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वाराणसी में रेल मंत्री ने तीन स्टेशनों का किया निरीक्षण, यात्री सुविधा विस्तार पर रहेगा फोकस

वाराणसी में रेल मंत्री ने तीन स्टेशनों का किया निरीक्षण, यात्री सुविधा विस्तार पर रहेगा फोकस
Nov 08, 2025, 08:53 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी : रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बनारस, कैंट और काशी रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं को परखा. निरीक्षण के दौरान उन्‍होंने कहा कि तीनों स्टेशनों को मिलाकर मास्टर प्लान बनाया जाएगा. जिसमें यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष फोकस रहेगा. रेल मंत्री ने कहा कि वाराणसी से जुड़े रेलवे स्टेशनों पर विकास कार्य उसकी विरासत को ध्यान में रखते हुए करवाया जाएगा. बनारस से खजुराहो तक जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह में भाग लेने आए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तीनों स्टेशनों का निरीक्षण कर अधिकारियों से स्टेशनों पर चलने वाले विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करते रहने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वाराणसी जंक्शन के द्वितीय प्रवेश द्वार पर एक और तृतीय प्रवेश द्वार पर दो नए प्लेटफ़ॉर्म बनेंगे. यहां रोपवे और रेलवे स्टेशन को इंट्रीग्रेटेड करके री- डेवलपमेंट प्लान बनाया जा रहा है.


दिल्ली रेलवे स्टेशन की तरह स्थाई होल्डिंग एरिया


इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों से जुड़े मॉडल को भी देखा. रेल मंत्री ने कहा कि दिल्ली रेलवे स्टेशन की तरह ही वाराणसी रेलवे स्टेशन पर भी स्थाई होल्डिंग एरिया बनाया जाएगा. जिससे कि बड़े त्यौहार और अन्य आयोजन में यात्रियों को कोई परेशानी ना हो. अपने निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री तीनों स्टेशनो पर यात्री सुविधाओं के साथ-साथ रेलवे कॉलोनी में रहने वाले लोगों की भी स्थिति जानने भी पहुंचे.


रेलवे प्‍लान - काशी बनेगा बड़ा स्टेशन


रेल मंत्री ने कहा कि वाराणसी रेलवे स्टेशन पर रोपवे स्टेशन भी बन रहा है. ऐसे में रोपवे और स्टेशन को जोड़कर एक प्लान बनाया जाएगा, जिससे कि यात्रियों को कोई परेशानी ना हो. साथ ही उन्होंने कहा कि काशी रेलवे स्टेशन को एक बड़ा स्टेशन बनाया जाएगा. जहां से कई गाड़ियां चलाई जाएगी. बनारस रेलवे स्टेशन से साउथ की ओर जाने वाली सभी गाड़ियों को चलाने का प्लान है.


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सिग्नेचर ब्रिज पर जल्द शुरू होगा कम


रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मालवीय पुल पर बनने वाले सिग्नेचर ब्रिज की डिजाइन पूरी हो गई है. बहुत जल्दी इसका काम शुरू होगा. यह एक ऐसा ब्रिज होगा जिस पर चार रेलवे लाइन और 6 हाईवे की लेन होगी, जो कि देश का सबसे बड़ा ब्रिज होगा. हाइवे पर चलने वाले लोगो को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो, इसका विशेष ख्याल रखा जाएगा. निरीक्षण के दौरान रेलवे अधिकारियो के साथ ही राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.


रेल मंत्री ने बरेका कर्मियों का किया उत्‍साहवर्धन


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बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आज उत्साह और ऊर्जा का वातावरण रहा, जब भारत सरकार के केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बरेका का निरीक्षण किया. इस अवसर पर अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार एवं महाप्रबंधक, बरेका श्री सोमेश कुमार उपस्थित रहे.

रेल मंत्री ने लोको फ्रेम शॉप, लोको असेम्बली शॉप और लोको टेस्ट शॉप का विस्तृत निरीक्षण किया तथा निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी जानकारियाँ प्राप्त कीं. निरीक्षण के दौरान उन्होंने कर्मचारियों से संवाद करते हुए लोको निर्माण की बारीकियों पर चर्चा की और विशेष रूप से महिला कर्मचारियों से मिलकर उनका उत्साहवर्धन किया; कहा कि लोको निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. बरेका की पहचान उच्च गुणवत्ता और नवाचार से बनी रहनी चाहिए.


काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 2025-26 के लिए क्वालीफाई कर लिया. काशी विद्यापीठ की टीम ने सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए उक्त प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने हेतु अर्हता प्राप्त की. अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 22 से 28 जनवरी तक सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर में आयोजित है.हॉकी (पु.) टीम के मैनेजर प्रो. संजय कुमार सिंह एवं टीम कोच सतीश नारायण सिंह हैं.इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी , क्रीड़ा परिषद उपाध्यक्ष प्रो. ब्रजेश कुमार सिंह, क्रीड़ा परिषद सचिव डॉ. उर्जस्विता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय, परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा, डॉ. राधेश्याम राय, कु. बीना, डॉ. अमरेन्द्र कुमार सिंह, राम लाल, ओंकार नाथ, अरिवन्द कुमार, संतोष कुमार आदि लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए हॉकी (पु.) टीम को बधाई एवं शुभकामनायें दी. बी.ए. के छात्रों का छात्रवृत्ति बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन 18 जनवरी से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ मुख्य परिसर के बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का छात्रवृत्ति के संदर्भ में बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन 18 जनवरी को होगा.वहीं, बी.ए. द्वितीय एवं तृतीय वर्ष का 19 जनवरी को आयोजित है. कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय ने बताया कि पूर्वाह्न 09:30 से अपराह्न 01 बजे तक छात्राओं का एवं अपराह्न 01:30 से शाम 05 बजे तक छात्रों का बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन मानविकी संकाय में होगा.ALSO READ : वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
मौनी अमावस्या कब है, जाने स्नान-दान का समय
मौनी अमावस्या कब है, जाने स्नान-दान का समय
Mauni Amavasya 2026: हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या का काफी महत्व होता है. हिंदू धर्म की पवित्र तिथियों में ये अमावस्या एक खास पर्व माना जाता है. इस दिन स्नान, दान, तर्पण, व्रत, मौन, साधना करने का विशेष महत्व है. इस पावन दिन पर श्रद्धालु संगम तट या फिर पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं और जरूरतमंदों में दान भी करने की परंपरा को निभाते हैं. पितृ तर्पण और मौन व्रत के लिए भी मौनी अमावस्या का दिन काफी श्रेष्ठ होता है.कब है मौनी अमावस्या बता दें, मौनी अमावस्या इस साल रविवार 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है. हालांकि तिथि को लेकर भक्त काफी असमंजस में हैं कि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है या 19 जनवरी को है. तिथि में कंफ्यूजन होने के कारण स्नान-दान के शुभ मुहूर्त में भी दुविधा है. इसलिए, माघ अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी को देर रात 12 बजकर 3 मिनट से शुरू होगी और 19 जनवरी को देर रात 1 बजकर 21 तक रहेगी. 18 जनवरी उदयातिथि और पूरे दिन अमावस्या रहेगी. ऐसे में इसी तिथि पर मौनी अमावस्या मनाई जाएगी.मौनी अमावस्या पर स्नान-दान का समय कहा जाता है कि, मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयाग के संगम समेत पवित्र नदियों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. लोग तड़के सुबह से ही पवित्र नदियों के तट पर पहुंचकर स्नान करते हैं. मान्यता है कि, इस दिन किया गया स्नान पापों का नाश करता है और पुण्य में वृद्धि होती है. इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का काफी महत्व बढ़ जाता है. इस बार तो मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. साथ ही इस दिन पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा.इन तिथियों में स्नान के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए सुबह 05.27 से 06.21 मिनट तक का समय रहेगा. वहीं दोपहर में स्नान के लिए दोपहर 12.10 से 12.53 मिनट तक का समय है. स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें. इसके बाद पितरों को जल से तर्पण देकर आप अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा कर सकते हैं.Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि इन मान्यताओं की पुष्टि journalistcafenews किसी भी हाल में नहीं करता है. इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
Salim-Javed: जावेद अख्तर और सलीम खान ने अलग होने से पहले 24 फिल्मों में साथ काम किया था, जिनमें से 22 हिट रही थी. जिनमें दीवार, शोले, डॉन और जंजीर जैसी फिल्में हिंदी सिनेमा को देने वाली मशहूर जोड़ी सलीम-जावेद पर प्राइम वीडियो ने डॉक्युसीरीज एंग्री यंग मेन रिलीज की है. इस सीरीज में सलीम-जावेद जोड़ी के सलीम खान और जावेद अख्तर से जुड़ी अनदेखी और अनकही बातों को पेश किया गया है. इस सुपरहिट जोड़ी ने एक साथ 24 फिल्मों की कहानी संग संवाद लिखे जो ब्लॉकबस्टर रही. लेकिन 21 जून 1981 को ये जोड़ी ऐसे टूटी मानों इन दोनों के बीच का एक गहरा रिश्ता चकनाचूर हो गया. वो जोड़ी जिसका कलम चलाना फिल्म के हिट होने की गारंटी थी.पल भर में कैसे बिखर गई बेस्ट जोड़ीये वहीं जोड़ी है जिसने विज्ञापन देकर शोले के हर सेंटर से एक करोड़ रुपये कमाने का दावा किया था, फिर फिल्म का ये आंकड़ा तीन करोड़ तक पहुंच गया. वो जोड़ी जिसने जंजीर के पोस्टर पर खुद ही एक पेंटर को पैसे देखकर सलीम जावेद का नाम लिखवा दिया था. वो जोड़ी जो एक समय फिल्म के हीरो से ज्यादा फिल्म लिखने की फीस ले रही थी. इस जोड़ी ने सिर्फ 18 दिन के अंदर ब्लॉकबस्टर फिल्म दीवार लिख डाली थी. इतनी खूबिया होने के बाद भी ये जोड़ी बिखर कर रह गई, जिसका कारण हर कोई जानना चाहता है.इसे लेकर एंग्री यंग मेन में एक प्रसिद्ध भारतीय कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैंजावेद अख्तर खुद बताते हैं कि जोड़ी कैसे टूटी. उन्होंने बताया कि करियर का बसंत जा रहा था. हमारे काम में थकान आ रही थी. कभी हम दोनों 24 में से 18 घंटे साथ रहते थे. लेकिन अब हमारे सर्कल अलग हो रहे थे. दोस्त अलग हो रहे थे. इस तरह मैंने अलग होने का फैसला लिया, इस पर सलीम खान ने कहा कि जावेद अलग होना चाहते थे. ऐसे में रोकने के कोई मायने नहीं थे. इस तरह 1981 में भारतीय सिनेमा के इतिहास की ये सबसे सफल जोड़ी अलग हो गई.सलीम और जावेद के अलग होने पर रो पड़ी स्क्रिप्टराइटिंग पर अफसोस सलीम और जावेद के अलग होने के बाद ये जोड़ी अकेले-अकेले स्क्रिप्टराइटिंग की दुनिया में कुछ भी यादगार नहीं कर सकी. हालांकि सलीम खान ने नाम जैसी फिल्म लिखी और जावेद अख्तर ने बेताब, मशाल और अर्जुन जैसी फिल्में. लेकिन सलीम-जावेद जैसा इतिहास ये दोहरा नहीं पाए. हालांकि सलीम-जावेद से अलग होने के बाद जावेद अख्तर ने गीतकार के तौर पर अपनी पहचान कायम कर ली. उनके सलीम खान से अलग होने की एक वजह उनका लिरिक्स की दुनिया की ओर रुझान भी बताया जाता है. लेकिन इस जोड़ी का अलग होना सिर्फ उनके फैन्स का नुकसान था बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी बहुत बड़ा आघात था.