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केटीएस 4.0 के तहत 2 से ऐतिहासिक कार रैली, 10 दिसंबर को वाराणसी में होगा समापन

केटीएस 4.0 के तहत 2 से ऐतिहासिक कार रैली, 10 दिसंबर को वाराणसी में होगा समापन
Dec 01, 2025, 11:20 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को दर्शाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ऐतिहासिक कार रैली - ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान (SAVE) - शुरू करने जा रहा है. काशी तमिल संगमम (केटीएस) 4.0 के तहत एक प्रमुख पहल के रूप में यह रैली 2 दिसंबर को तेनकाशी (तमिलनाडु) से शुरू होगी और 10 दिसंबर को वाराणसी में इसका समापन होगा.

इस रैली में लगभग 100 प्रतिभागी और 15-20 कारें शामिल होंगी, जो 2,460 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी. यह पहल पांडियन शासक श्री आदि वीर पराक्रम पांडियन को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक की ऐतिहासिक यात्रा कर पूरे भारत में सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया था. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने भगवान शिव के एक मंदिर का निर्माण कराया था जिसे विश्वनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है. जहां यह मंदिर बना उस जगह का नाम उन्होंने तेनकाशी (दक्षिण काशी) रखा. यह एकता और साझा सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है.


ऐतिहासिक संबंधों और सभ्यतागत जुड़ावों पर डालेंगे प्रकाश


इस ऐतिहासिक कार रैली में चेर, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर काल के ऐतिहासिक संबंधों और सभ्यतागत जुड़ावों पर प्रकाश डाला जाएगा. साथ ही शास्त्रीय तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा और साझी विरासत के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दिया जाएगा. रैली के दौरान एलईडी डिस्प्ले से सुसज्जित एक विशेष वाहन निर्दिष्ट स्थानों पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में शास्त्रीय ग्रंथों और प्राचीन स्थलों को प्रदर्शित करेगा. जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ेगा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लोगों द्वारा इसका स्वागत और अभिनंदन किया जाएगा.

काशी तमिल संगमम 4.0 का थीम, "तमिल सीखें - तमिल करकलम" है. इसका उद्देश्य देश भर में तमिल को बढ़ावा देना, हमारी सांस्कृतिक एकता को उजागर करना, साथ ही शास्त्रीय तमिल ग्रंथों में निहित समृद्ध ज्ञान तक पहुँच को व्यापक बनाना और अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से उनके प्रसार को प्रोत्साहित करना है.


सांस्कृतिक और शैक्षिक संगम


काशी तमिल संगमम का चौथा संस्करण सांस्कृतिक और शैक्षिक संगम है. इसे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है. आईआईटी मद्रास और बीएचयू इसकी कार्यान्वयन एजेंसियां हैं.


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काशी में गूंजेगी वैश्विक संस्कृति की आवाज, BRICS देशों के प्रतिनिधि करेंगे मंथन...
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वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी का अवसर मिला है. 4 और 5 जून को काशी में BRICS देशों के संस्कृति कार्य समूह (संस्कृति कार्य समूह) की दो दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी. यह बैठक शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में होगी, जिसमें BRICS सदस्य देशों और हाल ही में समूह में शामिल हुए देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे.इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे. विदेशी मेहमान विभिन्न समूहों में वाराणसी पहुंचेंगे, जिसके मद्देनजर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं.बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विचार-विमर्श करना और आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत बनाना है. कार्यक्रम के दौरान संस्कृति से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिससे सदस्य देशों के बीच संबंध और अधिक मजबूत हो सकेंगे.बैठक में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के वाराणसी आगमन की भी चर्चा है, हालांकि उनकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस आयोजन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया जा रहा है. एयरपोर्ट से लेकर होटल और प्रतिनिधियों के भ्रमण मार्गों तक सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहेंगी. प्रशासन का प्रयास है कि विदेशी प्रतिनिधियों को काशी की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से भी परिचित कराया जाए.विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS संस्कृति कार्य समूह की यह बैठक वाराणसी को वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. इससे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ काशी की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी नया विस्तार मिलेगा.
बीएचयू में शुरू हुई हाईटेक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं कुलपति ने किया उद्घाटन...
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वाराणसी: विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग में शनिवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी और ‘इम्पार्टिंग हेल्थ एजुकेशन टू कम्युनिटी’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का विषय “अनमास्किंग दि अपील - काउन्ट्रिग निकोटीन एंड टोबैको एडिक्शन” रहा.कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि तंबाकू निषेध जैसे विषयों पर केवल एक दिन का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग विशेषकर युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि धूम्रपान और चबाने वाले तंबाकू दोनों ही कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के प्रमुख कारण हैं.कुलपति ने बताया कि तनाव और मानसिक दबाव से राहत पाने के लिए कई लोग तंबाकू का सहारा लेते हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती है. उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर “तंबाकू छोड़ो अभियान” शुरू करने का सुझाव भी दिया.इस अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग में कई अत्याधुनिक नैदानिक और उपचार सुविधाओं का उद्घाटन किया गया. इनमें क्वांटिटेटिव इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी (QEEG), स्लीप लेबोरेटरी (पॉलीसोमनोग्राफी), इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ECT), ट्रांसक्रैनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (TDCS), रिपीटेटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (RTMS) तथा डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड शामिल हैं.विशेषज्ञों के अनुसार नई सुविधाओं से अवसाद, चिंता, नींद संबंधी विकारों और अन्य न्यूरो-मनोरोग संबंधी समस्याओं के निदान एवं उपचार में मदद मिलेगी. साथ ही अनुसंधान और चिकित्सा प्रशिक्षण को भी नई दिशा मिलेगी.ALSO READ:बरेका पहुंचे रेलवे बोर्ड सदस्य आर राजगोपाल, उत्पादन और नवाचार कार्यों का लिया जायजा...चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. शंखवार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. वहीं चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने धूम्ररहित तंबाकू के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता की जरूरत है.कार्यक्रम में मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. अच्युत कुमार पाण्डेय ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और तंबाकू निषेध को मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. इस दौरान चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
बरेका पहुंचे रेलवे बोर्ड सदस्य आर राजगोपाल, उत्पादन और नवाचार कार्यों का लिया जायजा...
बरेका पहुंचे रेलवे बोर्ड सदस्य आर राजगोपाल, उत्पादन और नवाचार कार्यों का लिया जायजा...
वाराणसी: रेलवे बोर्ड के सदस्य (कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक) आर. राजगोपाल ने शनिवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) का व्यापक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने लोको उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीकी नवाचार और अवसंरचनात्मक विकास से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की निरीक्षण के दौरान बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.आर. राजगोपाल ने लोको फ्रेम शॉप, लोको असेंबली शॉप, ट्रक मशीन शॉप, लोको टेस्ट शॉप और मेन गेज रूम का दौरा कर रेल इंजनों के निर्माण, असेंबली, परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं का अवलोकन किया. उन्होंने उत्पादन प्रणाली और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की.निरीक्षण के अंतिम चरण में उन्होंने अभिकल्प विभाग का दौरा किया, जहां बरेका द्वारा विकसित नई तकनीकों, आधुनिक लोको डिजाइनों और भविष्य की परियोजनाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर आर. राजगोपाल और महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश दिया.इसके बाद महाप्रबंधक सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में बरेका की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बरेका ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक 572 रेल इंजनों का उत्पादन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. साथ ही वर्ष 2026-27 के उत्पादन लक्ष्यों की दिशा में हो रही प्रगति की जानकारी भी साझा की गई.बैठक में अमृत भारत पुश-पुल डब्ल्यूएपी-7 इंजनों के निर्माण, कवच प्रणाली, उन्नत प्रोपल्शन तकनीक, ट्रैक्शन मोटर परीक्षण और आधुनिक निरीक्षण व्यवस्थाओं पर विशेष चर्चा हुई. इसके अलावा निर्यात और गैर-रेलवे ग्राहकों के लिए डीजल इंजनों के निर्माण तथा भविष्य की उत्पादन योजनाओं की भी समीक्षा की गई.हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बरेका में संचालित रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों और प्रस्तावित बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की जानकारी भी दी गई. साथ ही वर्षा जल निकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई.ALSO READ:तपती गर्मी से पुलिसकर्मियों को मिलेगी राहत, ट्रैफिक जवानों को वितरित किए गए एयर कूलिंग हेलमेट और छाते...अपने दौरे के दौरान आर. राजगोपाल ने बरेका द्वारा लोको उत्पादन, गुणवत्ता सुधार, ऊर्जा संरक्षण और ‘मेक इन इंडिया–मेक फॉर द वर्ल्ड’ अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की सराहना की. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखने के लिए प्रेरित करते हुए उनके योगदान के सम्मान में पुरस्कार दिए जाने की घोषणा भी की.