ज्ञानवापी मुकदमे को सुलह-समझौते से हल करने को तैयार नहीं मुस्लिम पक्ष...

वाराणसी : ज्ञानवापी विवाद का समाधान विशेष लोक अदालत में करने का सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव निर्देश दिया है. इस मामले में सीधे निर्णय देने के बजाय दोनों पक्षों को मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने को कहा है. इस संदर्भ में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में 14 जुलाई को मध्यस्थता की तारीख निर्धारित की गई है. लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है. वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि वह सुलह-समझौते के लिए तैयार है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तय किया गया है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के वादी और अधिवक्ता सुलह-समझौते के लिए उपस्थित होंगे. इसके बाद 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जहां दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर अपनी बात रखेंगे.
सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद है कि ज्ञानवापी से जुड़े मुकदमे में बातचीत के माध्यम से कोई न कोई समाधान अवश्य निकलेगा. ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों के मध्यस्थता से समाधान के लिए जिला स्तर पर नोटिस जारी किया गया है. ज्ञानवापी से जुड़ी सात पत्रावलियों के संबंध में सभी पक्षों को नौ जुलाई को सूचना दी जा चुकी है. सभी पक्षों को 14 जुलाई को उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है, जहां ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों के साथ-साथ विशेष बिंदुओं पर भी चर्चा की जाएगी. इस प्रक्रिया का उद्देश्य विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना है, जिससे दोनों समुदायों के बीच आपसी समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा मिले। विशेष लोक अदालत में होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा, जिससे विवाद का समाधान निकाला जा सकेगा.
ज्ञानवापी विवाद का समाधान एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल कानूनी दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. यह प्रक्रिया दोनों समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देने का एक प्रयास है, जिससे भविष्य में ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित किया जा सके. ज्ञानवापी को लेकर 22 मुकदमे कचहरी में लंबित हैं. इनमें से दो प्रमुख मुकदमे ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग को लेकर दाखिल मुकदमे और ज्ञनवापी स्थित व्यास जी के तहखाने के मामले को सुलह-समझौते से हल करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है. इस मामले में मुस्लिम पक्ष के अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एसएम यासिन का कहना है कि वह सुलह-समझौते में शामिल नहीं होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है जिसे मानने की कोई बाध्यता नहीं है. वहीं हिंदू पक्ष के पैरोकार डा. सोहन लाल और वकील दीपक सिंह का कहना है कि वह सुलह-समझौते के लिए जाएंगे और अपनी बात रखेंगे.
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विशेष लोक अदालत में होने वाली सुनवाई का परिणाम न केवल ज्ञानवापी विवाद के लिए, बल्कि पूरे देश में धार्मिक सहिष्णुता और आपसी समझ के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है. सभी पक्षों की सहमति से यदि कोई समाधान निकलता है, तो यह न केवल न्यायालय के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगी। ज्ञानवापी विवाद का समाधान एक नई दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है, जो सभी के लिए लाभकारी हो सकता है.



