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राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा संभालेंगे जिम्मेदारी

राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा संभालेंगे जिम्मेदारी
Sep 02, 2026, 02:09 PM
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Posted By Niharika dwivedi

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को अब और बेहतर तरीके से संचालित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है. करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके मिश्रा प्रशासन, ऑपरेशनल प्लानिंग और बड़े स्तर पर प्रबंधन का लंबा अनुभव रखते हैं.

राम मंदिर के निर्माण के साथ अब मंदिर परिसर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं और भविष्य के संचालन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ऐसे में CEO की नियुक्ति को मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में अहम फैसला माना जा रहा है.


करीब चार दशक का सैन्य अनुभव

जीतेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन लिया था. उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, पुणे और एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, बेंगलुरु से प्रशिक्षण लिया. इसके अलावा उन्होंने अमेरिका केएयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी अध्ययन किया गया है.

अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर जिम्मेदारियां निभाईं. उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है.


ASTE से लेकर पश्चिमी वायु कमान तक संभाली कमान

जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट(ASTE) के कमांडेंट और चीफ टेस्ट पायलट भी रहे. इसके अलावा वायुसेना मुख्यालय में ऑपरेशनल प्लानिंग और प्रोजेक्ट्स से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम किया.

उनके करियर की प्रमुख जिम्मेदारियों में भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान की कमान संभालना भी शामिल है. उन्होंने 1 जनवरी 2025 को एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफके तौर पर पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली थी. इस दौरान उनके जिम्मे देश की पश्चिमी सीमा से जुड़ी हवाई सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियां थीं.

इससे पहले वह डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. इस पद पर उन्हें सैन्य अभियानों, रणनीतिक योजना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय का अनुभव मिला.


कई सैन्य सम्मानों से सम्मानित

जीतेंद्र मिश्रा को उनके सैन्य करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिल चुके हैं. उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा और उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किए जाने की जानकारी सामने आई थी.


राम मंदिर के लिए CEO की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?

अयोध्या में राम मंदिर में लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था के साथ सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रबंधन, सुविधाओं का संचालन, वित्तीय निगरानी और अलग-अलग सरकारी व निजी एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे कई काम होते हैं.

ऐसे में CEO की नियुक्ति से इन व्यवस्थाओं को एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे के तहत संचालित करने में मदद मिल सकती है . CEO की जिम्मेदारी ट्रस्ट की नीतियों को जमीन पर लागू कराने, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बनाने और मंदिर से जुड़ी रोजमर्रा की व्यवस्थाओं की निगरानी करने की हो सकती है.

पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा के पास बड़े संस्थानों और जटिल ऑपरेशनल व्यवस्थाओं को संभालने का लंबा अनुभव है. ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें पहला CEO बनाया जाना प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है.

वाराणसी में 11 वर्षीय बालिका से छेड़छाड़ का आरोप, सेना के कर्मचारी पर केस,मासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ मुकदमा ...
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वाराणसीःमासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में कैंट थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी.परिजनों ने पुलिस को बताया कि 11 साल की बच्ची दूध लेने के लिए घर से बाहर गई थी. इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले सेना के हवालदार ने उसे अपने कमरे में बुलाया. कमरे के अंदर उसने बच्ची के साथ गलत हरकत शुरू कर दिया. घटना के बाद बच्ची वहां से अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी बात बताई. बच्ची की बात सुनकर परिवार के लोग परेशान हो गए.उन्होंने मामले की जानकारी कैंट थाना पुलिस को दी और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया. पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. बच्ची और उसके परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है.ALSO READ:ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रसाथ ही पुलिस आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी साक्ष्य जुटा रही है. जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस और परिवार की ओर से बच्ची की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है.आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बनारस में नदी में होगी जलयानों की मरम्मत....
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वाराणसीः इनलैंड वाटरवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने रामनगर में बंदरगाह के उत्तरी छोर पर चार बीघा क्षेत्र में बनने वाले शिप रिपेयरिंग सेन्टर की शुरुआत की है. इसके साथ ही वाराणसी देश का पहला शहर होगा जहां नदी में जलयानों की मरम्मयत की जाएगी.कार्यदायी संस्था लार्सन एन्ड टुब्रो जिओ स्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है. यहां जहाजों को रिपेयर करने के लिए उत्त्तरी छोर पर एक वाटर चैनल बनाया जाएगा जहा जहाज नदी की मुख्य धारा से अंदर चैनल में रिपेयर होने के लिए आएंगे.कार्यदायी संस्था फिलहाल रिपेयर फैसिलिटी के प्लेटफार्म को बनाने का काम कर रही है उनके मुख्य अभियंता रमेश जोशी ने बताया कि प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करना है. बताया कि बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के लिए जल्दी ही काम शुरू करना पड़ा.ALSO READ: ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रइस बाबत उन्होंने बताया कि देश मे किसी भी नदी पर बनने वाला यह पहला शिप रिपेयरिंग सेंटर है. यहां कुछ जहाजों को क्रेन के माध्यम से ड्राई डाक सूखी सतह पर लाकर रिपेयर करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही जहाज में पानी की सतह से ऊपर की खराबी को नदी में ही ठीक कर दिया जाएगा.बताया रि देश मे अभी तक शिप रिपेयरिंग सेन्टर समुद्रों के किनारे ही बनाये जाते है देश मे किसी नदी के ऊपर पहली बार शिप रिपेयरिंग सेन्टर बन रहा है. पहले जहाजों को रिपेयरिंग के लिए कोलकाता जाना होता था जो अब बनारस में भी संभव है.
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।