बीएचयू में भारतीय ज्ञान परंपरा और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

वाराणसी: 11 अगस्त। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में ‘भारतीय ज्ञान परंपराएँ और पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन: वैश्विक परिप्रेक्ष्य एवं समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। 10 से 12 अगस्त तक आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ की ओर से स्पॉन्सर्ड रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी सेल (SRICC), बीएचयू के वित्तीय सहयोग से किया जा रहा है।
सम्मेलन का समन्वय पं. दीनदयाल उपाध्याय चेयर के समन्वयक प्रो. तेज प्रताप सिंह कर रहे हैं। सम्मेलन में प्लेनरी एवं तकनीकी सत्रों के साथ पैनल चर्चाएं और युवा प्राध्यापकों तथा शोधार्थियों की ओर से शोध-पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में एकात्म मानववाद, अंत्योदय, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, भारतीय ज्ञान प्रणाली, सभ्यतागत दृष्टिकोण, हरित राजनीति, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, जनसांख्यिकीय लाभांश और भारतीय प्रवासी समुदाय जैसे समकालीन एवं महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
वक्ताओं ने भारतीय बौद्धिक परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और सभ्यतागत पहचान को वैश्विक संदर्भ में समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय जैसे विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई।
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सम्मेलन में प्रो. प्रवेश भारद्वाज, प्रो. अलका रानी गुप्ता, प्रो. अभिनव शर्मा, प्रो. मनोज मिश्रा, प्रो. जे. पी. सिंह, प्रो. संजय झा, प्रो. अमित धोलकिया, डॉ. वी. रामनाथन, प्रो. रंजन त्रिपाठी और प्रो. अनीसुर रहमान सहित कई शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन ने भारतीय ज्ञान परंपरा, समकालीन वैश्विक चुनौतियों और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन के बीच संबंधों पर अंतर्विषयी अकादमिक संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।



