साहित्यिक विरासत को बचाने के साथ उस तक पहुंच बढ़ाना जरूरी: एम्मा लुईस...

वाराणसी । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित इतिहास विभाग के हेरिटेज मैनेजमेंट कार्यक्रम में सोमवार को साहित्यिक विरासत के संरक्षण और उसके व्यापक अभिगम को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एशियन लेगेसी लाइब्रेरी की कार्यकारी निदेशक एवं हार्वर्ड विश्वविद्यालय की स्नातक एम्मा लुईस ने ‘साहित्यिक विरासत को सुरक्षित रखना और उस तक पहुँच बढ़ाना : अतीत और भविष्य’ विषय पर व्याख्यान दिया।
एम्मा लुईस ने एशिया में प्राचीन ग्रंथों और साहित्यिक विरासत के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण ग्रंथ-संग्रहों के संरक्षण के सामने समय, उपलब्धता और तकनीकी संसाधनों से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने में डिजिटल संरक्षण तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने साहित्यिक विरासत को खोजने, सूचीबद्ध करने, डिजिटलीकृत करने, लिप्यंतरित करने और अधिक से अधिक लोगों तक उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए दुर्लभ साहित्यिक सामग्री को संरक्षित करने के साथ शोधार्थियों और आम लोगों के लिए उसके अभिगम को भी आसान बनाया जा सकता है।
इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवेश भारद्वाज ने एम्मा लुईस और उनकी संस्था की ओर से साहित्यिक विरासत के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वाराणसी जैसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
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हेरिटेज मैनेजमेंट कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. ताबीर कलाम ने व्याख्यान को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी बताया। उन्होंने विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार और व्यावसायिक संभावनाओं पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन जया शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संतोष द्विवेदी ने किया। व्याख्यान में इतिहास विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।



