आईआईटी बीएचयू के प्रो. प्रांजल चंद्र को मिला इलेक्ट्रोकेमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया-मेट्रोहम नेशनल अवार्ड 2026

वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बीएचयू के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं कोऑर्डिनेटर प्रो. प्रांजल चंद्र, एफएनएएससी को इलेक्ट्रोकेमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया-मेट्रोहम नेशनल अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान उन्हें 29 अगस्त को भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
प्रो. प्रांजल चंद्र को यह पुरस्कार इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर, नैनोबायोइंजीनियरिंग और उन्नत सेंसिंग तकनीकों के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए दिया गया है। उनके शोध का उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक नवाचारों को व्यावहारिक तकनीकों में बदलकर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में उपयोगी समाधान विकसित करना है।
प्रो. चंद्र की प्रयोगशाला में आईआईटी बीएचयू के पेटेंट के अंतर्गत कई पेटेंटेड और ट्रांसलेशनल तकनीकों, नवीन डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उन्नत सेंसिंग उपकरणों का विकास किया गया है। इन तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को वास्तविक जीवन की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।
पुरस्कार समारोह के दौरान प्रो. प्रांजल चंद्र ने आईआईएससी बेंगलुरु के प्रतिष्ठित जेएन टाटा ऑडिटोरियम में नेशनल अवार्ड लेक्चर भी दिया। इस दौरान उन्होंने अपने शोध कार्यों के साथ-साथ इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसिंग, नैनोबायोइंजीनियरिंग और उन्नत सेंसिंग तकनीकों में हो रहे नवीनतम विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पाट्रा ने प्रो. प्रांजल चंद्र को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आईआईटी बीएचयू में किए जा रहे उच्च स्तरीय और समाजोपयोगी अनुसंधान को दर्शाती है। साथ ही, अनुसंधान, नवाचार और तकनीक के व्यावहारिक उपयोग के क्षेत्र में संस्थान की प्रतिष्ठा को और मजबूती प्रदान करती है।
प्रो. प्रांजल चंद्र की यह उपलब्धि स्वास्थ्य, डायग्नोस्टिक्स और उन्नत सेंसिंग तकनीकों के क्षेत्र में आईआईटी बीएचयू में हो रहे अनुसंधान एवं नवाचार की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान को भी रेखांकित करती है।



