गांव में विकास कार्य को लेकर मंत्री राजभर बोले- लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

पंचायती राज विभाग चालू वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों पर आवंटित बजट का केवल 22.43% ही खर्च कर पाया है. वित्तीय वर्ष का साढ़े आठ महीने बीत जाने के बाद भी बजट में आवंटित विकास कार्यों की कुल धनराशि का एक चौथाई हिस्सा नहीं खर्च कर सका है. वहीँ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक के बाद से विभाग ने कार्य में तेजी लाने की कवायद शुरू कर दी है. इस सिलसिले में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अधिकारियों को लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं, अगले साल होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को देखते हुए सरकार का ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य कराए जाने पर जोर देने में लगी हुई है.

शासन स्तर से सुस्त पड़ी बजट स्वीकृति
बता दें, शासन स्तर से बजट स्वीकृति की गति सुस्त रही है. कुल बजट में से 35.64 प्रतिशत धनराशि ही शासन ने स्वीकृत किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बजट खर्च पर समीक्षा के बाद विभाग ने विकास कार्यों को तेज कराने की कवायद शुरू कर दी है. चालू वित्तीय वर्ष 2025-26में पंचायती राज विभाग को विकास कार्यों के लिए 950.26 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है.

वहीं, 15 दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, प्रविधानित कुल बजट में से 35.64 प्रतिशत यानी 338.68 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां शासन से जारी की गई हैं. जिसमें ये साफ देखा गया है कि, विभागाध्यक्ष द्वारा शासन से स्वीकृति बजट की पूरी 100 प्रतिशत धनराशि विकास कार्यों के लिए आवंटित किए जा चुके हैं. जिसमें से 213.14 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च भी किए गए हैं, इस वर्ष विकास कार्यों के लिए प्रविधानित कुल बजट के मुकाबले 22.43 प्रतिशत धनराशि ही खर्च किया जा सका है, बाकी बचे साढ़े तीन माह में 77.57 प्रतिशत बजट खर्च करने की चुनौती दी गई है.

विकास कार्यों पर बोले प्रमुख सचिव
प्रमुख सचिव अनिल कुमार का कहना है कि विकास कार्यों के बजट का उपभोग शीघ्रता से करने के लिए अधिकारियों से कहा गया हैं. उन्होंने बताया कि सबसे बड़ा प्रोजेक्ट ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की है. इस योजना के लिए पहले चरण में 450 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिल चुके हैं, दूसरे चरण में भी 450 करोड़ रुपये केंद्र से शीघ्र मिलने वाले हैं. जिससे अधिक से अधिक पंचायतों को इस योजना से आच्छादित कर दिया जाएगा.



