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ज्ञानवापी मुकदमे को सुलह-समझौते से हल करने को तैयार नहीं मुस्लिम पक्ष...

ज्ञानवापी मुकदमे को सुलह-समझौते से हल करने को तैयार नहीं मुस्लिम पक्ष...
Jul 13, 2026, 11:08 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : ज्ञानवापी विवाद का समाधान विशेष लोक अदालत में करने का सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव निर्देश दिया है. इस मामले में सीधे निर्णय देने के बजाय दोनों पक्षों को मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने को कहा है. इस संदर्भ में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में 14 जुलाई को मध्यस्थता की तारीख निर्धारित की गई है. लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है. वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि वह सुलह-समझौते के लिए तैयार है.


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तय किया गया है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के वादी और अधिवक्ता सुलह-समझौते के लिए उपस्थित होंगे. इसके बाद 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जहां दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर अपनी बात रखेंगे.


सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद है कि ज्ञानवापी से जुड़े मुकदमे में बातचीत के माध्यम से कोई न कोई समाधान अवश्य निकलेगा. ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों के मध्यस्थता से समाधान के लिए जिला स्तर पर नोटिस जारी किया गया है. ज्ञानवापी से जुड़ी सात पत्रावलियों के संबंध में सभी पक्षों को नौ जुलाई को सूचना दी जा चुकी है. सभी पक्षों को 14 जुलाई को उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है, जहां ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों के साथ-साथ विशेष बिंदुओं पर भी चर्चा की जाएगी. इस प्रक्रिया का उद्देश्य विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना है, जिससे दोनों समुदायों के बीच आपसी समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा मिले। विशेष लोक अदालत में होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा, जिससे विवाद का समाधान निकाला जा सकेगा.


ज्ञानवापी विवाद का समाधान एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल कानूनी दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. यह प्रक्रिया दोनों समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देने का एक प्रयास है, जिससे भविष्य में ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित किया जा सके. ज्ञानवापी को लेकर 22 मुकदमे कचहरी में लंबित हैं. इनमें से दो प्रमुख मुकदमे ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग को लेकर दाखिल मुकदमे और ज्ञनवापी स्थित व्यास जी के तहखाने के मामले को सुलह-समझौते से हल करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है. इस मामले में मुस्लिम पक्ष के अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एसएम यासिन का कहना है कि वह सुलह-समझौते में शामिल नहीं होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है जिसे मानने की कोई बाध्यता नहीं है. वहीं हिंदू पक्ष के पैरोकार डा. सोहन लाल और वकील दीपक सिंह का कहना है कि वह सुलह-समझौते के लिए जाएंगे और अपनी बात रखेंगे.


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विशेष लोक अदालत में होने वाली सुनवाई का परिणाम न केवल ज्ञानवापी विवाद के लिए, बल्कि पूरे देश में धार्मिक सहिष्णुता और आपसी समझ के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है. सभी पक्षों की सहमति से यदि कोई समाधान निकलता है, तो यह न केवल न्यायालय के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगी। ज्ञानवापी विवाद का समाधान एक नई दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है, जो सभी के लिए लाभकारी हो सकता है.

बीएचयू में स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता, 20 प्रतिभागियों ने रचनाओं से हिंदी और काशी का किया गुणगान
बीएचयू में स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता, 20 प्रतिभागियों ने रचनाओं से हिंदी और काशी का किया गुणगान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में चल रहे हिंदी माह-2026 के तहत शनिवार को विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कार्मिकों के लिए स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। समिति कक्ष में आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी मौलिक कविताओं के माध्यम से हिंदी, भारतवर्ष, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, काशी और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की विशेषताओं का भावपूर्ण वर्णन किया।प्रतियोगिता में कुल 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ करते हुए हिंदी भाषा के प्रति समर्पण और गौरव की भावना व्यक्त की। कविताओं में भारत की विविधता, काशी की सांस्कृतिक विरासत और महामना के योगदान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को महामना के अभूतपूर्व प्रयासों का परिणाम बताते हुए इसे ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखने वाला संस्थान बताया।प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. वशिष्ठ अनूप, डॉ. संजीव सराफ और प्रो. उर्वशी गहलौत शामिल रहे। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की कविताओं, प्रस्तुति और विषयवस्तु के आधार पर मूल्यांकन किया।कार्यक्रम के दौरान हिंदी अधिकारी डॉ. शिव कुमार त्रिपाठी ने निर्णायक मंडल के सदस्यों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश सिंह ने किया, जबकि अंशुमान पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।ALSO READ : सुब्रतो कप में यूपी का दम दिखाएगी वाराणसी की टीमकार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक कुलसचिव विकास कुमार, रामजी त्रिपाठी, कीर्ति शंकर दुबे, रागिब हुसैन और रोहित आनंद का सहयोग रहा।
सुब्रतो कप में यूपी का दम दिखाएगी वाराणसी की टीम
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वाराणसी : मैदान वही होगा, मुकाबला अंतरराष्ट्रीय स्तर का और चुनौती देश-विदेश की टीमों से. ऐसे में वाराणसी के युवा फुटबॉलरों के पास अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मौका है. 65वें सुब्रतो कप इंटरनेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट में विकास इंटर कॉलेज की अंडर-17 बालक टीम उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेगी. नई दिल्ली के अंबेडकर स्टेडियम में 15 सितंबर से शुरू होने वाली प्रतियोगिता के लिए टीम 13 सितंबर को रवाना होगी.प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के लिए विकास इंटर कॉलेज की टीम ने जमकर पसीना बहाया है.शुक्रवार को 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। शिविर में खिलाड़ियों को कोच रशीद अनवर ने प्रशिक्षण दिया। इस दौरान खिलाड़ियों की तकनीक, पासिंग, गोल करने की क्षमता, फिटनेस और मैच की रणनीति पर विशेष जोर दिया गया.चिप शॉट से थ्रू पास तक पर जोरप्रशिक्षण शिविर में खिलाड़ियों को मैच की छोटी-छोटी बारीकियों से रूबरू कराया गया. विपक्षी खिलाड़ी को चकमा देकर चिप शॉट कब और किस स्थिति में लगाना है, इसका विशेष अभ्यास कराया गया. इसके अलावा साइड पास और थ्रू पास के दौरान गेंद की गति, दिशा और समय का ध्यान रखने की तकनीक भी सिखाई गई.मैच के दौरान अगर मुकाबला बराबरी पर खत्म होता है तो पेनल्टी शूटआउट भी निर्णायक हो सकता है. इसे देखते हुए खिलाड़ियों को पेनल्टी शूट लेने की तकनीक के साथ मानसिक रूप से दबाव संभालने का भी अभ्यास कराया गया. टीम प्रबंधन ने संभावित पेनल्टी शूटआउट के लिए खिलाड़ियों की भूमिका और क्रम पर भी तैयारी की है.ALSO READ : पिता की नगरी में विराजेंगे पुत्र गजानन, सोमवार को स्थापित होगी लालबाग के राजा की प्रतिमूर्तिउत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलने से टीम के खिलाड़ियों में खासा उत्साह है. 15 दिन के शिविर के दौरान खिलाड़ियों ने कठिन अभ्यास के साथ टीम गेम पर भी विशेष ध्यान दिया। अब टीम दिल्ली में अपने प्रदर्शन को लेकर तैयार है.विकास एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एके सिंह ने कहा कि टीम ने प्रतियोगिता के लिए पूरी मेहनत की है. हमारा प्रयास है कि खिलाड़ी दिल्ली में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और उत्तर प्रदेश के साथ वाराणसी का नाम भी रोशन करें.
पिता की नगरी में विराजेंगे पुत्र गजानन, सोमवार को स्थापित होगी लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति
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वाराणसी : काशी में एक बार फिर महाराष्ट्र की गणेश भक्ति की झलक देखने को मिलेगी। श्रीकाशी मराठा गणेश उत्सव समिति की ओर से 18वां श्रीगणेश उत्सव सोमवार से ठठेरी बाजार स्थित शेरवाली कोठी में शुरू होगा। पांच दिवसीय उत्सव के पहले दिन मुंबई के सुप्रसिद्ध लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति को मराठी परंपरा के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद स्थापित किया जाएगा। प्रतिमूर्ति रविवार को मुंबई से वाराणसी पहुंचेगी। आयोजन स्थल को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है।सोमवार को सुबह गणेश भगवान की स्थापना और पूजा-अर्चना के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। सुबह और रात नौ बजे महाआरती होगी। शाम छह बजे सुप्रसिद्ध भजन गायिका पूजा पांड्या भजनों की प्रस्तुति देंगी। इसके बाद शाम सात बजे जय पांडेय अपने साथियों के साथ भजन प्रस्तुत करेंगे।15 सितंबर को सुबह महाआरती के बाद शाम पांच बजे फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता और छह बजे 15 वर्ष तक के बच्चों की डांस प्रतियोगिता होगी। 16 सितंबर को शाम पांच बजे चित्रकला, छह बजे मेहंदी प्रतियोगिता और रात आठ बजे कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम होगा। 17 सितंबर को शाम पांच बजे हल्दी-कुमकुम, छह बजे विजय वाल्मीकि ग्रुप की झांकी और शाम 7:30 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज सम्मान समारोह आयोजित होगा।ALSO READ : तिब्बती चिकित्सा ग्लोबल वेलनेस इंडस्ट्री का बनेगी हिस्सा: राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने जताई उम्मीद.18 सितंबर को सुबह नौ बजे महाआरती के बाद दोपहर 12 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी और गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। शोभायात्रा में महाराष्ट्र से आया 80 सदस्यीय दल विशेष प्रस्तुति देगा। समिति के अनुसार छह फीट ऊंची प्रतिमूर्ति मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से तैयार की गई है।समारोह के संचालन के लिए समिति में वरिष्ठ संरक्षक माणिक राव पाटिल, संरक्षक संतोष पाटिल व सुहास पाटिल, अध्यक्ष आनंद राव सूर्यवंशी, महामंत्री अन्ना मोरे, कोषाध्यक्ष हनुमान शिंदे, उपाध्यक्ष रवि सेठ, कार्यक्रम संयोजक चक्रवर्ती विजय नावड़ और मीडिया प्रभारी डॉ. कैलाश सिंह विकास समेत अन्य पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। समिति ने श्रद्धालुओं से पांच दिवसीय गणेश उत्सव में शामिल होने की अपील की है।