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गंगा महोत्सव में भक्ति रस की सरिता बहाएंगे हंसराज रघुवंशी, काशी की सांस्कृतिक परंपरा को बनाएंगे भव्य एवं समृद्ध

गंगा महोत्सव में भक्ति रस की सरिता बहाएंगे हंसराज रघुवंशी, काशी की सांस्कृतिक परंपरा को बनाएंगे भव्य एवं समृद्ध
Oct 28, 2025, 09:37 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर भक्ति संगीत, नृत्य व लोक कलाओं की संगीतमय सरिता बहेगी. गंगा के पावन तट पर इस वर्ष गंगा महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवम्बर तक किया जाएगा. योगी सरकार के प्रयास से राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की इस सांस्कृतिक परंपरा को और भव्य बनाएंगे जिनमें शास्त्रीय, भक्ति तथा लोक संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देगा. इस महोत्सव में गायक हंसराज रघुवंशी अपने भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से ओत-प्रोत करेंगे. वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपने लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी. पद्मश्री गीता चन्द्रन का भरतनाट्यम नृत्य भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा. वहीं, नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे.


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कई मायनों में विशिष्ट होगा आयोजन


संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव में गीत, संगीत, नृत्य और वादन की गंगा बहेगी. गंगा महोत्सव के मंच पर लोक और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो साथ ही पारंपरिक नृत्य शैलियों की झलक भी देखने को मिलेगी. महोत्सव में विशेष रूप से गायक हंसराज रघुवंशी आयोजन के अंतिम दिन अपने भजनों से श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाएंगे. वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी 3 नवम्बर को लोक गायन से काशी की धरती पर उत्तर भारत की लोक परंपराओं को सजीव करेंगी. इसके अतिरिक्त, 2 नवम्बर को पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी. गंगा महोत्सव के अंतर्गत होने वाली प्रस्तुतियां शाम 4 बजे से शुरू होंगी.


काशी गंगा महोत्सव ये प्रमुख कलाकार देंगे प्रस्तुति...


प्रथम दिन, 1 नवंबर


पं माता प्रसाद मिश्र एवं पं० रविशंकर मिश्र--कथक युगल नृत्य

कविता मोहन्ती--ओडिसी नृत्य

विदुषी श्वेता दुबे--गायन

विदुषी कमला शंकर--स्लाइड गिटार

डॉ रिपि मिश्र--शास्त्रीय गायन

डॉ दिवाकर कश्यप एवं डॉ० प्रभाकर कश्यप--उपशास्त्रीय गायन

रवि शर्मा एवं समूह--ब्रज लोक नृत्य एवं संगीत

पं नवल किशोर मल्लिक--शास्त्रीय गायन


दूसरा दिन, 2 नवंबर


शिवानी शुक्ला--गायन

प्रवीण उद्भव--तालयात्रा

राजकुमार तिवारी उर्फ राजन तिवारी--गायन

डॉ अर्चना आदित्य महास्कर--गायन

सवीर, साकार कलाकृति--पारम्परिक लोक नृत्य

वन्दना मिश्रा--गायन

प्रो पं० साहित्य नाहर एवं डॉ० पं० संतोष नाहर--सितार एवं वायलिन जुगलबन्दी

ओम प्रकाश--भजन गायन

पद्मश्री गीता चन्द्रन--भरतनाट्यम


तीसरा दिन 3 नवंबर


मीना मिश्रा--गायन

विशाल कृष्ण--कथक नृत्य

दिव्या शर्मा--हिन्दुस्तानी खयाल गायकी

राकेश कुमार--जनजातीय लोक नृत्य

इन्दु गुप्ता--लोक गायन

चेतन जोशी--बांसुरी वादन

विदुषी कविता द्विवेदी--ओडिसी नृत्य

पद्मश्री मालिनी अवस्थी--लोक गायन


चौथा दिन, 4 नवंबर


डॉ शुभांकर डे--गायन

डॉ प्रेम किशोर मिश्र एवं साथी-सितार, सरोद जुगलबन्दी व गायन

राहुल रोहित मिश्र--शास्त्रीय गायन

रूपन सरकार समन्ता--शास्त्रीय गायन

वासुमती बद्रीनाथन--शास्त्रीय गायन

शिवानी मिश्रा--कथक समूह नृत्य

मानसी रघुवंशी--गायन

हंसराज रघुवंशी--भजन गायन.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।