आईआईटी बीएचयू में आकाशगंगा क्लाउड डिजिटल वेबसाइट लॉन्च, ये है खासियत

वाराणसी : आईआईटी बीएचयू द्वारा अपने रिसर्च और वैज्ञानिक प्रगति को बेहतर करने के लिए आकाशगंगा क्लाउड वेब पोर्टल की शुरुआत की गई. इसे अमेजॉन वेब सर्विसेज साइनक्रोन और अमेरिका स्थित आईआईटी बीएचयू एलुमनी फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल कई वर्षों तक होगा. आकाशगंगा क्लाउड आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग की ओर से संचालित किया जाएगा. एडब्ल्यूएस की स्केलेबल, सुरक्षित और टिकाऊ क्लाउड सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे. इससे प्रोफेसरों और छात्रों का डेटा सुरक्षित रहेगा.

समाज और विज्ञान से जुड़े बड़े स्तर के प्रोजेक्ट्स को नवाचार तक पहुंचाने में बेहतर डिजिटल सपोर्ट मिलेगा. सोमवार को इस शुभारंभ के दौरान आईआईटी बीएचयू के विशिष्ट पूर्व छात्र और ग्लोबल क्लाउड इकोसिस्टम के प्रमुख सुदीप जॉन, साइनक्रोन के सीईओ फैसल हुसैन, निदेशक प्रो. अमित पात्रा और एलुमनी फाउंडेशन यूएसए के अध्यक्ष सागर भीमावरापु आदि मौजूद रहे.
छात्रों और प्रोफेसरों को मिलेगा एक्सेस
आकाशगंगा क्लाउड वेब पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ के बाद आईआईटी के निदेशक प्रो. पात्रा ने कहा कि यह डेडीकेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म छात्रों और संकाय सदस्यों को हाईटेक क्लाउड संसाधनों तक सहज पहुंच प्रदान करेगा. इससे अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा. बताया कि आकाश क्लाउड की असीम संभावनाओं का प्रतीक है, जबकि गंगा निरंतर प्रवाह, संपर्क और ज्ञान और नवाचार के सतत आदान-प्रदान का प्रतिनिधित्व करती है. क्लाउड अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा. उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत कर अगली पीढ़ी के क्लाउड-सक्षम समाधानों को विकसित करेगा.
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पूर्व छात्र के पांच करोड़ से बना नया भवन
आईआईटी बीएचयू के पुराने छात्र ने पांच करोड़ से परिसर में नरेश सी. जैन स्कूल ऑफ डिसीजन साइंसेज एंड इंजीनियरिंग के नए भवन को बनवाया. इस भवन का उद्घाटन निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा और अमेरिका फाउंडेशन के सीईओ सागर भीमरावरापु ने किया. यह भवन स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के सामने तैयार कराया गया है. स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के समन्वयक प्रो. प्रभाष भारद्वाज ने बताया कि पूर्व छात्र नरेश सी. जैन (मैकेनिकल इंजीनियरिंग, 1967 बैच) ने आईआईटी बीएचयू फाउंडेशन को पांच करोड़ का दान दिया था, उसी राशि से ये भवन बनकर तैयार हो पाया है. नरेश सी. जैन नासा के मून रोवर प्रोजेक्ट में कार्य कर चुके हैं.



