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आखिर इत्ते सालों से खामेनेई कैसे कर रहे ईरान पर कब्जा, जाने राज

आखिर इत्ते सालों से खामेनेई कैसे कर रहे ईरान पर कब्जा, जाने राज
Jan 17, 2026, 11:10 AM
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Posted By Preeti Kumari

ईरान इस वक्त बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. जहां अयातुल्लाह खामेनेई सरकार के खिलाफ कई दिनों से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, हजारों की संख्या में महिलाओं से लेकर युवा तक खुलकर सड़कों पर उतरकर हिंसा प्रदर्शन करने को मजबूर हो चुके हैं, इन विरोध प्रदर्शन में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ भड़के हिंसा प्रदर्शनों के बीच भारतीय नागरिकों को लेकर आई पहली दो वाणिज्यिक उड़ानें बीती रात राजधानी दिल्ली जा पहुंचीं, ईरान से लौटी एक यात्री ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि, प्रदर्शन काफी उग्र थे, आगजनी भी देखी गई, लेकिन शासन समर्थकों की मौजूदगी के बाद भी हालात काबू में नहीं आते नजर आ रहे थे, जो किसी डरावनी स्थिति से कम नहीं.


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हालांकि, ईरान के दुखद हालात को देखते हुए भारतीय सरकार किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार होने के साथ ही अपने नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा करने से बचने की सलाह भी दे चुकी है. वहीं बिगड़ते हालात को खामेनेई के सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने ईरान की स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है. जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप की तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई, जिससे यह माना जा रहा है कि अब ईरान की राजनीति में एक बड़ा तूफान आने वाला है. दूसरी ओर ये भी संकेत मिल रहे कि स्थिति कुछ हद तक शांत हो रही है. क्योंकि ट्रंप ने अपना आक्रामक रुख नरम किया है.


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36 साल से सत्ता को संभालने का क्या है राज


आपको बता दें कि, चार दशक बाद भी अमेरिका और इजराइल को ईरान की मौजूदा व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती लगती है. लेकिन इस व्यवस्था को हिलाना इतना मुश्किल नहीं, क्योंकि इसके मजबूत बुनियाद ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई है, जो 36 साल से भी ज्यादा वक्त से सत्ता को संभाले बैठे हैं. विरोध चाहे जितना भी हो, अंतरराष्ट्रीय दबाव कितना भी बढ़ जाए, पर किसी भी हाल में खामेनेई का सिस्टम इसलिए नहीं डगमगा सकता क्योंकि इसके पास वह ढांचा है जिसे ईरान की असली ताकत माना जाता है.


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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई एक मजबूत राजनीतिक विशेषज्ञ है, इस सरकार की मजबूती का राज ईरान के उस राजनीतिक ढांचे में छिपा है, जिसे समझना थोड़ा मुश्किल तो है पर ईरान की मजबूती पकड़ से कम नहीं हैं. इस ढांचे की शुरुआत 1979 की क्रांति से होती है, जब ईरान में एक अनोखा पद बनाया गया. रहबर-ए-आला, यानी सुप्रीम लीडर. यह सिर्फ राजनीतिक पद नहीं था, बल्कि राष्ट्र का धार्मिक मार्गदर्शक भी माना गया. इसलिए यह पद राष्ट्रपति से कई गुना शक्तिशाली हो गया. सेना, विदेश नीति, खुफिया एजेंसियां, न्यायपालिका, मीडिया. सबके फैसलों की अंतिम मंजूरी सुप्रीम लीडर के हाथ में समा बैठी है.अब सवाल उठता है कि इतनी ताकत किसे मिलती है और किसके पास यह अधिकार है कि वह ईरान का सबसे बड़ा नेता चुन सके.


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जाने कैसे टिकी है खामेनेई की कुर्सी


बड़ी बात तो यह है कि, इस काउंसिल के ज्यादातर सदस्य सीधे या परोक्ष रूप से सुप्रीम लीडर द्वारा ही नियुक्त होते हैं. यानी जो संस्था सुप्रीम लीडर को चुनने वालों को मंजूरी देती है, वह खुद सुप्रीम लीडर के प्रभाव में होती है. इसी वजह से ईरान में सत्ता एक बंद घेरे की तरह काम करती है, जहां बाहर की ताकतों या विरोधी विचारों के लिए बहुत कम जगह बचती है. यही कारण है कि ईरान में सत्ता किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस पूरे ढांचे से चलती है जिसे खामेनेई सरकार ने दशकों में मजबूत बना रखा है, इसलिए उनकी कुर्सी आज भी ईरान की सत्ता में टिकी हुई हैं.

प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने ने किया ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी का उद्घाटन
प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने ने किया ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी का उद्घाटन
वाराणसी : ललित कला काशी 'वर्थ एंड वरशिप' (Worth and Worship) प्रदर्शनी पेश कर रहा है।ललित कला काशी 15 से 17 जुलाई, 2026 तक वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों पर "वर्थ एंड वरशिप" नाम की एक ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी आयोजित की गई है। डॉ. प्रियंका चंद्रा द्वारा क्यूरेट की गई इस अनोखी आउटडोर प्रदर्शनी में दस अवॉर्ड-प्राप्त कलाकार शामिल हैं: सिद्धार्थ, रामकुमार माहेश्वरी, आशिमा मेहरोत्रा, अनिल कुमार पटेल, स्वाति रंजन, दीपशिखा वर्मा, स्वाति झा, शालिनी सिंह, रितेक राज और सूरज वर्मा।इसका भव्य उद्घाटन आज 15 जुलाई को शाम 6 बजे सुबह-ए-बनारस घाट पर मुख्य अतिथि प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने की। इसके बाद यह प्रदर्शनी लोगों तक पहुँचने के लिए तुलसी, आदिनाथ, चेत सिंह और अस्सी घाटों पर जाएगी।ALSO READ: चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़पवित्र गंगा के किनारे, यह एग्ज़िबिशन दस आर्टिस्ट को दुनियावी लालच ("वर्थ") और भगवान की भक्ति ("वर्शिप") के बीच की पतली लाइन को समझने के लिए एक साथ लाती है, जो कुछ समय के लिए और हमेशा रहने वाले के बीच इंसानी संघर्ष को दिखाती है।
चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़
चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़
वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के विजयनगरम मार्केट में संचालित एक चाय की दुकान पर अवैध रूप से शराब और बीयर की बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर सिगरा पुलिस ने छापेमारी कर दुकान से बड़ी मात्रा में शराब और बीयर बरामद की तथा अवैध कारोबार का भंडाफोड़ कर दिया।पुलिस के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि चाय की दुकान की आड़ में चोरी-छिपे शराब और बीयर बेची जा रही है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान दुकान से विभिन्न ब्रांड की शराब और बीयर की बोतलें बरामद हुईं।ALSO READ: बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथनपुलिस ने मौके से दुकान संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बरामद शराब और बीयर को जब्त कर लिया गया है। मामले में आबकारी अधिनियम समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।सिगरा पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथन
बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथन
वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में बुधवार को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), वाराणसी की छमाही बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नराकास के अध्यक्ष एवं बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने की, जिसमें नगर के 60 से अधिक केंद्रीय कार्यालयों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार और डिजिटल माध्यमों में इसके बढ़ते उपयोग पर व्यापक चर्चा की।बैठक में महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं, बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने सदस्य कार्यालयों से हिंदी को सरल, प्रभावी और तकनीक-सम्मत बनाकर अधिकाधिक प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध कथन "निज भाषा उन्नति अहै" का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।इस दौरान नराकास, वाराणसी की पत्रिका 'बनारस दर्पण' तथा आईआईटी-बीएचयू की राजभाषा पत्रिका 'अभ्युदय' का लोकार्पण भी किया गया। बैठक में पिछली कार्यवृत्त की पुष्टि, निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा तथा विभिन्न सदस्य कार्यालयों की राजभाषा संबंधी प्रगति और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने अपने संस्थानों में हिंदी के प्रचार-प्रसार और नवाचारों से जुड़े अनुभव भी साझा किए।ALSO READ: पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह एक और मामले में बरी, 36 साल पुराने प्रकरण का पटाक्षेपपूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी के मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता जनता से उसके जुड़ाव पर निर्भर करती है और हिंदी इस जुड़ाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। वहीं गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के सहायक निदेशक (कार्यान्वयन) अजय कुमार चौधरी ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी के बढ़ते उपयोग तथा सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।बैठक में बरेका के उप महाप्रबंधक सागर, प्राचार्य प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र सुभाष चंद्र यादव सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नराकास के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने किया तथा अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।