कारोबारी परिवार से जिंदगी ने ही नहीं अपनों ने भी मुंह मोड़ा, लाश लेने किया इनकार

वाराणसीः बनारस में जान गंवाने वाले महाराष्ट्र के कारोबारी परिवार का शव लेने से उनके रिश्तेदारों ने इनकार कर दिया. काफी प्रयास के बाद भी किसी ने नहीं आने पर पुलिस ने सामाजिक संगठन की मदद से शव का अंतिम संस्कार किया. पुलिस ने परिवार के जान देने की वजह बीमारी और कर्ज बताया.
लक्सा थाना प्रभारी राजू कुमार के अनुसार
वाराणसी के होटल में जहर खाकर आत्महत्या करने वाले मां-बेटे के हर रिश्तेदार ने शव लेने से इनकार कर दिया. पहले मृतक ईशान मुखर्जी के मामा और फिर बुआ-फूफा ने शव लेने से इनकार कर दिया। संबंध टूटने का हवाला देकर बहन और बहनोई भी शव लेने से नहीं आए. अब महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस विशाल के करीबियों से संपर्क कर रही है. प्रयागराज के कर्नलगंज के मूल निवासी विशाल मुखर्जी 15 साल पहले सीमेंट फैक्ट्री में काम करने महाराष्ट्र गए थे और वहीं बस गए. माता पिता को भी अपने साथ ले गए थे. रिश्तेदारों का कहना है कि विशाल ने विशाल ने मुंबई में अपना मकान और दुकान पहले ही बेच दिया इसके बाद कई लोगों से कर्ज ले लिया था. पिता के दोस्तों से भी पैसे उधार पर लिए थे और किसी को लौटाते नहीं थे. बेटे ईशान के दोस्तों से भी कर्ज ले रखे थे. गंभीर बीमारी में ज्यादा पैसा खर्च हुआ, वहीं पत्नी जया की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी. उनका भी उपचार जारी था. वर्ष 2018 में पिता और 2022 में मां की मौत हो गई थी. विशाल, उनकी पत्नी जया और बेटे ईशान से कोई रिश्तेदार मतलब नहीं रखता था. कर्ज में डूबे परिवार ने मौत के लिए काशी को चुना जिससे उन्हें मोक्ष मिल जाए. उनके फोन में पुलिस को 15 नंबर मिले, जिसमें से सिर्फ पांच नंबरों पर ही फोन उठे. प्रयागराज के कर्नलगंज की रहने वाली विशाल की बहन पृथा पांडेय और बहनोई भूपेंद्र पांडेय से लक्सा पुलिस ने संपर्क किया. विशाल के प्रयागराज निवासी बहन और बहनोई से लक्सा पुलिस ने कई बार संपर्क किया है. परिजनों से बातचीत में पता चला कि अत्यधिक कर्ज के दबाव में परिवार ने यह कदम उठाया.
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बहन पृथा ने पुलिस को फोन पर बताया कि भैया और भाभी से 12 साल पहले ही संबंध टूट चुका था. पृथा ने बताया कि विशाल इकलौते भाई थे. मगर, उनसे कोई रिश्ता नहीं रह गया था. मुंबई जाने के बाद से कोई बातचीत नहीं होती थी. लक्सा थाना प्रभारी राजू कुमार ने बताया कि बहन और बहनोई ने दाह संस्कार में असमर्थता जताई है. पुलिस के अनुसार इलाज से कोई आराम न मिलने पर विशाल ने परिवार के साथ तीर्थयात्रा पर जाने का फैसला किया था. पिछले तीन महीने से परिवार पूरे देश के धार्मिक स्थल घूमने जा रहा था. सावन में विशाल ने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा जताई तो बेटे ने टिकट बुक कराया. तीनों पांच अगस्त को मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस से वाराणसी के लिए रवाना हुए. सात अगस्त की सुबह काशी पहुंचकर वाची होम स्टे में चार दिन के लिए कमरा बुक किया था. बीमार की वजह से विशाल की वाराणसी में ही मौत हो गई. उसके बाद उसकी पत्नी व बेटे ने स्टे होम में जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दिया.



