कर्नाटक की सियासत में खेला, फिर खतरे में CM सिद्दरमैया की कुर्सी

कर्नाटक की कांग्रेस में कलह जरा भी थमता नजर नहीं आ रहा है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के समर्थकों ने एक बार फिर से सीएम चेहरा बदलने के लिए मोर्चा खोल दिया है. ये कलह कोई पहली बार नहीं जब कर्नाटक सीएम की कुर्सी खतरे में हो, बल्कि इससे पहले भी इसी मामले पर नवंबर 2025 में राजनीतिक सियासत छिड़ी थी. जब सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल के आधे सफर पर पहुंची थी. लेकिन इस बार कर्नाटक की मुख्यमंत्री कुर्सी को लेकर शुरू हुआ खींचतान फीका पड़ता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि, इस बार कांग्रेस के विधायक इकबाल हुसैन ने मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के द्वारा दिए गए हालिया बयान पर कटाक्ष करते हुए उन्हें अनुशासन में रहने की सलाह भी दी है.

डीके को कर्नाटक का सीएम चेहरा बनाने की रिक्वेस्ट
विधायक हुसैन ने डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की भी मांग करते हुए कहा कि कम से कम 80 पार्टी MLAs ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर DK शिवकुमार का नाम CM पद के लिए हाईकमान को दिया था, इसी के साथ ही डीके को कर्नाटक का सीएम चेहरा बनाने की रिक्वेस्ट भी की है. इस दौरान इकबाव हुसैन ने कहा कि, सिद्दरमैया के बेटे का जो बयान सामने आया है उन बयानों से ये साफ झलकता है कि यतींद्र बहुत दबंगई के साथ ये बात कह रहे है.

हम एक डिसिप्लिन्ड पार्टी हैं, और हमें ठीक से पेश आना होगा. हमें यह बिलकुल भी पसंद नहीं है कि यतींद्र सिद्धारमैया बार-बार अपने पिता के पक्ष में बोलें और हाईकमान को शर्मिंदा करें. ये सच है कि हर पिता अपने बेटे से प्यार करता है, और बेटा पिता से, लेकिन पॉलिटिक्स में हमें डिसिप्लिन में काम करना होता है, ऐसे बयानों से दूसरों को भड़काना नहीं चाहिए. '.
आखिर क्यों छिड़ा कर्नाटक सियासी बवाल
दरअसल, बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने अपने बयानों में ये कहा था कि, पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री बदलने के प्रयासों पर ध्यान नहीं दिया है, उनके पिता अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे. उन्होंने इस तरह की टिप्पणी शिवकुमार के चहेते बसवराज वी शिवगंगा के उस बयानबाजी पर पलटवार के तौर पर की थी, जिसमें बसवराज ने साफ कहा था कि राज्य में नेतृत्व के मुद्दे पर चल रही उलझन को दूर करने के लिए हाईकमान को हस्तक्षेप करना ही चाहिए.

हालांकि, उनके इन बयानों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन में उनका वोट काफी मायने रखता है, वो इसलिए भी कि वो विधायक हैं, जबकि यतींद्र सिद्धारमैया एमएलसी होने के नाते ऐसी कोई भूमिका नहीं निभाते है, जिसके चलते उन्होंने कटाक्ष करते हुए यतींद्र से ये पूछा कि जब उनके पास वोट ही नहीं है तो आप उनके बयानों पर ध्यान ही क्यों देते हैं? उसके बाद भी यतींद्र सिद्धारमैया चिल्ला-चिल्ला कर ये कह रहे हैं कि, सीएम सिद्धारमैया पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे, उनके ऐसे बेतुके बयानों को पार्टी हाईकमान को ये स्पष्ट करना चाहिए कि सत्ता-साझाकरण की कोई व्यवस्था है या फिर नहीं.



