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इसरो और डीआरडीओ के साथ मिलकर आईआईटी बीएचयू आठ मिशन पर करेगा शोध, होगी भर्तियां

इसरो और डीआरडीओ के साथ मिलकर आईआईटी बीएचयू आठ मिशन पर करेगा शोध, होगी भर्तियां
Feb 03, 2026, 08:37 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : आईआईटी, बीएचयू को इसरो और डीआरडीओ के आठ मिशन और उत्पादों पर शोध करने को मंजूरी दी गई है. इसके लिए करीब चार करोड़ रुपये के रिसर्च प्रोजेक्ट आईआईटी बीएचयू को दिए गए हैं. रिसर्च और अध्ययन के विषय स्पेसक्राफ्ट, अंतरिक्ष मिशन, आदित्य एल-1, हाईवे सुरक्षा, स्मार्ट ट्रैफिक आदि होंगे. इसके निष्कर्ष, तकनीक और रिपोर्ट को सरकार या फंडिंग एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा. इसके लिए इसरो ने 1.80 करोड़ रुपये से ज्यादा के सात और डीआरडीओ ने 2.11 करोड़ के एक प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी है. इन रिसर्च प्रोजेक्ट के साथ ही कुल पांच करोड़ के कुल 26 नए प्रोजेक्ट जारी किए गए हैं. इनके लिए बड़े स्तर वैज्ञानिकों और रिसर्चरों की भर्तियां भी होंगी.


इसरो के सबसे बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर स्पेसक्राफ्ट के एक्सपर्ट एजेंट और अंतरिक्ष मिशन के क्रू मेंबर्स को मदद करने के लिए उपकरणों पर शोध किया जाएगा. अभी तक इसरो की ओर से इसकी तकनीक को पूरा करने के लिए दो साल का समय दिया गया है. आईआईटी बीएचयू इसमें एआई आधारित तकनीक बनाएगा. यह क्रू मेंबर्स की समस्याओं का समाधान भी देगा.

इसके अलावा डीआरडीओ ने सिलिकॉन से बेहतर और शुद्ध सिंगल क्रिस्टल तैयार करने के लिए करीब दो करोड़ से ज्यादा का प्रोजेक्ट दिया है. इसके लिए तीन साल की अवधि तय की गई है. ये सिंगल क्रिस्टल सिलिकॉन से ज्यादा ताप झेल सकता है. क्लाउडबिट्ज ने हाइवे सेफ्टी एनालिटिक्स और मॉडलिंग के लिए 25 लाख रुपये और पांच साल का समय दिया है.


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उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी) ने तीन साल के तीन प्रोजेक्ट्स दिए हैं. अर्बन हीट आईलैंड, नैनो वायर आधारित रूम टेंपरेचर उत्पाद, सेमी कंडक्टर डिवाइस और हाईस्पीड ऑप्टिकल कम्युनिकेशन पर रिसर्च कर तकनीक यूपी सरकार को दी जाएगी. इसके अलावा आईडीएपीटी की ओर से छह प्रोजेक्ट के लिए 45 लाख रुपये की फंडिंग की गई है. जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना मंत्रालय ने 61.56 लाख से इलेक्ट्रिक व्हीकल एप्लिकेशन और सीजी पॉवर ने कार्बन सिरेमिक रजिस्टर्स आदि बनाने के लिए एक लाख की फंडिंग की गई है.

पूर्वांचल समेत वाराणसी में मौसम का रुख बदला, गर्मी का दिखने लगा असर
पूर्वांचल समेत वाराणसी में मौसम का रुख बदला, गर्मी का दिखने लगा असर
वाराणसी: पूर्वांचल सह‍ित वाराणसी में मौसम का रुख अब तल्‍ख होने लगा है. इसके चलते अब धीरे धीरे वातावरण में गर्मी का रुख प्रभावी होता जा रहा है. मौसम व‍िभाग के अनुमानों के अनुसार अब ठंडक का असर बीत चुका है. मौसम का रुख बदलेगा और वातावरण में गर्मी का रुख धीरे धीरे प्रभावी होने लगा है वह अब सप्‍ताह भर के बाद प्रभावी हो जाएगा. मौसम व‍िभाग ने हालांक‍ि इस पूरे सप्‍ताह मौसम के रुख में कुछ खास बदलाव होने का अनुमान नहीं है. मौसम व‍िभाग की ओर से जारी सैटेलाइट तस्‍वीरों में बादलों की सक्र‍ियता भी अब नहीं है.वातावरण में गर्मी का घुलने लगा असर शन‍िवार की सुबह वातावरण में हल्‍की ठंंडक और कुछ बदली की सूरत बनी हुई थी लेक‍िन सूरज का ताप सात बजे के बाद से प्रभावी होना शुरू होने के बाद वातावरण में गर्मी का असर घुलने लगा. मौसम व‍िभाग के अनुमानों के अनुरूप ही हवाओं का रुख भी कुछ सुस्‍त रहा. हालांक‍ि दि‍न में सतही हवाओं के चलने का अनुमान है. फगुआ हवाओं का रुख दोपहर में ही प्रभावी हो रहा है. माना जा रहा है क‍ि आने वाले सप्‍ताह के बाद पछुआ का जोर भी पूरी तरह से थमने के साथ पुरवा का जोर नजर आने लगेगा.यह भी पढ़ें: अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी की महिलाएं दे रहीं आत्‍मर्निरता की नई मिसालबीते चौबीस घंटों में अध‍िकतम तापमान 32.3°C दर्ज क‍िया गया जो सामान्‍य से 1.7 ड‍िग्री सेल्‍स‍ियस अध‍िक रहा. न्‍यूनतम तापमान 17.8°C दर्ज क‍िया गया जो सामान्‍य से 3.0 ड‍िग्री अध‍िक रहा. आर्द्रता इस दौरान न्‍यूनतम 49% और अध‍िकतम 74% दर्ज क‍िया गया. मौसम व‍िभाग की ओर से जारी सैटेलाइट तस्‍वीरों के अनुसार पूर्वांचल में आसमान साफ है और वातावरण का रुख शुष्‍क हो चला है. वातावरण में आर्द्रता और तापमान में इजाफा होने पर बादलों की सक्र‍ियता का रुख दोबारा हो सकता है. माना जा रहा है क‍ि आने वाले द‍िनों में मौसम का रुख बदल भी सकता है.
अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी की महिलाएं दे रहीं आत्‍मर्निरता की नई मिसाल
अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी की महिलाएं दे रहीं आत्‍मर्निरता की नई मिसाल
वाराणसी: महिला सशक्‍तीकरण की दिशा में काशी की महिलाएं अग्रसर हैं. इसी परिप्रेक्ष्‍य में महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. मिर्जामुराद क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रही हैं. गैर सरकारी संस्‍था लोक समिति से जुड़ी इन महिलाओं ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अपने बच्चों को पढ़ाकर अफसर बनाने के संकल्प के साथ ई-रिक्शा चलाने का जिम्‍मा अपने कंधों पर लिया है.आराजी लाईन क्षेत्र की सीता, शारदा, अनीता और सुमन ने ई-रिक्शा चालक बनकर यह साबित कर दिया है कि मेहनत और हौसले के बल पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं. उनका यह कदम न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है. इस निर्णय में उनके पति और परिवार के अन्य सदस्यों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है.यह भी पढ़ें: अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए VIP व्‍यवस्‍थापिलोरी गांव की शारदा ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर बड़े अधिकारी बनें. इसी उद्देश्य से उन्होंने यह काम शुरू किया है और अपनी आय का अधिकांश हिस्सा बच्चों की पढ़ाई में खर्च करेंगी. बेनीपुर गांव की अनीता ने बताया कि घर की आर्थिक तंगी के चलते वह बहुत परेशान थीं, लेकिन लोक समिति स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया.शुरू में उन्हें गाड़ी चलाने में डर लगता था, लेकिन अब वह निडरता से गाड़ी चला लेती हैं, जिससे उन्हें बहुत हिम्मत मिली है. हरसोस गांव की सीता ने बताया कि आंगनवाड़ी बच्चों को गाड़ी से खाना पहुंचाने में उन्हें बहुत अच्छा लगता है, जिससे प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी ई-रिक्शा चलाने के लिए उत्साहित हैं.ई-रिक्शों के माध्यम से बढ़ी रोजगार लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने बताया कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में कार्यरत सामाजिक संस्था लोक समिति को जोमैटो फीडिंग इंडिया की ओर से चार नए ई-रिक्शा उपहार स्वरूप प्राप्त हुए हैं. इन ई-रिक्शों के माध्यम से जनता रसोई घर में कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बेनीपुर और कुरौना सेक्टर के 11 गांवों के 78 आंगनबाड़ी केंद्रों तक प्रतिदिन लगभग 2000 बच्चों के लिए नाश्ता और भोजन पहुंचा रही हैं. उन्होंने बताया कि कुछ माह पूर्व फीडिंग इंडिया के सीईओ अजीत सिंह लोक समिति आश्रम नागेपुर आए थे, जहां उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित कम्यूनिटी किचन के कार्यों की सराहना की थी. उसी दौरान उन्होंने महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था.यह भी पढ़ें: अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए VIP व्‍यवस्‍थाइसके बाद आशा ट्रस्ट और लोक समिति के सहयोग से महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया गया. ग्रामीण क्षेत्र में पहली बार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर बच्चों तक भोजन पहुंचाने का कार्य कर रही हैं. समूह की महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में सहयोग के लिए फीडिंग इंडिया का आभार व्यक्त किया.
अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए VIP व्‍यवस्‍था
अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए VIP व्‍यवस्‍था
वाराणसी: काशी विश्‍वनाथ धाम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस बार 8 मार्च 2026 को सभी महिलाओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है. इस विशेष व्यवस्था के अंतर्गत द्वार संख्या 4-बी से सभी महिलाओं को, चाहे वे काशी की निवासी हों या बाहर से आई हों, निःशुल्क प्रवेश प्रदान किया जाएगा. इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा.मंदिर के अधिकारी विश्‍व भूषण मिश्र ने बताया कि इस व्यवस्था में गोद में बच्चों को लिए हुए सभी महिलाओं (चाहे बालक हो या बालिका) को प्राथमिकता दी जाएगी. इन महिलाओं को विशेष रूप से दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके लिए किसी प्रकार का टिकट या शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे सभी माताएं और महिलाएं बिना किसी बाधा के भगवान के दर्शन कर सकें. उल्लेखनीय है कि प्रातःकाल 4:00 से 5:00 बजे तथा सायंकाल 4:00 से 5:00 बजे तक का समय काशीवासियों के लिए आरक्षित रहेगाृ. इस दौरान पूर्ववत विशेष दर्शन व्यवस्था यथावत जारी रहेगी. शेष समय में सभी महिलाओं के लिए द्वार संख्या 4-बी से यह विशेष प्रवेश व्यवस्था उपलब्ध रहेगी, जिससे वे आसानी से दर्शन कर सकें.यह भी पढ़ें: केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेजइस बाबत काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से यह कामना की गई है कि भगवान विश्वनाथ की कृपा एवं मातृशक्ति का आशीर्वाद संपूर्ण मानवता तथा भगवान शिव के सभी भक्तों पर सदैव बना रहे. इस विशेष अवसर पर मंदिर न्यास समस्त मातृशक्ति, सनातन धर्मावलंबियों एवं भगवान विश्वनाथ के सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना करता है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह विशेष आयोजन महिलाओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक माना जा रहा है.