काशी में नई व्यवस्था के संग भगवान जगन्नाथ रथयात्रा मेले का शुभारंभ, उमड़े श्रद्धालु

वाराणसी : महादेव की नगरी काशी में भक्तिमय वातावरण के बीच गुरुवार की सुबह भगवान जगन्नाथ की तीन दिवसीय ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का शुभारंभ हुआ. नई व्यवस्था के साथ तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पीतांबरी श्रृंगार किया गया. इसके बाद संपन्न हुई मंगला आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की. सुबह लगभग पांच बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. जैसे ही दर्शन शुरू हुए, मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर भक्तों की लंबी कतार दिखाई देने लगीं. पूरे क्षेत्र में “जय जगन्नाथ” के जयघोष और भक्ति गीतों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया.
इस बार लगभग पांच किलोमीटर की रथयात्रा
इस वर्ष की रथयात्रा लगभग पांच किलोमीटर के निर्धारित मार्ग से होकर निकलेगी. भगवान को पारंपरिक रूप से 56 प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया गया. दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में नानखटाई और तुलसी दल वितरित किए गए. भक्तों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया और परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की. करीब दो किलोमीटर तक फैले मेले में सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिली. धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ रही. दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हुए.

पहली बार बैरिकेडिंग से व्यवस्थित हुई दर्शन व्यवस्था
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने विशेष इंतजाम किए हैं. पहली बार दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने के लिए बैरिकेडिंग की गई है. श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जिससे भीड़ नियंत्रण में काफी सुविधा मिल रही है और दर्शन भी सुचारु रूप से संपन्न हो रहे हैं. सुरक्षा व्यवस्था के तहत तीन थाना क्षेत्रों की पुलिस बल तैनात की गई है. इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी लगातार मौके पर मौजूद रहकर सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना है. इस दौरान अतिक्रमण करने वालों को हिदायत भी दी गई.

नानखटाई बनी मेले का प्रमुख आकर्षण
काशी की जगन्नाथ रथयात्रा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि अपनी पारंपरिक खाद्य संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध है. इस मेले में भगवान को नानखटाई का भोग लगाने की वर्षों पुरानी परंपरा है. यही कारण है कि मेले के दौरान इसकी मांग कई गुना बढ़ जाती है. रथयात्रा मार्ग पर जगह-जगह नानखटाई के आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां विभिन्न स्वाद और आकार की नानखटाई उपलब्ध है. श्रद्धालु प्रसाद के रूप में इसे खरीदने के साथ-साथ अपने परिजनों और मित्रों के लिए भी बड़ी मात्रा में इसकी खरीदारी कर रहे हैं. दुकानदारों के अनुसार रथयात्रा के तीन दिनों में नानखटाई की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक हो जाती है.
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मंगला आरती में शामिल हुए ट्रस्ट अध्यक्ष
जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह भी अपने परिवार के साथ मंगला आरती में शामिल हुए. उन्होंने भगवान जगन्नाथ का पूजन कर प्रदेश और देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि काशी में भगवान जगन्नाथ की दिव्य मंगला आरती में सम्मिलित होना उनके लिए सौभाग्य और आध्यात्मिक आनंद का विषय है. उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय रथयात्रा मेला 16, 17 और 18 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है तथा सभी श्रद्धालुओं से परिवार सहित मेले में पहुंचकर भगवान के दर्शन करने और धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की. वाराणसी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है.



