ज्ञानवापी मामले में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई 19 अगस्त को...

वाराणसी: ज्ञानवापी में नए मंदिर बनाने और हिंदूओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने को लेकर वर्ष 1991 में दाखिल मुकदमे में विजय शंकर रस्तोगी को वादमित्र के पद से हटाने की इस मुकदमे में वादी पक्षकार रहे हरिहर पांडेय की तीन पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी,नीलिमा मिश्रा व रेणु पांडेय की प्रार्थना पत्र को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को निरस्त कर दिया था.
इस आदेश के खिलाफ तीनों पुत्रियों की वकील आशीष कुमार श्रीवास्तव ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की. शुक्रवार को इस याचिका की सुनवाई विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में मुकर्रर थी.
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील के उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने 19 अगस्त की अगली तिथि मुकर्रर कर दी.
हरिहर पांडेय की मृत्यु के बाद उनकी तीनों पुत्रियों द्वारा दिवंगत पिता के स्थान पर मुकदमे में पक्षकार बनाने के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में छह अप्रैल 2024 को प्रार्थना पत्र दी गई.
इस प्रार्थना पत्र सुनवाई चल ही रही थी कि तीनों बहनों की ओर से 31 मई 2025 को मुकदमे में नियुक्त वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को उनके पद से हटाने की दूसरी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत की गई.
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तीनों बहनों के वकील आशीष कुमार श्रीवास्तव ने दोनों प्रार्थना पत्रों को एक साथ सुनवाई करने की अदालत से अपील की. सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) भावना भारतीय ने वाद मित्र को हटाने संबंधित प्रार्थना पत्र को पोषणीय न मानते हुए 11 जुलाई को इसे निरस्त कर दिया था.



