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कूड़े के ढेर में मिले मानव अंग जैसे अवशेष, मचा हड़कंप

कूड़े के ढेर में मिले मानव अंग जैसे अवशेष, मचा हड़कंप
Sep 10, 2025, 07:17 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: भेलूपुर थाना क्षेत्र के तुलसीपुर में मंगलवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब कूड़े के ढेर में मानव अंग जैसे हड्डी और कंकाल के टुकड़े देखे गए. देखते ही देखते इलाके में लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और हड्डियों के टुकड़ों को बोरी में भरकर जांच के लिए भेज दिया.


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तुलसीपुर स्थित भार शिवमंगल स्कूल के पास लंबे समय से कूड़ा डाला जाता है. मंगलवार को करीब चार बजे स्थानीय लोगों ने कूड़े में चमकदार हड्डी जैसे टुकड़े देखे. नजदीक जाकर देखने पर ये टुकड़े मानव अंग जैसे प्रतीत हुए. किसी ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस दल मौके पर पहुंचा और पूरे इलाके के संदिग्ध स्थानों की जांच शुरू कर दी.


मौके पर मिले संदिग्ध अवशेष


पुलिस और फोरेंसिक टीम ने कूड़े के बीच से संदिग्ध हड्डियां, कंकाल जैसे टुकड़े और ग्लब्स आदि बरामद किए. अवशेषों की चमकदार बनावट ने पुलिस को भी उलझन में डाल दिया. डीसीपी गौरव बंसवाल ने बताया कि पहली नजर में ये अवशेष क्लिनिकल प्रयोग में इस्तेमाल की जाने वाली हड्डियां प्रतीत हो रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि ये वास्तविक मानव अंग होते तो इनमें सड़न और दुर्गंध अवश्य होती, लेकिन मौके से बरामद टुकड़े चमकदार और साफ-सुथरे दिख रहे हैं.


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जांच में जुटी फोरेंसिक टीम


फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने इकट्ठा कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने सभी बरामद टुकड़ों को बोरी में भरवाकर प्रयोगशाला भेज दिया है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बरामद हड्डियां वास्तव में मानव अंग हैं या फिर प्रयोगशाला में पढ़ाई और रिसर्च के लिए प्रयुक्त होने वाले कृत्रिम नमूने.


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इलाके में अफवाहों का दौर


घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र में सनसनी मच गई. लोग तरह-तरह के कयास लगाने लगे. किसी ने इसे हत्या की आशंका से जोड़ा तो किसी ने मेडिकल कॉलेज या लैब से फेंके गए नमूनों की बात कही. हालांकि पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है और जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर न पहुंचने की सलाह दी है. संभावना है कि असलियत फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी. तब तक क्षेत्रवासी प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें टिकाए हुए हैं.

बैंक खातों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो शातिर गिरफ्तार
बैंक खातों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो शातिर गिरफ्तार
Gang involved in cyber fraud from bank accounts busted, two criminals arrestedवाराणसी: पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम टीम ने आमजन के बैंक खातों से धोखाधड़ी कर अवैध निकासी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, फर्जी कूटरचित आधार कार्ड और नकदी बरामद की गई है. दोनों आरोपी गाजीपुर और बलिया के निवासी बताए जा रहे हैं.पुलिस के अनुसार 24 मई 2026 को शिवदत्त हरिजन निवासी बलिया, वर्तमान पता ट्रांजिट हाल पुलिस लाइन वाराणसी ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बैंक खाते से अवैध रूप से 12 लाख रुपये की साइबर ठगी कर ली गई. मामले में थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई.पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देश पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देश पर डीसीपी अपराध के नेतृत्व में एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना की निगरानी में विशेष टीम गठित की गई. टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 27 मई को वाराणसी से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरेंद्र कुमार निवासी मोहम्मदाबाद गाजीपुर और विनय कुमार निवासी बलिया के रूप में हुई है.अपराध करने का तरीकापुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले लोगों के बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों के सिम को चोरी, छल अथवा “सिम अपडेट” के नाम पर स्वैप करा लेता था. इसके बाद आरोपी PayTM, PhonePe, G-Pay और Mobikwik जैसे यूपीआई एप सक्रिय कर लेते थे. फिर फर्जी आधार कार्ड और गलत पहचान पत्रों के जरिए विभिन्न सीएसपी सेंटरों से नकदी निकालकर रकम आपस में बांट लेते थे.Also Read: BHU के इस छात्रावास के खाने में मिली छिपकली, अस्‍पताल में भर्ती कई छात्रपुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं. गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक योगेंद्र प्रसाद, निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, उपनिरीक्षक संजीव कन्नौजिया, उपनिरीक्षक आलोक रंजन सिंह सहित साइबर क्राइम थाना की टीम शामिल रही.
BHU के इस छात्रावास के खाने में मिली छिपकली,  अस्‍पताल में भर्ती कई छात्र
BHU के इस छात्रावास के खाने में मिली छिपकली, अस्‍पताल में भर्ती कई छात्र
Lizard found in food at BHU hostel, several students hospitalisedवाराणसी: बीएचयू स्थित डालमिया छात्रावास के मेस नंबर 4 के खाने में छिपकली मिलने की घटना सामने आई है. इस घटना के बाद छात्र आक्रोशित हो गए. बड़ी संख्या में छात्र मेस के बाहर जुट गए. छात्रों का आरोप है कि बुधवार दोपहर के भोजन में छिपकली मिली, जिसके बाद उन्होंने तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. छात्रों ने स्वास्थ्य जोखिम को लेकर चिंता जताई और कहा कि ऐसी लापरवाही से फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्या हो सकती है. सोशल मीडिया पर भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई है, जहां छात्र लापरवाही की निंदा करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.तुरंत कार्रवाई की जाएगीयह घटना हालिया छात्रावास खाने की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों की कड़ी में आती है. बीएचयू प्रशासन ने पहले भी ऐसी शिकायतों पर जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल सका है. प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है.मौके पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड और वार्डन पहुंचे. अधिकारी छात्रों को शांत करने और मामले की जांच का आश्वासन देने में जुटे हैं. छात्रों को समझाने की कोशिश की जा रही है कि तुरंत कार्रवाई की जाएगी.मेस की सफाई व्यवस्था पर सख्त निगरानीछात्रों की मुख्य मांग है कि मेस की सफाई व्यवस्था पर सख्त निगरानी रखी जाए, खाने की गुणवत्ता की जांच के लिए तत्काल सैंपलिंग हो और दोषी ठेकेदार या स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाए. एक छात्र ने बताया, “हम रोजाना खराब खाना खा रहे हैं, लेकिन आज छिपकली मिलना सीमा पार कर गया. स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” सवाल यह उठता है कि इस भोजन को कितने छात्र ग्रहण कर चुके थे.Also Read: जन्मतिथि संशोधन में 40 हजार घूस लेने का आरोप, 6 कर्मचारियों से जवाब तलबफिलहाल आठ छात्रों को एंबुलेंस से अस्‍पताल भेजा गया है. भोजन करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना है. घटना के बाद हॉस्टल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रों ने नाराजगी जताई.
जन्मतिथि संशोधन में 40 हजार घूस लेने का आरोप, 6 कर्मचारियों से जवाब तलब
जन्मतिथि संशोधन में 40 हजार घूस लेने का आरोप, 6 कर्मचारियों से जवाब तलब
Accused of taking bribe of Rs 40,000 in date of birth amendment, 6 employees summoned for replyवाराणसी: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी में हाईस्कूल प्रमाणपत्र में जन्मतिथि संशोधन को लेकर बड़ा खेल सामने आया है. बीएचयू के छात्र और गोरखपुर के कूड़ाघाट निवासी अंकित कुमार ने बोर्ड के सचिव से शिकायत कर आरोप लगाया कि उसके प्रमाणपत्र में जन्म तिथि संशोधन को लेकर वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में 40 हजार रुपये घूस लिए गए. प्रभारी अपर सचिव ने प्रथम दृष्टया संलिप्त मिले 6 कर्मचारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है.जन्मतिथि संशोधन की प्रक्रिया अपनाई गईप्रभारी अपर सचिव व संयुक्त शिक्षा निदेशक वाराणसी दिनेश सिंह के अनुसार आरोप है कि 2014 के हाईस्कूल प्रमाणपत्र में नियमों के विपरीत जन्मतिथि संशोधन की प्रक्रिया अपनाई गई. प्रथम दृष्टया जांच में फाइल में कई स्तरों पर अनियमितताएं सामने आईं. उन्होंने बताया कि मामला गोरखपुर के नीना थापा इंटर कॉलेज के छात्र अंकित कुमार से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार छात्र की जन्मतिथि 29 फरवरी 1998 के स्थान पर 28 फरवरी 1998 करने का अनुरोध किया गया था. जिसे सही कर प्रमाणपत्र एक संतोष नामक व्यक्ति को दे दिया गया है.सचिव स्तर से भी अनुमोदन दर्जप्रभारी अपर सचिव व संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि छात्र ने हाईस्कूल परीक्षा पास करने के करीब नौ साल बाद नवंबर 2023 में जन्मतिथि संशोधन के लिए आवेदन भेजा था. जबकि इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के प्रावधानों के अनुसार इतनी देर बाद संशोधन स्वीकार्य नहीं माना जाता. बावजूद दिसंबर 2023 में स्कूल से जुड़े दस्तावेज और स्थानांतरण प्रमाणपत्र कार्यालय में मिले और फाइल आगे बढ़ती रही. फाइल पर दर्ज टिप्पणियों के अनुसार प्रारंभिक स्तर पर इसे अस्वाभाविक त्रुटि बताते हुए संशोधन उचित माना गया. बाद में प्रशासनिक अधिकारियों और सहायक सचिव स्तर से भी अनुमोदन दर्ज किए गए.Also Read:बरेका में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लिया यह संकल्‍पहालांकि, जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित फाइल में कई महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं थे और कुछ टिप्पणियों पर बिना आवश्यक परीक्षण के हस्ताक्षर किए गए. प्रभारी सचिव की ओर से जो स्पष्टीकरण पत्र दिया गया है, उसमें यह भी उल्लेख है कि फरवरी 2026 में ओवरराइटिंग कर पुराने आदेशों में बदलाव किया गया और जन्मतिथि संशोधन से संबंधित आदेश जारी कर दिया गया.टीओआरसी पत्र के आधार पर कार्रवाईजांच के दौरान यह भी पाया गया कि जिस टीओआरसी पत्र के आधार पर कार्रवाई दिखाई गई, वह संबंधित अनुभाग में नहीं था. मामले में उप सचिव साहब सिंह यादव समेत सहायक सचिव, प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक और वरिष्ठ सहायक समेत कुल छह कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है. निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी जाएगी.