IITBHU में पहली बार मनाया गया संस्थान दिवस 'उत्थान', स्थापना के 14 वर्ष पूरे...

वाराणसी : आईआईटी का दर्जा प्राप्त करने के 14 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आईआईटी बीएचयू ने सोमवार को पहली बार अपना संस्थान दिवस 'उत्थान' के रूप में उत्साह के साथ मनाया. इस अवसर पर तमाम आयोजन में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में संस्थान की भूमिका को देखने वाले 88 सेटअप लोगों को दिखाने के लिए लगाए गए थे. कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा सेना के अधिकारियों ने भाग लेकर इसे यादगार बनाया. संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने अपने संबोधन में कहा कि 'उत्थान' केवल एक समारोह नहीं, बल्कि आईआईटी बीएचयू की परिवर्तन, उत्कृष्टता और सामाजिक उत्तरदायित्व की निरंतर यात्रा का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, पूर्व छात्रों, उद्योग और समाज के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करने का माध्यम बनेगा. साथ ही संस्थान द्वारा अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करेगा.
नागरिक-सैन्य सहयोग का अनूठा उदाहरण
संस्थान दिवस का सबसे बड़ा आकर्षण 39 जीटीसी द्वारा प्रस्तुत उन्नत ड्रोन तकनीक का सजीव प्रदर्शन रहा. नागरिक-सैन्य सहयोग को नई दिशा देने वाले इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने आधुनिक रक्षा अभियानों में उपयोग होने वाली अत्याधुनिक मानवरहित प्रणालियों को करीब से देखा और उनकी कार्यप्रणाली को समझा.
सेना के विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार के ड्रोन की तकनीकी क्षमताओं, उनकी निगरानी, टोही, सूचना संग्रह, लक्ष्य पहचान तथा सामरिक अभियानों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की विस्तृत जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन तकनीक आधुनिक युद्ध की दिशा तय कर रही है और भारत भी इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

छात्रों को मिला रक्षा अनुसंधान से जुड़ने का अवसर
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को रक्षा क्षेत्र में हो रहे अत्याधुनिक तकनीकी विकास से परिचित कराना तथा उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रेरित करना था. सेना के अधिकारियों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उनके सवालों के उत्तर दिए और रक्षा प्रौद्योगिकी, स्वदेशी अनुसंधान तथा भविष्य में उपलब्ध करियर एवं शोध की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की.
छात्रों ने ड्रोन संचालन, उसकी तकनीकी संरचना और वास्तविक परिस्थितियों में उसके उपयोग को लेकर विशेष उत्सुकता दिखाई. विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य के युद्धों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, सीमा सुरक्षा, निगरानी और राहत कार्यों में भी ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान 'साथ मिलकर नवाचार, सुरक्षित कल की ओर' विषय को केंद्र में रखते हुए सेना और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया. अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने, उन्हें अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों से जोड़ने तथा स्वदेशी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ता सहयोग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा तथा देश को रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा.
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महान संस्थानों की पहचान उनकी परंपराओं से होती है
इस अवसर पर आईआईटी बीएचयू के वरिष्ठ धातु विज्ञानी प्रो. श्रीकांत लेले ने कहा कि किसी भी महान शिक्षण संस्थान की पहचान केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि उसकी समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों तथा उन महान विभूतियों के सम्मान से भी होती है जिन्होंने संस्थान के विकास में अमूल्य योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि संस्थान की गौरवशाली विरासत ही आने वाली पीढ़ियों को उत्कृष्टता और नवाचार के लिए प्रेरित करती है.



