगने से तीन गाड़ियां और घरेलू सामान जलकर राख, सामने आई यह वजह
Three vehicles and household goods were destroyed in a fire in Kunji Tola, the reason behind it being revealed.वाराणसी: चौक थाना क्षेत्र में घुघरानी गली के कुंजी टोला में एक मकान के बाहर से गुजर रहे बिजली के तार में शार्ट सर्किट के कारण आग लग गई. यह आग इतनी भयानक थी कि घर के बाहर खड़ी इंफील्ड बुलेट, यामाहा और टीवीएस बाइक के साथ-साथ घर में मौजूद डीप फ्रीजर, इन्वर्टर और अन्य कई घरेलू सामान जलकर राख हो गए. सोमवार की सुबह आग लगने की इस घटना से क्षेत्र में अफरा तफरी की स्थिति बनी रही. इस दौरान धुएं के कारण एक वृद्ध महिला अचेत हो गई. सूचना के बाद पहुंचे दमकल कर्मियों ने मशक्‍कत के बाद आग बुझाई.आग लगने से लाखों का नुकसानस्‍थानीय लोगों के अनुसार घटना सुबह करीब 6:30 बजे की है. मकान नंबर CK 39/49 के मालिक पंकज कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उनके घर के बाहर से निजी कंपनी द्वारा लगाए गए बिजली के तार की लापरवाही के कारण यह घटना हुई. आग ने धीरे-धीरे भयानक रूप ले लिया था. इसकी वजह से लाखों का नुकसान हो गया है. आग के कारण घर में मौजूद 70 वर्षीय चमेली देवी धुएँ के कारण बेहोश हो गईं, जिन्हें तुरंत मण्डलीय चिकित्सालय कबीरचौरा में भर्ती कराया गया. उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है.दमकल गाड़ियों ने आग पर पाया काबूबता दें, स्थानीय लोगों ने पहले आग पर काबू पाने के लिए फायर सिलेंडर का उपयोग किया, लेकिन जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो फायर डिपार्टमेंट को सूचित किया गया. दमकल की दो गाड़ियों ने कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया. आग बुझने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली. घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन के अधिकारी, स्थानीय थाने के लोग और शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की और घटना की जानकारी ली.Also Read: आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, 11 दिनों में 7 रुपये की बढ़ोतरीइस घटना ने स्थानीय निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है. पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि आग लगने के समय वह घर में नहीं थे, लेकिन जब उन्होंने घटना की जानकारी ली, तो उन्हें बहुत चिंता हुई. स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली के तारों की स्थिति को सुधारने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों. स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वे इस मामले की जांच करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें.
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, 11 दिनों में 7 रुपये की बढ़ोतरी
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, 11 दिनों में 7 रुपये की बढ़ोतरी
Why are petrol and diesel prices rising? There has been an increase of Rs 7 in 11 days.देशभर में बढ़ती महंगाई से हाहाकार मचा हुआ है. जिसने आम जनता की जेब पूरी तरह से खाली होती नजर आ रही है. यहीं कारण है कि भारतीय परिवारों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, साग-सब्‍जी से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों ने रसोई के बजट को पहले ही बिगाड़ रखा है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी लोगों के लिए बेहद चिंता की बात है. आम जनता को घर का खर्चा उठाना ही इतना मुश्किल हो चुका है कि पेट्रोल-डीजल के दामों ने और भी दिक्कतों में डाल दिया है. जहां आर्थिक बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.ईंधन की बढ़ती कीमतों ने किया हैरान सोमवार को ईंधन की कीमतों में एक बार फिर से हुई बढ़ोतरी ने देशभर को हैरान कर दिया है. पेट्रोल-डीजल के ये बढ़ते दामों में ये बढ़ोतरी पिछले 11 दिनों में चौथी बार है. इसके बावजूद, देश की तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड पेट्रोल और डीजल के दामों में हालिया बढ़ोतरी के बाद भी भारी वित्तीय घाटे से जूझ रही है.देश की गरीब जनता का कहना है कि, जब सरकार ही घरेलू गैसे से लेकर पेट्रोल-डीजल के दामों में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी कर रही है, तो ऐसे में ये आम जनता मदद की उम्मीद लगाए तो किससे लगाए, क्योंकि जो सहायता करने वाली है अगर वहीं गरीबों के लिए मुसीबत खड़ी कर रही है, सच तो ये है कि ये सिर्फ मुसीबत नहीं, बल्कि गरीब के पेट पर लात मारने की तरह है. एक गरीब के लिए उसका घर चलाना, इस महंगाई में बच्चों की फीस भरना ही इतना मुश्किल होता है, कि बच्चों का भविष्य बनाने के खातिर एक वक्त का रोटी भी कभी-कबार नसीब नहीं होता है, ऐसे में भला पेट्रोल-डीजल का दाम ये गरीब जनता कैसे देगी.जाने पेट्रोल-डीजल में कितनी बढ़ोतरी हुईजानकारी के मुताबिक, पिछले 11 दिनों के भीतर कई चरणों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल ₹7 प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि की जा चुकी है. यह बढ़ोतरी अलग-अलग चरणों में हुई है. जिसमें पहले ₹3, फिर 90 पैसे, उसके बाद 87 पैसे और हाल ही में ₹2.61 प्रति लीटर बढ़ी है. हालांकि, वित्तीय बाजार के अनुमानों के अनुसार, यह बढ़ोतरी तेल कंपनियों के घाटे को पाटने के लिए काफी नहीं है. कच्चे तेल की खरीद और रिफाइनिंग का खर्च और रिटेल सेलिंग प्राइस के बीच के अंतर को खत्म करने और पुराने घाटे की पूरी भरपाई करने के लिए, सैद्धांतिक रूप से ईंधन की कीमतों में ₹28 से ₹33 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की आवश्यकता है.Also Read: पुलिस हिरासत में दुर्व्‍यवहार का आरोप, सुभासपा नेता की हालत बिगड़ी, थाना प्रभारी निलंबितइसका सीधा मतलब यह है कि हालिया बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रति लीटर कम से कम ₹20 और बढ़ाने की जरूरत होगी. हालांकि, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से एक बार में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होना नामुमकिन सा लगता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में टुकड़ों-टुकड़ों में कीमतों का बढ़ना तय है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हालिया मूल्य संशोधन से पहले तेल कंपनियों पर असाधारण दबाव बन चुका था.