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आईआईटी बीएचयू : NIRF 2025 इंजीनियरिंग रैंकिंग में लगातार दूसरी बार टॉप-10 में बनाई जगह

आईआईटी बीएचयू : NIRF 2025 इंजीनियरिंग रैंकिंग में लगातार दूसरी बार टॉप-10 में बनाई जगह
Sep 11, 2025, 12:06 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: बीएचयू के लिए आज एक और गौरव का क्षण है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025 जारी किया, जिसमें आईआईटी बीएचयू ने इंजीनियरिंग श्रेणी में लगातार दूसरी बार देशभर में 10वां स्थान हासिल किया.


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उत्तर प्रदेश के लिए प्रतिष्ठा और गर्व


यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए प्रतिष्ठा और गर्व का विषय है. आईआईटी बीएचयू ने यह स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया है कि वाराणसी केवल आस्था और संस्कृति का ही नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा और शोध का भी राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है.


कैम्पस में उत्सव का माहौल


जैसे ही रैंकिंग की घोषणा हुई, आईआईटी बीएचयू परिसर में छात्रों और शिक्षकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. छात्र-छात्राओं ने इसे अपनी मेहनत और संस्थान के मार्गदर्शन का नतीजा बताया. वहीं शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की उपलब्धि युवा पीढ़ी में शिक्षा और शोध के प्रति नई ऊर्जा भरती है. सोशल मीडिया पर भी आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्र (एलुमनाई) और शिक्षाविद् इस सफलता पर गर्व जता रहे हैं.


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आईआईटी बीएचयू की शैक्षणिक और शोध उपलब्धियां


संस्थान आज देश के चुनिंदा तकनीकी केंद्रों में गिना जाता है.

16 इंजीनियरिंग विभाग जिनमें केमिकल, सिरेमिक, सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, माइनिंग, मेटलर्जी जैसे विषय शामिल हैं. हर साल देश-विदेश से हजारों छात्र यहां दाखिला लेने का सपना देखते हैं. रिसर्च और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए यहां अत्याधुनिक लैब्स और इनोवेशन हब स्थापित किए गए हैं. हाल के वर्षों में यहां से जुड़े कई स्टार्टअप्स ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है.


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डायरेक्टर का बयान: “यह टीमवर्क का परिणाम”


आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. अमित पात्रा ने इस उपलब्धि पर कहा: “यह रैंकिंग केवल एक सम्मान नहीं बल्कि हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है. हमारी फैकल्टी, छात्र और रिसर्च स्कॉलर्स ने मिलकर यह परिणाम हासिल किया है. आने वाले वर्षों में हम वैश्विक रैंकिंग में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएंगे.”


ऐतिहासिक यात्रा: बनारस इंजीनियरिंग कॉलेज से आईआईटी तक


1919: बनारस इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना.


1968: इसे इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बीएचयू नाम मिला.


2012: संस्थान को मिला आईआईटी का दर्जा.


इसके बाद से शिक्षा, शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रोजगार के क्षेत्र में संस्थान ने निरंतर प्रगति की.


टॉप-10 में जगह बनाने की अहमियत


इंजीनियरिंग शिक्षा में आईआईटी बीएचयू का लगातार दूसरी बार टॉप-10 , में रहना कई मायनों में खास है:


1. उत्तर प्रदेश का अकेला IIT जो शीर्ष 10 में अपनी स्थायी जगह बनाए हुए है.


2. इससे प्रदेश में उच्च तकनीकी शिक्षा की छवि मजबूत होती है.


3. वाराणसी जैसे ऐतिहासिक शहर को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के रूप में नई पहचान मिलती है.


4. प्रदेश के हजारों छात्रों के लिए यह एक प्रेरणा है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़े.


छात्रों और विशेषज्ञों की राय


छात्रों का कहना है कि आईआईटी बीएचयू में पढ़ाई के साथ ही रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए खुला माहौल है. कई छात्र यहां से निकलकर गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं. शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि यह उपलब्धि पूर्वी भारत में तकनीकी शिक्षा की नई दिशा तय करती है.


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आगे का लक्ष्य: वैश्विक स्तर पर पहचान


आईआईटी बीएचयू ने यह साबित कर दिया है कि वह शिक्षा, शोध और नवाचार का सशक्त केंद्र है. आने वाले समय में संस्थान का लक्ष्य है—


अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में और बेहतर स्थान हासिल करना. रिसर्च को उद्योगों से जोड़कर “मेक इन इंडिया” अभियान को गति देना. अधिक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर वाराणसी को टेक्नोलॉजी हब बनाना. आईआईटी बीएचयू का लगातार दूसरी बार NIRF इंजीनियरिंग रैंकिंग में टॉप-10 में शामिल होना यह दर्शाता है कि वाराणसी अब सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि शिक्षा और तकनीकी प्रगति का भी केंद्र है. यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली है और उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा की नई पहचान दिलाती है.



33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.