अब थम जाएगी दिल्ली में पेट्रोल-डीजल वाहनों की रफ्तार, सरकार का आदेश

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शंति वार्ता पर दोनों देशों में कोई समझौता नहीं हो पाया है. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कब्जा कायम है. क्योंकि, अमेरिके का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की कोशिशों में लगे हुए है. इस तनावपूर्ण स्थिति के चलते पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत देशभर में देखने को मिल रही है. जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि अब इसका असर काफी हद तक देखने को मिल रहा है, जिसके चलते केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली में एप आधारित सामान और भोजन आपूर्ति और यात्रा की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनियों यानि (एग्रीगेटर) के इस वर्ष से अपने बेड़े में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन शामिल करने पर रोक लगेगी.

जानें क्या है पूरा मामला
बता दें, डीजल-पेट्रोल नहीं मिलने की वजह से इस साल एक जनवरी से एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं द्वारा संचालित हुए दोपहिया वाहनों और हल्के मालवाहकों के मौजूदा बेडे में पेट्रोल या डीजल पर चलने वाले किसी भी पारंपरिक वाहन को शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि, मार्केट में बिना डीजल-पेट्रोल वाले वाहनों को लाने से लोगों को पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं पड़ेगी. मतलब साफ ह कि, अब 2026 के बाद बेड़ा पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगा. इस निर्देश में इसे लागू करने के लिए ये साफ कहा गया है कि, एग्रीगेटर को बेड़े में बीएस-6 उत्सर्जन मानक वाले दोपहिया वाहनों को शामिल करने की अनुमति 31 दिसंबर, 2026 तक होगी, जिसके बाद उन्हें अपने बेड़े को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना अनिवार्य होगा.

दिल्ली में पंजीकृत नए ऑटो-रिक्शा पर भी लागू
जानकारी के मुताबिक, वाहनों की नीति में ऑटो-रिक्शा सहित यात्री इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों के लिए प्रोत्साहन राशि का भी प्रस्ताव किया गया है. इसमें साफ तौर पर ये कहा गया है कि, नई नीति की अधिसूचना की तारीख से पहले वर्ष में 50,000 रुपये, दूसरे वर्ष में 40,000 रुपये और तीसरे वर्ष में 30,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके, यह प्रोत्साहन राशि पुराने सीएनजी ऑटो-रिक्शा को बदलने के साथ-साथ दिल्ली में पंजीकृत नए ऑटो-रिक्शा पर भी लागू होगा.

वाहन को कबाड़ कराने का प्रमाण पत्र जारी
इस प्रस्तावित नीति के तहत अधिकृत कबाड़ सुविधा केंद्र से वाहन को कबाड़ कराने का प्रमाण पत्र जारी होते ही छह महीने के भीतर निजी उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी. ये प्रावधान उन वाहन श्रेणियों पर लागू होता है जिनका उपयोग हद से ज्यादा होता है, जैसे दोपहिया, तिपहिया और मालवाहक वाहन, जो रोजाना व्यापक संचालन के कारण प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
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क्योंकि, देशभर में डीजल-पेट्रोल की किल्लत बढ़ने के नाते जरूत के हिसाब से ही इन वाहनों चलन होगा. बता दें, 'दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाता योजना (2023)' के अन्य प्रविधान यथावत लागू रहेंगे. एग्रीगेटर बेड़े और ऑटो-रिक्शा पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस नीति का उद्देश्य अधिक उपयोग वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और राजधानी में प्रदूषण के स्तर को कम करना है.



