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गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं विभाग की प्राथमिकता: अपर निदेशक

गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं विभाग की प्राथमिकता: अपर निदेशक
Jan 28, 2026, 12:45 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वाराणसी मंडल डॉ. नरेन्द्र देव शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को मंडलीय स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंडल के सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अधिकारी उपस्थित रहे. डॉ. शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी जनपदों को शत-प्रतिशत लक्ष्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए.


बैठक में आकांक्षात्मक ब्लॉकों-चंदौली के चहनिया, जौनपुर के मछलीशहर व रामपुर तथा गाजीपुर के देवकली, बाराचवर, सादात, बिरनो, मरदह एवं रेवतीपुर-की विशेष समीक्षा की गई. इन ब्लॉकों में गर्भवती महिलाओं का प्रथम त्रैमासिक पंजीकरण, संस्थागत प्रसव, कम वजन के शिशुओं की पहचान, एनक्यूएएस प्रमाणीकरण, हाईपरटेंशन व डायबिटीज का चिन्हीकरण व उपचार, टीबी रोगियों का सफल इलाज, चार एएनसी जांच और शून्य से एक वर्ष तक बच्चों के पूर्ण टीकाकरण जैसे 10 प्रमुख सूचकांकों पर लक्ष्यानुसार कार्य करने के निर्देश दिए गए.


आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों के शत-प्रतिशत गोल्डन कार्ड बनाए जाने पर जोर देते हुए डॉ. शर्मा ने जीरो पॉवर्टी लाइन की सूची के आधार पर सभी पात्र परिवारों के कार्ड एक सप्ताह के भीतर प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए. रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत महिला हिंसा से जुड़े मामलों में समय से चिकित्सीय परीक्षण कराने तथा कन्या सुमंगला योजना में पात्र लाभार्थियों को समय से लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए.


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यूपी हेल्थ डैशबोर्ड रैंकिंग (नवंबर 2025 तक) की समीक्षा में वाराणसी 11वें, जौनपुर 14वें, चंदौली 25वें और गाजीपुर 47वें स्थान पर रहा, जबकि वाराणसी मंडल प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा. अपर निदेशक ने राज्य औसत से कम प्रगति वाले सूचकांकों में सुधार कर सभी जनपदों को शीर्ष 10 में स्थान पाने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत गाजीपुर और जौनपुर में पुरुष व महिला नसबंदी की उपलब्धि कम पाए जाने पर विशेष प्रयास के निर्देश दिए गए. साथ ही एनक्यूएएस और कायाकल्प कार्यक्रमों में अधिक से अधिक स्वास्थ्य इकाइयों को शामिल कर प्रमाणीकरण प्राप्त करने पर जोर दिया गया. डॉ. शर्मा ने कहा कि आम जनता को त्वरित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्‍यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...
काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्‍यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्‍यपाल भावुक हो गईं. उन्‍होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्‍यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्‍यपाल भावुक हो गईं. उन्‍होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्‍यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.ALSO READ:वाराणसी में महिलाएं चला रही थीं फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट, 10 गिरफ्तारकुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.
वाराणसी में महिलाएं चला रही थीं फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट, 10 गिरफ्तार
वाराणसी में महिलाएं चला रही थीं फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट, 10 गिरफ्तार
वाराणसी : ऑपरेशन "साइबर वज्र" के तहत वाराणसी पुलिस ने कैंट क्षेत्र में मैट्रिमोनियल ब्यूरो की आड़ में साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड किया. रैकेट संचालिका समेत 10 महिलाओं को गिरफ्तार कर 27 मोबाइल समेत कई दस्तावेज बरामद किए गए. पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कई लोगों से करीब ₹10 लाख की ठगी की है. कैंट पुलिस और साइबर सेल को सोमवार शाम संयुक्त कार्रवाई में यह सफलता मिली.फर्जी मैट्रिमोनियल ब्यूरो चलाकर शादी कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने चाले गिरोह का संचालन अर्दली बाजार स्थित विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के एक फ्लैट से किया जा रहा था.पुलिस के अनुसार, गिरोह की मास्टरमाइंड रागिनी देवी अखबारों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराती थी. विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों से 'लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन' के नाम पर सदस्यता शुल्क लिया जाता था. इसके बाद वाट्सएप पर युवक-युवतियों की प्रोफाइल भेजी जाती थी, लेकिन वास्तविक परिवारों का संपर्क कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता था.50 से अधिक शिकायतों के बाद हुई कार्रवाईइस मामले में पुलिस और साइबर थाने को दर्जनों शिकायतें मिली थीं. शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि पैसे जमा कराने के बावजूद न तो रिश्ता कराया गया और न ही उनकी रकम लौटाई गई. लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की.डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल और एनसीआरपी पोर्टल पर दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज हो रही थीं. जांच में सामने आया कि इन्हीं नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क कर ठगी की जा रही थी. देश के विभिन्‍न राज्‍यों से भी शिकायतें मिल रही थीं.वाट्सएप के जरिए चलता था पूरा खेलपुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य खुद को मैट्रिमोनियल ब्यूरो का प्रतिनिधि बताकर वाट्सएप पर प्रोफाइल भेजते थे. इसके बाद परिवार का संपर्क देने के नाम पर सदस्यता शुल्क जमा कराया जाता था. एक महिला शिकायतकर्ता से चार किस्तों में ₹7,000 और दूसरे से ₹3,500 वसूले गए, लेकिन किसी को भी वास्तविक वैवाहिक संपर्क नहीं दिया गया.सोमवार को साइबर सेल और कैंट थाना पुलिस ने विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी स्थित कार्यालय पर छापा मारा. वहां तीन कमरों में 10 महिलाएं मोबाइल फोन और कीपैड फोन के जरिए लोगों से बातचीत करती मिलीं. तलाशी के दौरान पुलिस ने 27 मोबाइल फोन, एक एसर टैबलेट, चार बिल वाउचर, दो रजिस्टर, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज, मैट्रिमोनियल रजिस्ट्रेशन फॉर्म, तीन क्यूआर कोड, एक पेमेंट साउंड बॉक्स, तीन चेकबुक, एक पासबुक और पांच डेबिट कार्ड बरामद किए. पूछताछ में रागिनी देवी ने स्वीकार किया कि अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों को सदस्यता के लिए प्रेरित किया जाता था. पुलिस के अनुसार, साइबर शिकायतों के चलते कुछ बैंक खाते फ्रीज होने के बाद गिरोह ने अन्य बैंक खातों और अलग-अलग क्यूआर कोड के जरिए भी पैसे वसूलने शुरू कर दिए थे.ALSO READ:वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...गिरफ्तार सभी महिलाए कैंट, शिवपुर, लालपुर, और कैंट थाना क्षेत्र की निवासी बताई गई और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 3(5), 319(2), 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और देशभर में इस तरह की साइबर ठगी के मामलों का भी खुलासा किया जा सके.
वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...
वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...
वाराणसी : जंसा थाना क्षेत्र में रिंग रोड फेज 2 पर सजोई गांव के पास मंगलवार की सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया. तेज रफ्तार ट्रक किसी अज्ञात वाहन में पीछे से टकरा गया, जिससे चालक की मौत हो गई. ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. मशक्‍कत के बाद केबिन में फंसे चालक को बाहर निकाला गया. इस दौरान कुछ देर तक यातायात भी प्रभावित रहा. पुलिस शव कब्‍जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई में जुट गई.घटना की सूचना राहगीरों ने जंसा पुलिस को दी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद चालक के शव को केबिन से बाहर निकाला. हादसे के समय ट्रक में कोई खलासी मौजूद नहीं था. प्रारंभिक अनुमान है कि चालक को झपकी आने के कारण यह दुर्घटना हुई होगी, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है.जंसा थाना प्रभारी सत्यजीत सिंह ने बताया कि ट्रक के पंजीकरण नंबर के आधार पर मृत चालक की पहचान बरेली निवासी मुनीष गंगवार (पुत्र मुरारी लाल गंगवार) के रूप में हुई है. मुनीष गंगवार करहुआ, थाना सीबीगंज, जनपद बरेली के निवासी थे. कराने का प्रयास किया जा रहा है. शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है. साथ ही दुर्घटना में शामिल अज्ञात वाहन की भी तलाश की जा रही है. घटना के बाद कुछ देर तक रिंग रोड पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने सामान्य किया. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.ALSO READ:संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की बढ़ती संख्या और लापरवाह ड्राइविंग के प्रति चिंता व्यक्त की है. सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर परिणाम लेकर आती हैं, और यह घटना भी इस बात का प्रमाण है कि सड़क पर सतर्कता और सावधानी बरतना कितना आवश्यक है. पुलिस ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़क पर नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दें.