Kanya Puja: कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी, कन्या पूजन का जानें महत्व

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन है, जहां माता कालरात्रि की पूजा-अराधना की जाती है. मां कालरात्रि के स्वरूप बड़ा ही सुंदर और मनमोहक होता है, जो भक्तों को बड़ी ही प्रिय लगता है. माता कालरात्रि को अंधकार, भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है. साथ ही मां को शुभंकारी, काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, चंडी भी कहा जाता है.

मान्यता है कि मां कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है. हालांकि, अब नौ दिनों की नवरात्रि अपने समापन के सफर पर आ चुकी है. जहां हर कोई कन्या पूजन की बात करता है. जिसे लेकर भक्तों के मन में ये सवाल उठने लगा है कि कब कन्या पूजन करना है. तो चलिए आपको कन्या पूजन के बारे में बताते हैं.
आखिर क्यों खिलाते है कन्या
पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है. जो 27 मार्च को समाप्त होगा. शक्ति के साधक इन 9 दिनों में देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों का आशीर्वाद पाने के लिए पूरे विधि-विधान से माता की पूजा-अराधना करते हैं. मां दुर्गा के लिए नौ दिनों का व्रत भी करते है. शक्ति साधना के अंतिम दो दिन अष्टमी और नवमी तिथि को बेहद खास माना गया है, क्योंकि इन दो दिनों में ही देवी का दिव्य स्वरूप मानी जाने वाली छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन कर सभी व्रतियां अपने नौ दिनों का व्रत पूजा करती है. ऐसी मान्यता है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्रि की पूजा और भक्तों का व्रत कभी भी पूरा नहीं होता है.

किस उम्र की कन्या का क्या होता है महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में 9 दिनों में देवी स्वरूपा कन्या की पूजा अत्यंत ही शुभ और पुण्यदायी मानी गई है. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में 2 से 10 साल की कन्या की पूजा का विधान है. जिसमें 2 वर्ष की कन्या कुमारी, 3 वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या रोहिणी, 6 वर्ष की कन्या कालिका, 7 वर्ष की कन्या शाम्भवी, 8 वर्ष की कन्या दुर्गा, 9 वर्ष की कन्या चंडिका और 10 वर्ष की कन्या को सुभद्रा कहते हैं.
जाने चैत्र नवरात्रि में कब करें कन्या पूजन
यदि आप अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं तो इस साल आपको 26 मार्च 2026 को दुर्गाष्टमी पर प्रात:काल 11:48 बजे तक कन्या पूजन कर लेना चाहिए, लेकिन यदि आप नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं तो यह पावन तिथि 26 मार्च को प्रात: 11:48 से प्रारंभ होकर अगले दिन 27 मार्च 2026 को प्रात:काल 10:06 बजे तक रहेगी. ऐसे में आप चाहें तो 26 को ही या फिर उदया तिथि के अनुसार अगले दिन प्रात: 10:06 बजे तक कन्या पूजन कर लें.

ऐसे करें चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्रि में कन्या का पूजन करने के लिए साधक को अष्टमी या नवमी तिथि पर स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले प्रतिदिन की भांति देवी पूजा करनी चाहिए. इसके बाद कन्याओं को आदर के साथ अपने घर पर बुलाकर सबसे पहले उनके चरण धुलने चाहिए. 9 कन्याओं के साथ साधक को एक बालक को जरूर भैरव के रूप में बुलाना चाहिए. इसके बाद देवी स्वरूपा कन्याओं के माथे और चरण पर रोली और अक्षत लगाएं.

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इसके बाद उनके हाथ में मौली बांधकर उन्हें लाल रंग की चुनरी अर्पित करें. फिर कन्याओं को आसन पर बिठाकर पूरी, सब्जी, चना, हलवा, खीर, फल आदि अर्पित करें. इसके बाद प्रत्येक कन्या को अपने सामर्थ्य के अनुसार उपहार, वस्त्र, धन आदि देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें.



