साइकिएट्रिक सोसायटी का राष्ट्रीय सम्मेलन, मनोचिकित्सकों ने बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति पर जताई चिंता

वाराणसी : सेंट्रल साइकिएट्रिक सोसायटी का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शनिवार से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के मनोरोग विभाग के तत्वावधान में डा. उडुप्पा सभागार में आरंभ हुआ. उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की. सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों, मेडिकल कॉलेजों और शोध संस्थानों के मनोचिकित्सक एकत्रित हुए हैं, जो इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तंत्रिका गतिविधियों के संचालन और नियंत्रण पर चर्चा करेंगे.
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह पहला अवसर है जब उन्होंने किसी एसोसिएशन को विभिन्न जोन में विभाजित होते देखा है. उन्होंने बताया कि यह सेंट्रल ज़ोन है, जिसमें चार राज्य शामिल हैं. इससे बेहतर भागीदारी और अधिक कार्यक्रमों का आयोजन संभव होगा. उन्होंने न्यूरो-मॉड्यूलेशन तकनीकों और प्रैक्टिकल डेमो के प्रयासों की सराहना की, जो न केवल छात्रों और पेशेवरों के लिए लाभकारी होंगे, बल्कि कई मरीजों को भी फायदा पहुँचाएंगे.
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प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि यह जानकर खुशी होती है कि उनका विभाग 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' है, जिससे उन मरीजों को मदद मिलेगी जिन्हें विशेष उपचार की आवश्यकता है. उन्होंने स्पेशलाइज़ेशन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आज साइकियाट्रिस्ट के लिए कई रास्ते खुले हैं. उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी रुचि के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करें, जिससे उन्हें पहचान मिलेगी और वे बेहतर रिसर्च और पब्लिकेशन कर सकेंगे.
उद्घाटन सत्र में बीएचयू के मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अच्युत कुमार पाण्डेय, सोसायटी के जोनल अध्यक्ष डा. सौरभ टंडन, डीन मेडिसिन प्रो. संजय गुप्ता, निदेशक चिकित्सा विज्ञान संस्थान प्रो. एसएन संखवार, सोसायटी अध्यक्ष डा. ओमप्रकाश सिंह, चिकित्सा अधीक्षक सर सुंदरलाल चिकित्सालय प्रो. पुनीत, और प्रभारी आचार्य ट्रामा सेंटर प्रो. अजीत कुमार सिंह सहित कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे. इस सम्मेलन में विशेषज्ञों के बीच होने वाली चर्चा से उम्मीद है कि सभी प्रतिभागियों को लाभ होगा. कुलपति ने कहा कि यदि सभी को इससे फायदा होता है, तो इसमें जो भी धन खर्च हुआ है, उसका सही उपयोग हुआ है. उन्होंने सभी प्रतिभागियों के लिए शुभकामनाएँ दीं और आशा व्यक्त की कि उनका अनुभव बीएचयू और आइएमएस बीएचसू में सकारात्मक रहेगा.



