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प्रधानमंत्री के आने की आहट, तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन ने विभागों से परियोजनाओं की मांगी सूची

प्रधानमंत्री के आने की आहट, तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन ने विभागों से परियोजनाओं की मांगी सूची
Feb 03, 2026, 08:25 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में शिवरात्रि के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आ सकते हैं. इस संभावित आगमन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तैयारियों की सूचना है. विभिन्न विभागों से उन योजनाओं और परियोजनाओं की सूची मांगी गई है, जिनका शिलान्यास या लोकार्पण प्रधानमंत्री द्वारा किया जा सकता है. इस दौरे के दौरान काशी को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात मिलने की संभावना है.


इन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास संभावित


तैयार की गई सूची में सिग्नेचर रेल रोड ब्रिज, सोलर पार्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), नई सड़कें, फ्लाईओवर, ग्रामीण एवं शहरी कनेक्टिविटी से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, कमिश्नरी परिसर में मंडलीय एकीकृत कार्यालय भवन, नगर निगम का नया सदन, रामनगर क्षेत्र में वृद्धाश्रम एवं वर्किंग वूमेन हॉस्टल का शिलान्यास भी संभावित है. ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सर्किट हाउस परिसर में प्रदेश का पहला साइलेंट सब स्टेशन स्थापित किए जाने की तैयारी है.

लोक निर्माण विभाग की कई सड़क परियोजनाएं, एनएचएआई के हाईवे प्रोजेक्ट, जिला अस्पतालों में डे-केयर सेंटर तथा बनारस रेलवे स्टेशन पर प्रस्तावित तीसरी रेल लाइन के शिलान्यास को भी इस एजेंडे में शामिल किया गया है. माना जा रहा है क‍ि रोपवे की पर‍ियोजना भी इसमें शाम‍िल हो सकती है.


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दे सकते हैं सौगात


जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं की सूची तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी, ताकि दौरे के दौरान विकास कार्यों का व्यापक कार्यक्रम सुनिश्चित किया जा सके. अभी यह प्रारंभ‍िक स्‍तर पर ही है। माना जा रहा है क‍ि श‍िवरात्रि‍ से होली के बीच पीएम का दौरा हो सकता है. प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा काशी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो न केवल विकास की नई राह खोलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा. इस दौरे में शामिल होने वाली परियोजनाओं का चयन स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी आवश्यक विकास कार्य समय पर पूरे हों.

वाराणसी में खाड़ी युद्ध की समाप्ति के लिए रखा उपवास, समाजिक संगठनों ने किया धरना-प्रदर्शन
वाराणसी में खाड़ी युद्ध की समाप्ति के लिए रखा उपवास, समाजिक संगठनों ने किया धरना-प्रदर्शन
वाराणसी: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में साझा संस्कृति मंच के आह्वान पर आज अम्बेडकर पार्क, कचहरी में सात मार्च शनिवार की सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक एक दिवसीय मौन उपवास और धरना आयोजित किया गया. कार्यक्रम में शहर के सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों और नागरिकों ने भाग लिया.आयोजन के उद्देश्य के सन्दर्भ में मंच द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि ओमान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता के बीच, युद्ध की घोषणा किए बिना, ईरान पर की गई एकतरफा सैन्य कार्रवाई, वहां के राष्ट्रीय एवं धार्मिक नेता की हत्या तथा एक स्कूल और अस्पताल पर हमले में डेढ़ सौ से अधिक छोटी बच्चियों की मौत मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.ट्रंप कार्रवाई से बड़ा खतराअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इज़राइल द्वारा की गई इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है. वक्तव्य में वेनेज़ुएला के खिलाफ एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप और राजनीतिक दबाव की भी आलोचना की गई और कहा गया कि ग्रीनलैंड पर कब्जे, पनामा नहर पर नियंत्रण, कनाडा को अमरीका का “51वाँ राज्य” बनाने तथा गाजा को “अमेरिकी रिविएरा” बनाने जैसी धमकियाँ अमेरिका की अलोकतांत्रिक और अधिनायकवादी नीतियों को दर्शाती हैं.मंच ने यह भी कहा कि भारत पर अमेरिकी दबाव, जैसे रूसी तेल आयात रोकने की मांग, व्यापार समझौतों में टैरिफ की धमकी तथा 200 प्रतिशत टैरिफ की चेतावनी देकर भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का दावा, साम्राज्यवादी दबाव की श्रृंखला का हिस्सा है. ऐसे दबावों के सामने भारत सरकार का कमजोर रुख देश की स्वतंत्र विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता के लिए हानिकारक है.भारत का स्वतंत्रता संग्राम साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्षसाझा संस्कृति मंच ने कहा कि महात्मा गांधी और पंडित नेहरू के नेतृत्व में चला भारत का स्वतंत्रता संग्राम साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष, विविधता में एकता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक रहा है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 भी अंतरराष्ट्रीय शांति, न्यायपूर्ण संबंध और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को बढ़ावा देने का निर्देश देता है. मंच ने अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए युद्ध तत्काल रोकने और विश्व में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने की अपील की है. मंच के अनुसार रमज़ान के पवित्र महीने में जब दुनिया के एक हिस्से में खून-खराबा हो रहा है, तब वाराणसी के लोग सद्भाव और भाईचारे का संदेश देते हुए शांति की प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए.यह भी पढ़ें: शारीरिक अक्षमता के बाद समाज में स्‍थान हासिल करने वाली काशी की महिलाओं का सम्‍मानकार्यक्रम में कई लोग हुए शामिलइस कार्यक्रम में मुख्य रूप से फादर आनंद, जागृति राही, रामधीरज, रामजन्म, सतीश सिंह, डॉ आनंद प्रकाश तिवारी, रामजी प्रसाद गुप्ता, विशाल तिवारी,राजेन्द्र प्रसाद,सिस्टर फ़्लोरिन, गीता देवी, सिस्टर मैरी, ममता, धन्नजय, महेंद्र राठौर, जितेंद्र यादव, अनिल कुमार, रवि शेखर, एकता सिंह, नीति, अनामिका,मोहम्मद आसिम, प्रेम नट,कृष्णा, दिव्यांश,रुम्मान, सुनीता, सारा,एडवेकेट अबु हाशमी, एडवोकेट लोकेश कुमार सिंह, अशोक सिंह, जुबेर खान बागी, सुरेंद्र चरन,राजकुमार गुप्ता, सूर्य बली राम,एडवोकेट अब्दुला खालिद आदि लोग शामिल रहे.
शारीरिक अक्षमता के बाद समाज में स्‍थान हासिल करने वाली काशी की महिलाओं का सम्‍मान
शारीरिक अक्षमता के बाद समाज में स्‍थान हासिल करने वाली काशी की महिलाओं का सम्‍मान
वाराणसी: काशी विद्यापीठ ब्‍लाक रोड शिवदासपुर स्थित संत नारायण पुनर्वास संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को दिव्यांग होने के बावजूद भी अपने प्रेरणा दायी जीवन से समाज में मिसाल पेश करने वाली काशी की पांच दिव्यांग महिलाओं का सम्मान में किया गया. इन सभी दिव्यांग महिलाओं को अंगवस्त्रं एवं स्मृति चिन्ह देखकर सम्मानित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य दिव्यांग बंधु डॉक्टर उत्तम ओझा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज हमने जिन महिलाओं का सम्मान किया है, निश्चित रूप से इन्होंने समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है.शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी लगन मेहनत परिश्रम और निष्ठा के बल पर वह स्थान हासिल किया है जो कि हम सबके लिए एक प्रेरणादाई है. उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए तथा हम सबको समझ ही तो देश हित में कार्य करना चाहिए. कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए डॉ. डीबी मिश्रा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इन महिलाओं का सम्मान करके हम खुद सम्मानित हो रहे हैं. ऐसी महान विभूतियों का सम्मान करना हम सबके लिए गर्व है और उनकी प्रेरणादाई जीवन से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए.इन पांच महिलाओं का सम्मान 1. डॉ. मंगला कपूर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित, भारत में पहली एसिड अटैक की शिकार दिव्यांग महिला एवं राज्य स्तरीय तथा अनेक पुरस्कार प्राप्त उनके जीवन पर फिल्म बन चुकी है. वह बीएचयू में संगीत विभाग की अध्यक्ष भी रहीं.2. आरती टंडन सेवानिवृत शिक्षक 2001 में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यपाल आचार्य विष्णु कांत शास्त्री से सम्मानित, 2005 में राष्ट्रपति अब्दुल एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मानित.3. सविता सिंह 2011 में राज्य सरकार से सम्मानित 2015 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित. 2025 में वियतनाम में अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मान से सम्मानित.4. डॉ नीतू टहलनी राज्य पुरस्कार से सम्मानित एवं शिक्षक तथा बीएचयू से हिंदी में डॉक्टरेट.5. जाह्नवी चतुर्वेदी संगीत के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त नाम और छात्र.यह भी पढ़ें: टी20 फाइनल: भारतीय टीम के वर्ल्‍डकप फतह के लिए गंगा पूजन, जीत के लिए की कामनाकार्यक्रम का संचालन राकेश पांडेय द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन अरविंद चक्रवाल ने किया. इस अवसर पर डॉक्टर संजय चौरसिया, मदन मोहन वर्मा, राजीव टंडन, विभा चतुर्वेदी, डॉक्टर कल्पना दुबे, डॉक्टर डी के मिश्रा,नितिन, आस्था आदि उपस्थित थे.
टी20 फाइनल: भारतीय टीम के वर्ल्‍डकप फतह के लिए गंगा पूजन, जीत के लिए की कामना
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वाराणसी: टी-20 क्रिकेट वर्ल्‍ड कप का खुमार पूरे देश में देखने को मिल रहा है. महादेव की नगरी काशी में इसको लेकर विशेष उत्‍साह देखा जा रहा है. होली के बाद उत्सव का रंग केवल क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूम रहा है. इसी परिप्रेक्ष्‍य में काशी में विभिन्न आयोजनों का सिलसिला जारी है, जिसमें भारत की जीत की कामना की जा रही है. अहमदाबाद में रविवार को होने वाले टी-20 विश्वकप के फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की जीत की कामना के लिए अहिल्याबाई घाट पर लोगों ने बटुकों के संग मां गंगा का विधिपूर्वक पूजन और दुग्‍धाभिषेक किया. बटुकों ने गंगा किनारे बैट, पोस्टर और शंख के साथ भारत की जीत की कामना की. इस अवसर पर सभी भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी गईं.काशी के इस आयोजन में बटुकों ने एकजुट होकर क्रिकेट के प्रति अपने प्रेम और समर्थन का प्रदर्शन किया. गंगा के तट पर बटुकों ने अपने हाथों में बैट और पोस्टर लेकर भारत की जीत के लिए प्रार्थना की, जिससे यह संदेश गया कि काशी के लोग अपने देश के खिलाड़ियों के प्रति कितने समर्पित हैं.यह भी पढ़ें: वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में कवरेज को लेकर हंगामा, गार्ड और मीडिया कर्मियों के बीच झड़पइस आयोजन में शामिल बटुकों ने गंगा में स्नान करने के बाद पूजा की और सभी ने मिलकर भारत की विजय की कामना की. इस प्रकार के आयोजनों से न केवल खेल के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि भारत में माहौल भी बनाता है. काशी में क्रिकेट के प्रति यह जुनून दर्शाता है कि कैसे खेल ने लोगों को एकजुट किया है और उन्हें एक साझा लक्ष्य की ओर प्रेरित किया है.टी-20 विश्वकप का फाइनल मुकाबलाटी-20 विश्वकप का यह फाइनल मुकाबला भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा. काशी के लोग इस मैच को लेकर बेहद उत्साहित हैं और सभी की यही कामना है कि भारत इस मुकाबले में विजय प्राप्त करे. बटुकों की यह पूजा और अभिषेक इस बात का प्रमाण है कि काशी के लोग अपने देश के खिलाड़ियों के प्रति कितने समर्पित हैं और वे उनकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.