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मकर संक्रांति पर लाखों भक्‍तों ने गंगा में लगाई आस्‍था की डुबकी, लिया खिचड़ी प्रसाद

मकर संक्रांति पर लाखों  भक्‍तों ने गंगा में लगाई आस्‍था की डुबकी, लिया खिचड़ी प्रसाद
Jan 15, 2026, 07:17 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : मकर संक्रांति का पर्व काशी में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. बुधवार रात्रि से गंगा घाटों पर स्‍नानार्थियों के आने का क्रम शुरू हो गया था. गुरुवार की दोपहर तक लाखों श्रद्धालुओं ने आस्‍था की डुबकी लगाई. भीड़ और उत्साह इस बात का प्रमाण है कि यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है. इसी कामना के साथ ख‍िचड़ी बाबा मंद‍िर में एक द‍िन पूर्व से ही तैयार‍ियां शुरू कर दी गई थीं. जहां द‍िन भर भक्‍तों को ख‍िचड़ी का प्रसाद द‍िया गया. मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त से पूर्व ही काशी के दशाश्वमेध घाट पर श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगानी शुरू कर दी. ज्ञात हो कि ग्रहों के राजा सूर्य ने बुधवार, 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश किया, जिससे संक्रांति का योग बना.


इस अवसर पर संक्रांति का पुण्यकाल 16 घंटे तक मनाया गया, जो अगले सूर्योदय के बाद 15 जनवरी को दोपहर तक जारी रहा. इस संदर्भ में काशी आने वाले श्रद्धालुओं ने बुधवार की शाम से ही स्नान, दान और ध्यान का क्रम आरंभ कर दिया. घाटों पर रात से ही जल पुल‍िस और एनडीआरएफ की टीम की सक्र‍ियता बढ़ गई. जबक‍ि गंगा में व‍िशेष सतर्कता बरती जा रही है. प्रयागराज संगम से काशी आने वाले श्रद्धालुओं का भी जमघट हो रहा है. मकर संक्रांति के पुण्यकाल के दौरान विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. काशी में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है. श्रद्धालु अपने-अपने परिवार के साथ इस अवसर का लाभ उठाने के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं.


मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इसे एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. इस दिन लोग स्नान कर दान करते हैं और अपने पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं. जबक‍ि बाबा को भी ख‍िचड़ी सहित त्‍योहारी भोग लगाकर भक्‍त न‍िहाल होते हैं.


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काशी में इस पर्व के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है. श्रद्धालु अपने-अपने घरों से पवित्र जल लेकर आते हैं और उसे घाट पर प्रवाहित करते हैं. इसके साथ ही, विभिन्न प्रकार के पकवानों का भी विशेष महत्व होता है. लोग तिल, गुड़ और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, जो इस पर्व का अभिन्न हिस्सा हैं.


इस अवसर पर काशी के घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है. पुलिस और प्रशासन के अधिकारी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात हैं. घाटों पर सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े.

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- भारत में LPG गैस की कमी नहीं...
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गैस संकट को लेकर उठने वाले सवालों पर मंदिर प्रशासन ने लगाया विराम, कही ये बात
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