ICCRA 2025 - आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के बीच सशक्त साक्ष्य आधारित सहयोग की आवश्यकता

वाराणसी - “कटिंग-एज रिसर्च इन आयुर्वेद: ट्रांसफॉर्मिंग ग्लोबल हेल्थ (ICCRA-2025)” विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनका समापन धन्वन्तरी सभागार, आयुर्वेद संकाय, आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संपन्न हुआ. इस सम्मेलन का आयोजन आयुर्वेद संकाय, आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस), बीएचयू द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश से प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही. इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय कुमार गुप्ता अधिष्ठाता, चिकित्सा संकाय, आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस) ने आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के बीच सशक्त साक्ष्य-आधारित सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि इस प्रकार के अकादमिक मंच समकालीन वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में आईएमएस के निदेशक प्रो. एस. एन. शंखवार ने कहा कि आयुर्वेद को वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, अंतर्विषयक समन्वय एवं परिणाम-आधारित अनुसंधान के माध्यम से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयुर्वेद संकाय की सराहना करते हुए समन्वित स्वास्थ्य शिक्षा एवं अनुसंधान के प्रति बीएचयू की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.

डॉ. सुनील गौतम, निदेशक, जीवक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, रिसर्च सेंटर, अकौनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि ICCRA-2025 आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति का सशक्त प्रमाण है. उन्होंने शोध प्रस्तुतियों की गुणवत्ता की प्रशंसा करते हुए युवा शोधकर्ताओं को शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान को वैज्ञानिक पद्धति से सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया. अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. पी. के. गोस्वामी, अध्यक्ष, ICCRA-2025 ने आयुर्वेद संकाय, आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस), बीएचयू की समृद्ध अकादमिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन आयुर्वेद में अनुसंधान संस्कृति, वैश्विक सहयोग एवं नीति-उपयोगी निष्कर्षों को सुदृढ़ करते हैं.
वैज्ञानिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रो. बी. एम. सिंह ने बताया कि सम्मेलन के दौरान 31 प्लेनरी वक्ताओं के व्याख्यान तथा 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं. उन्होंने कहा कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, बांग्लादेश एवं नेपाल सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता ने सम्मेलन को वास्तविक अर्थों में वैश्विक स्वरूप प्रदान किया.
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समारोह के प्रारम्भ में प्रो. के. एन. मूर्ति ने अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया. वैदिक समारोह का कुशल संचालन डॉ. वैभव जायसवाल एवं डॉ. प्रीति चौहान द्वारा किया गया. इस अवसर पर बेस्ट पेपर अवार्ड, यंग रिसर्चर अवार्ड, प्रशस्ति पत्र एवं एक्सीलेंस अवार्ड्स प्रदान कर उत्कृष्ट अकादमिक योगदान को सम्मानित किया गया. समारोह में आयुर्वेद संकाय, आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस), बीएचयू के वरिष्ठ शिक्षकगण एवं संकाय सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. कार्यक्रम का समापन डॉ. ए. के. द्विवेदी, आयोजन सचिव द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं संस्थागत अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आयोजन की सफलता के लिए सामूहिक प्रयासों की सराहना की.



