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बीएचयू में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल का शुभारंभ

बीएचयू में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल का शुभारंभ
Sep 21, 2026, 06:22 AM
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Posted By Niharika dwivedi

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) के बाल रोग विभाग की ओर से शनिवार को सर सुंदरलाल अस्पताल के डॉक्टर्स लाउंज में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल फॉर इमरजेंसी (PD-TAME) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में देशभर से बाल रोग विशेषज्ञ, बाल नेफ्रोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ शामिल हुए।


आधारशिला रीनल केयर प्रोजेक्ट और रूरल इंडिया सपोर्टिंग ट्रस्ट (RIST) के सहयोग से संचालित यह देशव्यापी क्षमता निर्माण कार्यक्रम बच्चों में गुर्दे से जुड़ी आपात स्थितियों की पहचान और उनके शुरुआती प्रबंधन के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है। प्रशिक्षण में बाल चिकित्सा डायलिसिस, चिकित्सीय एफेरेसिस और एक्यूट किडनी इंजरी से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण, मानकीकृत प्रोटोकॉल और केस आधारित शिक्षण शामिल है।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि देश में बाल नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने की आवश्यकता है। इसके लिए चिकित्सा केंद्रों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित चिकित्सकों और डायलिसिस की बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है और मरीजों को बड़े चिकित्सा केंद्रों तक ले जाने की जरूरत भी कम हो सकती है। उन्होंने मरीजों के उपचार में सहानुभूति और संवेदनशीलता के महत्व पर भी जोर दिया।


IMS निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बाल नेफ्रोलॉजी के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कार्यशाला को चिकित्सकों के ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।


चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने बच्चों में किडनी इंजरी के मामलों के प्रबंधन के लिए उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने पेरिटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रक्रिया आधारित यह प्रशिक्षण स्वास्थ्यकर्मियों के व्यावहारिक कौशल को मजबूत करने में मदद करेगा।


कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. ओ.पी. मिश्रा, एमेरिटस प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वाराणसी तथा वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं बाल नेफ्रोलॉजिस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी स्नातकोत्तर बाल रोग विशेषज्ञों को हीमोडायलिसिस और चिकित्सीय एफेरेसिस की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार में ये महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कौशल हैं।


PD-TAME के कोर्स निदेशक प्रो. अभिजीत साहा ने पेरिटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस में अधिक संख्या में बाल रोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रथम स्तर पर इन क्षमताओं का विकास बच्चों में गुर्दे से जुड़े विकारों के समयबद्ध प्रबंधन में मददगार होगा और महानगरों के उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफरल की आवश्यकता कम हो सकती है।


आधारशिला रीनल केयर प्रोजेक्ट की ट्रस्टी नीना जॉली ने कहा कि बाल नेफ्रोलॉजी में शुरुआती स्तर पर छूट जाने वाली समस्या बाद में जटिल रूप ले सकती है। ऐसे में प्रथम स्तर पर मरीज को देखने वाले स्वास्थ्यकर्मी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी संकेतों की पहचान, उचित उपचार की शुरुआत और मरीज को सही चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने के लिए प्रथम स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।


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कार्यशाला में एक्यूट पेरिटोनियल डायलिसिस, हीमोडायलिसिस, हीमोडायफिल्ट्रेशन, चिकित्सीय एफेरेसिस, ऑटोमेटेड पेरिटोनियल डायलिसिस, प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासोनोग्राफी और वैस्कुलर एक्सेस से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।


कार्यक्रम में बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. अंकुर सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि आयोजन सचिव प्रो. अभिषेक अभिनव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...
एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...
वाराणसी: बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए मिले मुआवजे की रकम पर साइबर ठगों के सेंध लगाने का मामला सामने आया है. फूलपुर थाना क्षेत्र के मंगारी गांव निवासी अंजू देवी के संयुक्त बैंक खाते से ठगों ने एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख रुपये उड़ा लिए. मामले में साइबर क्राइम पुलिस थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस जांच में जुट गई है.अंजू देवी ने पुलिस को बताया कि उनका और उनके पति मनोज पटेल का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में संयुक्त बचत खाता है. इसी खाते में बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार के मुआवजे के रूप में 9.03 लाख रुपये आए थे. 20 अगस्त से 31 अगस्त के बीच उनके संयुक्त खाते से अलग-अलग माध्यमों से 6,51,783 रुपये निकल गए.इसके अलावा बैंक की मंगारी शाखा स्थित एक अन्य खाते से भी 13 हजार रुपये निकाल लिए गए. कुल 6,64,783 रुपये की साइबर ठगी हुई. पीड़िता के मुताबिक, उनके वाट्सएप पर एक मोबाइल नंबर से एपीके फाइल भेजी गई थी. फाइल पर क्लिक करते ही साइबर अपराधियों ने मोबाइल और खाते से संबंधित जानकारी तक पहुंच हासिल कर ली. इसके बाद खाते से रकम निकलती चली गई. खाते से रकम कटने की जानकारी होने पर पीड़िता ने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की.ALSO READ: दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धिसाइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह ने बताया कि मामले की जांच निरीक्षक ओम प्रकाश सरोज को सौंपी गई है. पुलिस लेनदेन से जुड़े विवरण और एपीके फाइल भेजने वाले मोबाइल नंबर की जांच कर रही है. पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की है. थाना प्रभारी ने कहा कि वाट्सएप या एसएमएस पर अनजान नंबरों से आने वाली किसी भी एपीके फाइल पर क्लिक न करें. संदिग्ध लिंक खोलने से भी बचें. ऐसी फाइलें मोबाइल में सेंध लगाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकती हैं. साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं.
पितृपक्ष 27 सितंबर से, इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा
पितृपक्ष 27 सितंबर से, इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा
वाराणसी : इस वर्ष पितृपक्ष का आरंभ 27 सितंबर से होगा और यह 10 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. यानी पितरों की कृपा पाने का पक्ष इस बार 14 दिनों का होगा. साथ ही षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण पितृपक्ष की अवधि कम हो रही है. जिनके पिता की मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई है, वे 26 सितंबर को पितृ श्राद्ध करेंगे. ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी. 2 अक्टूबर को षष्ठी और सप्तमी तिथि एक साथ आने के कारण पितृपक्ष की अवधि में कमी आ रही है. जिनके पिता की मृत्यु शस्त्र या विष से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाता है.वहीं, जिनके पिता की स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई हो, वे द्वादशी तिथि को श्राद्ध करेंगे. माता की मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो, उनका श्राद्ध नवमी (मातृ नवमी) को करना चाहिए. इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर को है. पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं को अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का अवसर मिलता है. यह समय परिवार के सदस्यों के लिए एकत्रित होने और अपने पूर्वजों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करने का होता है. पितृपक्ष के दौरान किए गए अनुष्ठान से पितरों की कृपा प्राप्त करने की मान्यता है. इस समय श्रद्धालु अपने पितरों के लिए विशेष भोजन तैयार करते हैं और उन्हें अर्पित करते हैं. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.आनलाइन पिंडदान के लिए कर रहे संपर्कपितृपक्ष पर काशी में ई-पिंडदान कराने के लिए कर्मकांडी ब्राह्मण पैकेज दे रहे हैं. विदेशों में बैठे आस्थावानों ने अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए इन पुरोहितों से संपर्क करना शुरू कर दिया हैं. ब्राह्मणों ने सोशल मीडिया पर इसका प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया है. बता दें कि पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए व्यक्तिगत रूप से आने में असमर्थ आस्थावान आनलाइन अनुष्ठान कराते हैं. हाल ही में रूस की महिला ने अपने पिता और भाई का आनलाइन पिंडदान कराया था.ALSO READ : दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि
दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि
दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि
वाराणसी : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की शोध टीम ने दूध प्रोटीन और एलोवेरा से तैयार नवीन मिश्रित एंटासिड टैबलेट के लिए भारतीय पेटेंट हासिल किया है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस आविष्कार को पेटेंट संख्या 597350 प्रदान किया है। इसका आवेदन संख्या 202311057324 है।यह शोध बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग में किया गया। आविष्कारक टीम में प्रो. दिनेश चन्द्र राय, प्रो. राज कुमार दुआरी, डॉ. अरविंद, डॉ. रुचि चावला, रिधि पांडे और कृष्ण कुमार शामिल हैं।शोध टीम के नेतृत्वकर्ता प्रो. दिनेश चन्द्र राय ने इस उपलब्धि को प्राकृतिक पाचन स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पेटेंट डेयरी फार्म और शोध प्रयोगशाला से निकलकर समाज के दैनिक जीवन तक पहुंचने वाले नवाचार का उदाहरण है।उन्होंने कहा कि पेटेंट मिलने के बाद इस तकनीक के क्लिनिकल परीक्षण, उत्पादन विस्तार और व्यावसायीकरण की संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही, अम्लता की समस्या के दैनिक प्रबंधन के लिए प्रोटीन युक्त विकल्प विकसित करने की दिशा में भी यह शोध उपयोगी हो सकता है।ALSO READ : बीएचयू में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल का शुभारंभप्रो. राय के अनुसार, यह उपलब्धि स्वदेशी नवाचार, डेयरी उत्पादों के मूल्य संवर्धन और साक्ष्य आधारित पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।इस उपलब्धि पर दोनों विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक समुदाय और पूर्ववर्ती छात्र संघों ने शोध टीम को बधाई दी तथा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में टीम के योगदान की सराहना की।