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623 आवेदन में 348 भवनों को मिला फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र, शेष को नोटिस...

623 आवेदन में 348 भवनों को मिला फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र, शेष को नोटिस...
Jun 25, 2026, 09:43 AM
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Posted By Isha Yadav

वाराणसी : शहर के तेजी से हो रहे विस्तार और बहुमंजिला भवनों की बढ़ती संख्या के बीच अग्निशमन विभाग के समक्ष अग्नि सुरक्षा मानकों को लागू करने की चुनौती बढ़ गई है. बीते छह माह में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र) के लिए 623 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए.इनमें से जांच के बाद 348 भवनों को प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है. शेष आवेदनों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, जिन्हें दूर करने के लिए संबंधित आवेदकों को नोटिस भेजा गया है.


मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि 1 जनवरी से जून माह तक प्राप्त सभी आवेदनों की जांच पूरी कर ली गई. जिन भवनों में फायर सेफ्टी के मानक पूरे पाए गए, उन्हें प्रमाणपत्र दे दिया गया. बाकी मामलों में खामियों को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं.


अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने वाले भवनों का आंकड़ा इस प्रकार है- होटल एवं गेस्ट हाउस 252, स्कूल-कालेज एवं कोचिंग संस्थान 514, अस्पताल 840, इंडस्ट्रियल बिल्डिंग 92 और व्यापारिक भवन 406.फ्लोर एरिया 500 वर्ग मीटर से अधिक या भवन की ऊंचाई 9 मीटर से ज्यादा होने पर ये भवन विभाग के नियमन के दायरे में आते हैं.


15 बड़े कोचिंग संस्थानों की नियमित जांच की जा रही है.अधिकांश में सुरक्षा मानकों का पालन पाया गया है. छोटे संस्थानों की भी लगातार जांच हो रही है.जहां कमी मिलती है, वहां नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं.


बड़े कोचिंग संस्थानों में कम से कम दो सीढ़ियों का होना अनिवार्य है.लिफ्ट वाले भवनों में वैकल्पिक सीढ़ी भी जरूरी है. आपात स्थिति में अग्निशमन वाहनों की आसान पहुंच के लिए भवन परिसर के आसपास पर्याप्त खुली जगह होनी चाहिए.


शहर में बढ़ते शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक भवनों को देखते हुए विभाग सख्ती बरत रहा है.अग्निशमन विभाग का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है. किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.


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सैकड़ों होटल - गेस्ट हाऊस को नोटिस


अग्निशमन विभाग ने फायर सेफ्टी मानकों के पालन को लेकर चेकिंग अभियान चलाया. पिछले 20दिनों के दौरान चलाए गए विशेष जांच अभियान में शहर के 112 होटल और गेस्ट हाउस में फायर सिस्टम की कमियां मिलने पर नोटिस उन्हें नोटिस जारी किया गया है और सुरक्षा व्यवस्था सही करने के निर्देश दिए इसके साथ 40 भवनों को सील भी किया गया है.

जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्ज
जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्ज
वाराणसी : जमीन और मकान दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में मां और बेटों ने पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा. पीडित पुलिसकर्मियों ने लालपुर-पांडेयपुर थाने में 20.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं. पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद हेरान करने वाला है. आरोपी जमीन कारोबारियों ने पिछले 24 महीनों के भीतर 10 से ज्यादा पुलिसवालों से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. पुलिस सूत्रों का मानना है कि यदि पूरी कड़ियां जोड़ी जाएं, तो यह महाघोटाला 5 से 10 करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकता है.लालपुर-पांडेयपुर पुलिस ने पीड़ितों की तहरीर पर मुख्य आरोपी और जमीन कारोबारी गौरव गुप्ता, उसके सगे भाई दीपक गुप्ता, मां कस्तूरी देवी (निवासी: अशोक विहार कॉलोनी) सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. इस गिरोह के चंगुल में सिर्फ पुलिसवाले ही नहीं, बल्कि कचहरी के पेशकार और मुंशी भी फंस चुके हैं.ALSO READ: जीएसटी की डिप्‍टी कमिश्‍नर 50 हजार रश्वित लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, महिला दरोगा से उलझी...पर्यटक थाने में तैनात सिपाही विशाल कुमार ने आरोप लगाया कि साल 2024 में आरोपियों ने उन्हें एक मकान दिलाने के नाम पर 13 लाख रुपये हड़प लिए. लंबे समय बाद भी जब रजिस्ट्री नहीं हुई और विशाल ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी. पीड़ित की शिकायत पर मंगलवार को पुलिस ने मामला दर्ज किया. कैंट थाने में तैनात और मूल रूप से गोंडा के रहने वाले आरक्षी भवन कुमार ने भी साल 2024 में जमीन खरीदने के लिए गौरव गुप्ता से संपर्क किया था. आरोपियों ने झांसे में लेकर उनसे 7.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली. यह पहली बार नहीं है जब इस जालसाज परिवार पर केस दर्ज हुआ है. इससे पहले भी इनके खिलाफ शहर के अन्य थानों में मामले दर्ज हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही इन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.
जीएसटी की डिप्‍टी कमिश्‍नर 50 हजार रश्वित लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, महिला दरोगा से उलझी...
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वाराणसी : फाइल निस्‍तारण के लिए 50 हजार रुपये रिश्‍वत लेते विजिलेंस टीम ने जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त) अंबिका सिंह को बुधवार शाम चेतगंज स्थित एक रेस्टोरेंट के पास रंगेहाथ गिरफ्तार किया. इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है. आरोप है कि उन्होंने एक उद्यमी की जीएसटी संबंधी फाइल पास करने के एवज में रिश्वत मांगी थी. गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ने अंबिका सिंह से कोतवाली स्थित महिला थाने में पूछताछ की. इस दौरान चेतगंज में गिरफ्तारी के समय वह विजिलेंस की महिला दरोगा से उलझने के साथ राहगीरों से बचाने की गुहार लगाती रहीं लेकिन पुलिसकर्मियों की सख्ती के बाद शांत हो गईं. अंबिका सिंह फतेहपुर जिले के धाता थाना क्षेत्र की निवासी हैं.उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, वाराणसी सेक्टर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा लखरांव निवासी तथा ब्लैक स्मिथ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अजय कुमार मौर्य ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, उनकी कंपनी के फरवरी 2023 के रिटर्न और राज्य जीएसटी के आकलन से संबंधित फाइल के निस्तारण के लिए सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रही थीं. शिकायतकर्ता का आरोप था कि फाइल सही होने के बावजूद उसमें अनावश्यक खामियां निकाली जा रही थीं.ALSO READ:जनजातीय शिक्षा को नई दिशा, जनजातीय कार्य मंत्रालय और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच एमओयू...शिकायत मिलने के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने गोपनीय जांच कराई. जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया. बुधवार शाम चेतगंज स्थित दादा रेस्टोरेंट के पास जैसे ही अंबिका सिंह ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये वाला लिफाफा लिया, पहले से मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और विजिलेंस टीम ने उन्हें पकड़ लिया.गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने शोर मचाया और महिला पुलिसकर्मियों से उलझने का भी प्रयास किया. उनके खिलाफ विजिलेंस थाना, वाराणसी सेक्टर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
जनजातीय शिक्षा को नई दिशा, जनजातीय कार्य मंत्रालय और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच एमओयू...
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वाराणसी : जनजातीय समाज की शिक्षा, संस्कृति और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. नई दिल्ली स्थित जनजातीय कार्य मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह समझौता मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की उपस्थिति में संपन्न हुआ.इस एमओयू के तहत विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुरूप जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष सर्टिफिकेट और डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार करेगा. इन पाठ्यक्रमों में जनजातीय संस्कृति, मातृभाषा, पारंपरिक ज्ञान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा का समावेश किया जाएगा, ताकि जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत हो सके.कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यह समझौता जनजातीय समाज के उज्ज्वल भविष्य और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप यह पहल स्थानीय संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगी.उन्होंने विश्वास जताया कि इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रबोध की भावना विकसित होगी तथा वे देश के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे.ALSO READ:रेलवे कर्मचारी ने रची लूट की फर्जी कहानी, कर्ज से बचने के लिए किया था षड्यंत्र...इस अवसर पर मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडेय, निदेशक दीपाली मसीर्कर सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे. यह पहल जनजातीय समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और सांस्कृतिक सम्मान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.