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बनारस की बुनकरी को दिलाई नई पहचान तभी मिल रहा श्रीभास चंद्र को सम्मान

बनारस की बुनकरी को दिलाई नई पहचान तभी मिल रहा श्रीभास चंद्र को सम्मान
Aug 05, 2026, 02:17 PM
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Posted By gagan arora


वाराणसीः सदियों पुरानी बनारस की बुनकरी लुप्त न हो जाए इसलिए श्रीभास चंद्र सुपकार ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. इसका सुखद परिणाम रहा कि बनारस की हैंडलूम कला को नई पहचान मिली और आज इसे पूरी दुनिया पसंद रही है. श्रीभास चंद्र के इस मेहनत को सरकार ने भी स्वीकार किया और उन्हें सम्मान दिया. उन्हें एक बार फिर सम्मान देते हुए राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस पर सात अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.

गांडीव डिजिटल से बात करते हुए बनारस के हुकुलंग में रहने वाले टेक्सटाइल डिजाइनर श्रीभास चंद्र सुपकार बताते हैं कि हैंडलूम से जुड़ाव उनका बचपन से रहा है.


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पिता यदुनाथ सुपकार भी हैंडलूम टेक्सटाइल डिजाइनर थे. शांति निकेतन के फाइन आर्ट की पढ़ाई पूरी करने बाद वर्ष 1959 बनारस आए और यहां के होकर रह गए. उन्होंने अपनी डिजाइन की बदौलत सदियों पुरानी बनारस की हथकरघा की बुनकरी की कला को नया रूप दे दिया.

इसी परिवेश में श्रीभास चंद्र की परवरिश हुई इसलिए वह बनारस की बुनकरी से भली भांति परिचित थे. उसकी दुश्वारियां को भी अच्छे से समझते थे. युवा होने पर उन्होंने पिता के काम को आगे बढ़ाना तय किया और खुद भी टेक्सटाइल डिजाइनर बन गए. उनके पिता ने जो बीड़ा उठाया था उसे निभाने की ठानी और बनारस की बुनकरी को दुनिया तक पहुंचाने की जुगत में लग गए. उन्होंने सबसे पहले लुप्त हो रही कला को बचाने का प्रयास शुरू किया. कई जगहों पर प्रदर्शनियों में बनारस की खास कला अवध जामदानी, जेठवा, चंदवा को प्रस्तुत किया. इसके प्रति लोगों को आकर्षण बढ़ा. लोंगों को हैंडलूम की डिजाइन, खूबसूरती, बारीकियों को लोगों के सामने रखा. श्रीभास चंद्र सुपकार को पता था कि युवा पीढ़ी को हैंडलूम से जोड़ा जाए तो उसे बचाने के साथ बढ़ाया भी जा सकता है. इसके लिए बनारस में हैंडलूम पर तैयार होने वाले कपड़ों की डिजाइन बेहद अहम थी. उन्होंने इस पर खूब काम किया. बुनकरों को नई-नई डिजाइनों से अवगत कराया. साथ ही अपने प्रोडक्ट को प्रस्तुत करने का तरीका सिखाया. उनका प्रयास सार्थक रहा और वक्त के साथ हैंडलूम की डिमांड काफी बढ़ी. युवा भी बनारस के बुनकरों के हाथ से बुने वस्त्र खूब पसंद कर रहे हैं.


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चार बार जा चुके राष्ट्रपति भवन

श्रीभास चंद्र की मेहनत जाया नहीं गई. सरकार ने इसे समझा और समय-समय पर पुरस्कृत करके उत्साह बढ़ाया. वह बताते हैं कि चार बार उन्हें राष्ट्रपति भवन जाने का मौका मिला. सबसे पहले वह 1985 राष्ट्रपति भवन गए जब उनके पिता को पद्मश्री पुरस्कार मिला. इसके बाद खुद राष्ट्रपति पुरस्कार लेने 1995 और उसके बाद पद्मश्री पुरस्कार लेने राष्ट्रपति भवन गए. वह बताते हैं कि अब तक उन्हें पांच राष्ट्रपति से मिलने का मौका मिला.


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युवाओं को हैंडलूम से जोड़ने की जरूरत

श्रीभास चंद्र बुनकरों को डिजाइन के साथ सुझाव भी देते हैं. उन्होंने कई ऐसे बुनकर तैयार किए जिन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिले. उनका कहना है कि बुनकरों की युवा पीढ़ी हैंडलूम से जुड़ना नहीं चाहते हैं. इस कला को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि युवा बुनकरों को लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएं ताकि उन्हें हैंडलूम का प्रशिक्षण दिया जा सके और इसे संरक्षित किया जा सके.

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।