वैश्विक फंक्शनल फूड सेक्टर में बड़ी सफलता, पपीते के पत्तों से विशेष गुड़ विकसित…

वाराणसी : वैश्विक फंक्शनल फूड सेक्टर में भारतीय वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. बीएचयू के सीनियर प्रोफेसर एवं बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान टीम ने पपीते के पत्तों के पाउडर से समृद्ध एक विशेष वैल्यू-एडेड गुड़ विकसित किया है. इस महत्वपूर्ण शोध को नीदरलैंड्स के प्रतिष्ठित एल्सेवियर ग्रुप के उच्च इम्पैक्ट फैक्टर (आईएफ 7.1) वाले अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नल एलडब्ल्यूटी-फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी के नवीनतम अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है.
प्रो. दिनेश चंद्र राय ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि पारंपरिक भारतीय खान-पान और आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के माध्यम से वैश्विक मंच पर स्थापित करना उनकी टीम का मुख्य लक्ष्य रहा है. इस अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम में बीएचयू के गौरव प्रताप सिंह, डॉ. अभिषेक दत्त त्रिपाठी, उर्वशी विक्रांता, अपर्णा अग्रवाल और विवेक कुमार मौर्य के साथ ऑस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक दीपेंद्र कुमार महतो तथा सऊदी अरब की किंग सऊद यूनिवर्सिटी के डॉ. जावेद मसूद खान भी शामिल रहे.
प्रो. राय ने बताया कि वैज्ञानिक जांच के लिए रिसर्च टीम ने हाई रेजोल्यूशन एक्यूरेट मास स्पेक्ट्रोमेट्री और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया.जांच में इस विशेष गुड़ के भीतर पपीते के पत्तों से प्राप्त 22 दुर्लभ बायो-एक्टिव यौगिकों, जैसे क्वेरसेटिन, कैटेचिन और फेरुलिक एसिड, की पुष्टि हुई है. ये तत्व इससे पहले कभी गुड़ में नहीं पाए गए थे. शोध के अनुसार ये यौगिक शरीर में इंसुलिन बढ़ाने (एंटी-डायबिटिक), सूजन कम करने (एंटी-इंफ्लेमेटरी), रक्तचाप नियंत्रित करने और कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में प्रभावी माने जाते हैं.
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अनुसंधान के दौरान विभिन्न मिश्रणों का परीक्षण किया गया, जिसमें प्रति किलोग्राम गुड़ में 40 ग्राम पपीते के पत्तों के पाउडर वाला फॉर्मूला स्वाद, सुगंध और औषधीय गुणों के लिहाज से सबसे बेहतर पाया गया. प्रो. राय के अनुसार यह शोध 'लोकल टू ग्लोबल' दृष्टिकोण के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है. उनका कहना है कि यह उत्पाद सेहत के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का सुरक्षित विकल्प बनने के साथ-साथ पपीते के पत्तों जैसे बेकार समझे जाने वाले कृषि संसाधनों को नया बाजार मूल्य देगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. इस उपलब्धि पर दोनों विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक समुदाय और एलुमनी एसोसिएशनों ने प्रो. डी.सी. राय और उनकी टीम को बधाई दी है.



