काशी की गुलाबी मीनाकारी का कमाल, श्रीराम मंदिर से ब्रह्मोस तक बनाई अनोखी प्रतिकृतियां
वाराणसी : धर्म और संस्कृति की नगरी काशी न केवल अपने घाटों के लिए, बल्कि अपनी बेमिसाल हस्तशिल्प कलाओं के लिए भी जानी जाती है. इन्हीं कलाओं में से एक है- गुलाबी मीनाकारी. एक समय जो कला लुप्त होने की कगार पर थी, उसे नया जीवन देने का श्रेय वाराणसी के सिद्धहस्त कलाकार कुंज बिहारी सिंह को जाता है. कुंज बिहारी सिंह ने गांडीव डिजीटल टीम से बातचीत कर बताया की गुलाबी मीनाकारी के माध्यम से अयोध्या के श्री राम मंदिर की भव्य प्रतिकृति, ब्रह्मोस मिसाइल का मॉडल तैयार कर दुनिया को हैरान कर दिया है.

क्या है गुलाबी मीनाकारी?
गुलाबी मीनाकारी चांदी और सोने जैसी धातुओं पर की जाने वाली एक अत्यंत जटिल नक्काशी है. इसका मुख्य आकर्षण सफेद इनेमल पर किया जाने वाला गुलाबी रंग का चित्रण है, जो इसे दुनिया की अन्य मीनाकारी कलाओं से अलग बनाता है. वाराणसी को इस हुनर के लिए GI (Geographical Indication) टैग भी प्राप्त है.

इसकी मुख्य विशेषताएँ
- अनूठा 'गुलाबी' रंग
- केवल शुद्ध धातुओं का प्रयोग
- पूरी तरह प्राकृतिक
- जटिल 'फायरिंग' प्रक्रिया
- भौगोलिक संकेत
- बारीक चित्रकारी
- शाही पहचान
कुंज बिहारी सिंह: कला के आधुनिक सारथी

वाराणसी के गायघाट इलाके के रहने वाले कुंज बिहारी सिंह ने इस पुश्तैनी कला को न केवल संजोया, बल्कि इसे आधुनिक स्वरूप भी दिया. उनकी इसी मेहनत का परिणाम है कि उन्हें वर्ष 2015 के राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार (जो 2016 में प्रदान किया गया) से सम्मानित किया गया.

उनकी कला की धमक सात समंदर पार भी सुनाई देती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और अन्य विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को उपहार भेंट किए, तो उनमें कुंज बिहारी सिंह द्वारा तैयार की गई गुलाबी मीनाकारी की कलाकृतियाँ भी शामिल थीं.
राम मंदिर से ब्रह्मोस मिसाइल तक का सफर

कुंज बिहारी सिंह केवल पारंपरिक गहने ही नहीं बनाते, बल्कि उन्होंने गुलाबी मीनाकारी के माध्यम से अयोध्या के श्री राम मंदिर की भव्य प्रतिकृति, ब्रह्मोस मिसाइल का मॉडल और जटिल चेस बोर्ड (शतरंज) तैयार कर दुनिया को हैरान कर दिया है.

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नई पीढ़ी को संदेश
आज कुंज बिहारी सिंह कई युवाओं को इस कला का प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनका मानना है कि 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना के तहत इस कला को वैश्विक बाजार मिला है, जिससे स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है.



